Notifications
Clear all

तारक मेहता का नंगा चश्मा | Tarak Mehta Ka Nanga Chasma

Page 1 / 15

Satish Kumar
Posts: 1092
Admin
Topic starter
Member
Joined: 1 year ago

तारक मेहता का नंगा चश्मा | Tarak Mehta Ka Nanga Chasmah

गोकुल धाम सोसाइटी | Gokuldham Society

Gokuldham Society

गोकुल धाम सोसाइटी | Gokuldham Society

गोकुलधाम सोसाइटी की पहली सुबह....सोसाइटी के बुजुर्ग श्री चंपकलाल गाड़ा हर सुबह की तरह बालकनी में कुल्ला करने आते हैं और हर बार की तरह नीचे से भिड़े यानी कि आत्मराम तुकारम भिड़े नीचे से गुजर रहे होते हैं...

जैसे ही बाबूजी कुल्ला करते हैं वो सीधे भिड़े सर के फेस पे आके गिरता है....और फिर शुरू होता है भिड़े का लेक्चर...रोज़ हर सुबह इन दोनो का यही चलता रहता है...

वैसे भी आपको ये बता देता हूँ कौन कौन इस सोसाइटी का मेंबर है और वो कौन कौन से फ्लोर पे रहते हैं....

गोकुलधाम के एक सेक्रेटरी आत्मराम तुकारम भिड़े उनकी बीवी माधवी भिड़े और उनकी बेटी सोनू...ये तीनो बी विंग के 1स्ट फ्लोर पे रहते हैं.

उनके साथ उनके पड़ोसी और चहेते फ़्रेंड रोशिन सिंग सोढी और उनकी बीवी ऱोशन और उनका छोटा सा बेटा गोगी.

अब आते हैं इस सोसाइटी के डॉक्टर के पास...जो कि ग्राउंड फ्लोर पे रहते हैं नाम है डॉक्टर. हंस राज हाथी उनकी बीवी कोमल हाथी और उनका बेटा गोली....आप नाम से ही समझ गये होंगे कि कितना भारी परिवार होगा...

गाड़ा एलेक्ट्रॉनिक्स के मालिक श्री ज़ेठालाल चंपकलाल गाड़ा जो कि ए विंग के फर्स्ट फ्लोर पे रहते है...अपनी डोबी नॉनसेन्स बीवी दया और गुस्से वाले बाबूजी चपकलाल गाड़ा और उनका शैतान बेटा टप्पू.

अब बारी आती है तारक मेहता की जो उसी विंग के ग्राउंड फ्लोर पे रहते हैं और पेशे से वो एक लेखक हैं वो अपनी बीवी एटीएम के साथ रहते हैं यानी कि अंजलि तारक मेहता.

बी विंग की एक सुंदर सी लड़की जो कि ग्राउंड फ्लोर पे ही रहती है वो पेशे से एक रिपोर्टर हैं और उसका नाम भी रीता रिपोर्टर है.

अब हम आते हैं सी विंग की तरफ...जहाँ फर्स्ट फ्लोर पे रहते हैं कृष्णन आइयर वो एक साइंटिस्ट हैं वो अपनी बीवी बबिता आइयर के साथ रहते हैं..

इसी विंग के 2न्ड फ्लोर पे रहते हैं कॅन्सल....बोलने का तात्पर्य ये है...मिस्टर पत्रकार पोपटलाल रहते हैं...जो हर टाइम सिर्फ़ कॅन्सल बोलते रहते हैं...वैसे उनके नाम से तो पता चल ही गया होगा कि वो एक पत्रकार हैं.

एंड में आते हैं अब्दुल..जो इस सोसाइटी के बाहर जनरल स्टोर चलाते हैं..मगर सब इन्हे घर ही का हिस्सा मानते हैं...

ये थे इस सोसाइटी के और मेरी कहानी के किरदार...

आगे में इस सोसाइटी की महिलाओं के बारे में बताउन्गा कौन कैसा दिखता है...किसकी फिगर कैसी है.....

गोकुलधाम सोसाइटी की महिलाये:

सबसे पहले बात करेंगे इस सोसाइटी की सबसे हॉट सबसे सेक्सी....जिसकी फिगर दिख के लोगों का लंड खड़ा हो जाए...जिसे देख के सब उसे चोदने का सोचें....उसका नाम है बबीता आइयर...

Munmun Dutta Babita Ji naked Benudes

बबीता आइयर की फिगर है 40 साइज़ के बड़े बड़े चुचे..साले किसी भी कपड़े में फिट नही होते ऐसा लगता है अभी बाहर आ जाएँगे....उसकी 28 की कमर और 38 की गान्ड..जब वो चलती है तो हर कोई उसकी गन्ड को देखता ही रह जता है....उसकी गान्ड को देख के ऐसा लगता है जैसे हर रोज़ उसकी कोई गान्ड मारता हो....

उसके बाद बारी आती है अंजलि तारक मेहता की...वो भी कोई कम सेक्सी नही है...पर हाँ बबिता की तरह उसके बड़े बड़े नही है....मगर वो लगती एक दम हॉट है....32 के चुचे 26 की कमर और 30 की गान्ड...शकल से भी एक दम चुदक्कद ही लगती है..मेहता शाब खूब बज़ाते होंगे इसकी.....

अहमदावादी दया वैसे तो ठीक दिखती है....चुचे भी अच्छे हैं उसके 32 के ....कमर 28 और गान्ड 32 की....लगता है इसे गान्ड मरवाने का बहुत मन करता है तभी अच्छी गान्ड है....शायद टप्पू के पापा यानी जेठालाल बहुत गान्ड मारता होगा ....

रीता रिपोर्टर देखने में तो सुंदर सी है..स्लिम बॉडी है...मगर उसकी असेट्स है कमाल के...30 के चुचे 26 की कमर और 30 की गान्ड....हर नौजवान या फिर कोई बूढ़ा भी इसी की चूत और गान्ड मारने की सोचता है....

अब आती है माधवी भिड़े...ये तो कपड़े भी ऐसे पहनती है कि बस ऐसा लगता है हर किसी से चुदना चाहती हो....स्लेवलेशस ब्लाउस पहन के अपने चिकने शोल्डर्स दिखा के ऐसे चलती है जैसे अभी चुदना हो....वैसे ये भी एक माल से कम नही है ...34 के चुचे 28 की कमर और 32 की गान्ड....शकल से पूरी चुड़क्कड़ है...इसलिए भिड़े शाब सोसाइटी के सेक्रेटरी बने हुए हैं जिससे घर में रहने का मौका मिले और माधवी की मारने का भी....

रोशन सोढी वैसे है तो पारसी लेकिन चुदाई में एक दम फर्स्ट क्लास दिखने में सुंदर है...चुचे भी 34 के हैं कमर 26 की और गान्ड 34 की..है तो हॉट ...खूब बजाता होगा सोढी इसकी...

अब आख़िर में बात करते हैं कोमल हाथी की...देखने में तो एक दम मोटी सी है...चुचे 36 के कमर 36 की और गान्ड है 40 की ... पूरी सोसाइटी में सब्से बड़ी गंद इन्ही की है...एक वो औरत है जो कहती है कि हर कोई इनकी मारे ..पर बेचारी को अपने पति के लंड से काम चलाना पड़ता है...कोई इनकी तरफ देखता नही है...मोटी जो हैं ये...

अब बारी आती है इस सोसाइटी के जेंट्स की...उनके बारे में भी तो जानना पड़ेगा ना..कि कौन कैसा है....तो चलिए जानते है....

गोकुलधाम सोसाइटी के जेंट्स:

सबसे पहले बात करेंगे सोसाइटी के एक मात्र कुंवारे...मिस्टर. पत्रकार पोपटलाल...बेचारे अभी तक कुंवारे हैं...ये किसी भी लड़की के साथ शादी करने के लिए तैयार हो जाते हैं चाहे वो कामवाली ही क्यूँ ना हो...इनकी नीयत आगे पता चलेगी...

इस सोसाइटी के साइंटिस्ट कृष्णन आइयर ... साइंटिस्ट है तो एक्सपीरियेन्स तो करेंगे हे...वैसे तो इनके पास सोसाइटी की सबसे हॉट औरत इनकी बीवी है...मगर क्या पता इनके दिमाग़ में क्या चल रहा है...वो भी आपको धीरे धीरे पता चल जाएगा..

जेठालाल के फेबरेट यानी कि तारक मेहता...जी ये पर्सन तो सारा दिन कलम से कुछ ना कुछ लिखते ही रहते हैं...वैसे में बता दूं ऐसे लोगों की नज़र इधर उधर ज़्यादा भटकती है...

अब बारी है श्री जेठालाल गाड़ा की....वैसे हैं तो ये गाड़ा एलोकट्रनिक्स के मालिक...बीवी भी बहुत अच्छी मिली है .... लेकिन इनकी नज़र तो किसी और पर ही टिकी रहती है...अब लोग समझ गये होंगे किसकी बात कर रहा हूँ.............आप लोग सही सोच रहे हैं वो है बबिता जी......जेठालाल की सबसे फवरेट है..उनके लिए वो कुछ भी कर सकते हैं...

इसके बाद बारी आती है...एक मात्र सेक्रेटरी की आत्मराम तुकारम भिड़े....ये पेशे से एक शिक्षक है..घर पे ही ट्यूशन पढ़ाते हैं..और हाँ माधवी भिड़े जो आचार पापड बनाती है उसकी डेलिवरी भी यही करती है.....मेरे माने तो सबसे लकी आदमी पूरी सोसाइटी में यही है...सार दिन सोसाइटी में रहो और इधर उधर झाँकते रहो......

अब उनके पड़ोसी रोशिन सिंग सोढी की आती है....वो एक गॅरेज चलाते हैं....उनकी बीवी भी काफ़ी सुंदर है...और ये पार्टी शार्टी के सबसे बड़े दीवाने है....इसलिए इनके दिमाग़ में क्या चलता रहता है बता नही सकते.....

अब इस सोसायटी के सबसे भारी आदमी यानी की मिस्टर हाथी...ये डॉक्टर हैं...घर पर ही क्लिनिक खोल रखा है...सार दिन पेशेंट में ही लगे रहते है....

आखरी में अब्दुल की बारी ... हाँ वही जनरल स्टोर का मालिक...वो इस सोसायटी की सारी लॅडीस को बहन मानता है...लेकिन आप लोग तो जानते हैं ना इस दुनिया में बहुत सार बेह्न्चोद है...हाहहहः....

वैसे आप लोग सोच रहे होंगे सुन के तो लगता नही ये सब ठरकी है...लेकिन क्या पता आगे क्या होगा...बॅस इंतेज़ार करें और देखते जायें...आगे ये किरदार क्या उधम मचाते हैं..

To be Continued

Reply
74 Replies
Satish Kumar
Posts: 1092
Admin
Topic starter
Member
Joined: 1 year ago

दया उल्टी लेट जाती है और जेठालाल का लंड चूस्ति रहती है ... इतनी देर में जेठालाल दया की साड़ी और पेटिकोट उपर कर के उसकी पेंटी को नीचे खिसका देता है....और देखते ही उसकी आँखे फटी रह जाती है...

जेठालाल :- दया ये क्या...तेरी चूत तो इतनी गीली है कि बता नही सकता....आज से पहले इतनी गीली चूत नही देखी तेरी..इतना बोलते ही बस जेठालाल तो भूके भेड़िए की तरह उस पर चिपक जाता है....और उसे ज़ोर ज़ोर से चूस्ता रहता है....इस वक़्त दया सिर्फ़ छोटी छोटी आहह हुम्म कर रही थी क्यूँ कि उसके मूह में लंड था...मगर थोड़ी देर बाद जो जेठालाल ने किया उससे वो अपने आप को रोक नही पाई....

तारक मेहता का नंगा चश्मा | Tarak Mehta Ka Nanga Chasma | Update 2

जेठालाल और दया की चूसाई | Jethalal aur Daya Ki Chusai

शुरू करते हैं कहानी किरदार तो पता चल गये हैं अब......

सुबह का वक़्त गोकुलधाम में....तो शुरू करते हैं जेठालाल के घर से हर रोज़ की तरह बापूजी पेपर पढ़ रहे थे अपना बड़ा सा चस्मा लगा के...और उधर जेठालाल कमरे में सोया हुआ था...फिर आई उनकी धरम पत्नी दया...

दया :- टप्पू के पापा ओ टप्पू के पापा उठ जाइए लेट हो रहा है..बापूजी गुस्सा करेंगे...दुकान नही जाना क्या....

जेठालाल :- आरीईए हन्ंननणणन् दया बॅस 5 मिनट और सोने दे ना...फिर उठता हूँ...थोड़ी देर और...

दया :- ओफू टप्पू के पापा आप ऐसे नही मनोगे ना....तभी दया ने एक तरकीब सोची.....उसने जेठालाल के लंड को छुआ.. लंड को छूते ही दया के शरीर में करेंट दौड़ गया...उस वक़्त मन तो बहुत कर रहा था दया को चुदने का मगर नही चुद सकती थी टाइम नही था......अवर जैसे ही दया ने लंड पकड़ा और उसे ज़ोर से दबा दिया....जेठालाल चिल्लाते हुए उठा.....

जेठालाल :- आआआआआआ.. आआआआआआ.. आआआआआआआअ.. उईईईईईईईईईईई.. ईईईईईईईईईईईईईईई.. ईईईईईईईईईईईईईईईईई..
दया ये क्या था...इतनी ज़ोर से क्यूँ दबाया आआआआआआअ दर्द हो रहा है......

इतनी ज़ोर की आवाज़ सुन के बापूजी चिल्लाते हुए कमरे में आए क्या हुआ जेठा....

और अब जेठालाल और दया का मूत निकलने जैसा हाल हो गया....

जेठालाल :- वो वो वो वो बापूजी....काटा.....चिंटी ने काटा....

बापूजी :- चिंटी पलंग पे चिंटी...पागल हो गया है जेठिया....

एक बार फिर जेठालाल का मूत निकलने जैसे हो गया...

अब दया ने फँसाया था तो उसको दिमाग़ तो लगाना पड़ता ही...और उसने लगाया भी...

दया :- बापूजी वो क्या है ना...जब चिंटी ने काटा तब टप्पू के पापा नीचे थे...जैसे ही उनको काटा वो पलग पर चढ़ गये...

बापूजी :- गुस्से में...आई जेठिया बेबकूफ़ इतनी ज़ोर से कोई चिल्लाता है क्या...नालयक डोबी कहीं का...

जेठालाल :- सॉरी बापूजी ग़लती हो गई...वो एक दम से चींटी ने काटा तो मूह से तेज़ चीख निकल गई..सॉरी...

फिर बापूजी सर हिलाते हुए चले गये...और साथ में ये भी बोल गये कि में मंदिर जा रहा हूँ.......

दया की घंटी बजी..और जो उसे चाहिए था .. उसे वो मिल सकता था...

जेठालाल :- गुस्से में दया नॉनसेन्स डोबी....ऐसा कोई करता है क्या..इतनी ज़ोर से दबाता है क्या कोई लंड को और वो भी जब बापूजी घर में हो....लेकिन थोड़ी ही देर में जेठालाल का गुस्सा कम हो जाता है....सोचिए कैसे.....

जेठालाल डाँट खाने के बाद काफ़ी गुस्से में था और दया ने कुछ ऐसा किया कि उसका गुस्सा शांत होने लगा आइए आगे जानते हैं कैसे.....

जेठालाल बहुत अच्छा महसूस कर रहा था क्यूँ कि दया चद्दर के नीचे जेठालाल का पाजामा उतार कर उसका लंड हाथ में लेकर हिला रही थी...जिससे जेठालाल बहुत खुश हो रहा था.....

जेठालाल :- आरीईई वाहह दया ये क्या सुबह सुबह तू मेरा लंड क्यूँ हिला रही है...

दया :- टप्पू के पापा आपका लंड सुबह क्या मैं दिन रात हिलाना चाहती हूँ ... है ही इतना मस्त कि क्या बताऊ....

वैसे जेठालाल के लंड के बारे में बता दूं... उसी की तरह है तो छोटा सा मगर है बहुत मोटा..लंबाई है 5.5 इंच का मगर मोटाई इतनी कि मुट्ठी में ना आए.... जिसकी वजह से दया उसकी दीवानी थी....

जेठालाल :- मुस्कुराते हुए... अच्छा ... तो फिर हाथ से क्यूँ हिला रही है मूह में ले इसे और चूस....

इतना सुनते ही दया जेठालाल का लंड चूसना शुरू कर देती है.... ऐसे चूस्ति है कि जैसे कितने दिनो की भूखी हो....

जेठालाल :- आआआआ आआआआआआ आआआआ आआआआअ ऊऊऊऊऊऊऊ ऊऊऊऊऊऊ ऊऊऊऊओ उउउउउउउउउ उउउउउउउ उउउउउउ अहह दया कमाल कर रही है तू तो...मज़ा ही आअ गया....और चूस इसे....चूस्ति रह ...आहह......

तभी जेठालाल दया की तरफ देखता है...उसे देख के जेठालाल को पता चल जाता है कि दया की चूत में खल बलि मची हुई है.....वो फ़ौरन दया को बोलता है....

जेठालाल :- दया रुक....

दया :- क्यूँ क्या हुआ टप्पू के पापा..मज़ा नही आ रहा...

जेठालाल :- मज़ा तो आ रहा है....लेकिन अगर किसी और को भी मज़ा आए तब और ज़्यादा मज़ा आएगा....

दया :- मुस्कुराते हुए...समझ जाती है....

तभी जेठालाल दया को बोलता है कि तू मेरे उपर लेट के मेरा लंड चूस...और में तेरी चूत को चुसूंगा....मतलब 69 पोज़िशन..

दया उल्टी लेट जाती है और जेठालाल का लंड चूस्ति रहती है ... इतनी देर में जेठालाल दया की साड़ी और पेटिकोट उपर कर के उसकी पेंटी को नीचे खिसका देता है....और देखते ही उसकी आँखे फटी रह जाती है...

जेठालाल :- दया ये क्या...तेरी चूत तो इतनी गीली है कि बता नही सकता....आज से पहले इतनी गीली चूत नही देखी तेरी..इतना बोलते ही बस जेठालाल तो भूके भेड़िए की तरह उस पर चिपक जाता है....और उसे ज़ोर ज़ोर से चूस्ता रहता है....इस वक़्त दया सिर्फ़ छोटी छोटी आहह हुम्म कर रही थी क्यूँ कि उसके मूह में लंड था...मगर थोड़ी देर बाद जो जेठालाल ने किया उससे वो अपने आप को रोक नही पाई....

जेठालाल ने दया की चूत को दोनो हाथ से फैलाया और उसकी चूत के अंदर अपनी जीभ डाल के कस कस के चूसे जा रहा था....और इससे दया....

दया :- लंड मूह में से निकाल के............. अहह............. टॅप्यूवूऊवूऊवूऊयूयुयूवयू के पपपाााआआआआआआआआअ...... .......... ओह. ओउुुुुुुुुुुुुुउउ उईईईईईईईईईईईईईई..... ये क्या कर रहे हैं आप.... अहह ओह्ह्ह.... मर् गईइई में तो.....आअहहाआहह......

और इधर जेठालाल वैसे ही उसकी चूत को चाटे जा रहा था....अब दया भी अपनी आवाज़ दबाने के लिए उसका लंड चूसे जा रही थी....पर अचानक जेठालाल ने दया की चूत की क्लिट को ज़ोर से चूस डाला और दया....

दया :- टप्पुउुउउ के पपप्प्प्पाा में तो गईिईईईईईई.......

और दया सारा कामरस जेठालाल के मूह के अंदर विसरजित कर देती है....लेकिन जेठालाल का नही निकला था इसलिए....

जेठालाल :- दया जल्दी कर मुझसे अब रहा नही जा रहा....

और दया फटाफट चूस्ति रहती है...लेकिन अचानक...

टप्पू :- मम्मी मम्मी किधर हो तुम....मुझे मेरा वीडियो गेम नही मिल रहा है....

दया और जेठालाल टप्पू की आवाज़ सुन के घबरा जाते हैं...और दया जेठालाल का लंड छोड़ के खड़ी हो जाती है और जेठालाल अपने उपर चद्दर ओढ़ लेता है....

टप्पू :- कमरे में आते हुए...मम्मी कहाँ थी तुम...वो मेरा...

दया :- बीच में बात काटते हुए... हाँ बेटा तू चल में आ कर ढूंडती हूँ... और जेठालाल की तरफ अपनी चिडाने वाली स्माइल देके निकल जाती है...

जेठालाल :- गुस्से में बैठा हुआ...सोचता है... हे भगवान मेरी किस्मत तूने कौन से टाइम पे लिखी थी... कुछ नही मिलता मुझे... कम से कम रिलॅक्स तो होने देते... उसमे भी भंज़ी मार दी आपने....

और फिर अपना मूह लटकाए जेठालाल बाथरूम की ओर चला जाता है....

To be Continued

Reply
Satish Kumar
Posts: 1092
Admin
Topic starter
Member
Joined: 1 year ago

दया और जेठालाल टप्पू की आवाज़ सुन के घबरा जाते हैं...और दया जेठालाल का लंड छोड़ के खड़ी हो जाती है और जेठालाल अपने उपर चद्दर ओढ़ लेता है....

टप्पू :- कमरे में आते हुए...मम्मी कहाँ थी तुम...वो मेरा...

दया :- बीच में बात काटते हुए... हाँ बेटा तू चल में आ कर ढूंडती हूँ... और जेठालाल की तरफ अपनी चिडाने वाली स्माइल देके निकल जाती है...

जेठालाल :- गुस्से में बैठा हुआ...सोचता है... हे भगवान मेरी किस्मत तूने कौन से टाइम पे लिखी थी... कुछ नही मिलता मुझे... कम से कम रिलॅक्स तो होने देते... उसमे भी भंज़ी मार दी आपने....

और फिर अपना मूह लटकाए जेठालाल बाथरूम की ओर चला जाता है....

तारक मेहता का नंगा चश्मा | Tarak Mehta Ka Nanga Chasma | Update 3

तारक और अंजलि का स्पेशल जूस | Tarak Aur Anjali Ka Special Juice

दोस्तो अब चलते हैं तारक मेहता के घर...

हर रोज़ की तरह सुबह सुबह मेहता साहब सोफे पे बैठे कुछ लिख रहे थे...तभी अंजलि आई वही अपना टखा हुआ सा करेले के जूस लेकर..

तारक :- अंजलि को देखते हुए...सुबह हुई नही और आ गई कि ये टखा हुआ सा जूस लेकर...अंजलि तुम्हे इसके अलावा और कुछ नही मिलता..

अंजलि :- तारक ये सेहत के लिए अच्छा होता है....इसी की वजह से तुम इतने स्ट्रॉंग हो ....

तारक :- अच्छा जी तो आपको लगता है कि में इसे पी के स्ट्रॉंग हुआ हूँ...मान ही नही सकता में...

अंजलि :- अच्छा आपको नही पता...इसी की वजह से आप रात को मेरी इतनी अच्छी तरह से मारते हैं...और देर तक भी...आपको पता नही है कि जब आप मारते हैं तो कितना ज़्यादा मज़ा आता है...

तारक :- हंसते हुए हाहहहः....अरे वो इसकी वजह से नही ..मेरे बचपन के सीखने का कमाल है...इसकी वजह से तो मेरा पानी भी हरा हो गया है......

इस बात को सुनकर दोनो खूब हंसते हैं....

फिर तारक हँसी को रोकते हुए ..अंजलि के करीब आ जाता है....

अंजलि :- शरमाते हुए...क्या कर रहे हो तारक...

तारक :- अंजलि तुमने ... अपनी बातों से ... मेरा खड़ा कर दिया है....अब जब तक इसे शांत नही करूँगा तो आर्टिकल नही लिख पाउन्गा...प्लस्सस कुछ करो ना....

अंजलि :- मुस्कुराते हुए..तारक आप भी सुबह सुबह....इतना बोलते ही अंजलि हल्की सी सिसक उठी है....

क्यूँ की तारक ने अंजलि के सलवार के उपर से उसकी चूत को कस के पकड़ लिया होता है....

अंजलि :- तारक छोड़ो ना...सुबह सुबह तो मत करो..में गरम हो जाउन्गी...

तारक :- हाँ तो हो जाओ ना मेरी एटीएम....

इतना बोलते ही तारक अपने होठ अंजलि के रसीले होठों के उपर रख देता है और शुरू होती है एक गहरे चुंबन की शुरुआत...

तारक बड़े प्यार से अंजलि के होठों को चूस्ता रहता है...और अंजलि भी तारक के होंठो को चूस्ति रहती है...थोड़ी देर ऐसे ही चूसने के बाद तारक अपनी जीभ अंजलि के मूह में डाल देता है...और अंजलि बड़े प्यार से उसे अंदर आने देती है...दोनो की जीभ एक दूसरे के रस का स्वाद चखती रहती हैं....ये किस चलता रहता है...इसी दौरान तारक अंजलि की चूत को स्लवार के अंदर हाथ डाल कर पेंटी की उपर से सहलाता रहता है...उसकी पेंटी पूरी तरह गीली हो जाती है...बड़े प्यार से अंजलि की चूत को घिसता रहता है.....इधर अंजलि...तारक की पॅंट के अंदर हाथ डाल के अंडरवेर्र के उपर से लंड को उपर नीचे करती रहती है.....साथ ही साथ एक दूसरे को किस भी करते रहते हैं...दोनो के होँठो के चारो तरफ एक दूसरे का थूक लग जाता है फिर भी वो दोनो छोड़ते ही नही है...ऐसा लगता है जैसे उन्हे दुनिया की परवाह ही नही है...बस आपस में खोए हुए होते हैं.....इतनी देर से चूत पे चल रहे हाथ और लंड पे चल रहे हाथ से बहुत ज़्यादा गर्मी पैदा हो जाती है...दोनो की सासें मूह के अंदर फूलने लगती है ....और दोनो झड़ने के बेहद करीब होते हैं.........और तभी.......

दरवाजे पे दस्तक होती है और दोनो एक दम से अलग हो जाते हैं... दोनो एक दूसरे को देखते हैं और फिर अंजलि दरवाजे के पास जाकर दरवाजा खोलती है...

अंजलि :- अजीब से भाव एं..अरे अब्दुल भाई आप कैसे???

अब्दुल :- अंजलि भाभी आप खुद ही भूल गये..आपने ही तो भाजी के लिए समान मँगवाया था....

तभी अंजलि को याद आता है कि उसने अब्दुल से भाजी मँगवाई थी...

अंजलि :- अरे हाँ अदूल भाई....आपका बहुत बहुत शुक्रिया...

इधर तारक बौखलाया हुआ था क्यूँ कि वो झडा नही था जिसकी वजह से वो काफ़ी परेशान था और उसने अंजलि और अब्दुल की बातों पर ध्यान नही दिया था...

अंजलि गेट बंद करके आती है...और तारक की तरफ़ देख कर वो बोलती है..

अंजलि :- तारक , तारक .... कहाँ खो गये??

तारक :- चौंकते हुए...अंजलि क्या यार सारा मज़ा खराब हो गया..तुम्हे पता है ना मेरी कितनी बुरी हालत हो रही है इस वक़्त...मुझे नही पता तुमने जो अधूरा छोड़ा था वो पूरा करो...मेरा चूस के जल्दी मुझे रिलॅक्स करो...

अंजलि :- तारक आप भी ना...मेरी भी तो यही हालत है...में भी तो नही झड़ी मेरा हाल भी तो आपके जैसा है...और हाँ अब में नही कर सकती..मुझे काम है...

तारक :- गुस्से में..ठीक है करो अपना काम....यहाँ पति की थोड़ी कोई परवाह है...जो करना है वो करो...

और तारक गुस्से में सोफे पे बैठ जाता है...

अंजलि :- अरे गुस्सा क्यूँ हो रहे हैं...मेरे पर आपके लिए एक सर्प्राइज़ है आज..

तारक :- झट से खड़ा होते हुए....क्या सच में तो जल्दी करो ना...

अंजलि :- हंसते हुए अरे वो नही....मेने आज आपके लिए पॉव भाजी बनाई है....

तारक :- अरे थोड़ा खुश होते हुए..अपनी नाराज़गी हटाते हुए...अंजलि तुम भी ना....और हंस पड़ता है....

ये देखकर अंजलि भी हंस देती है ... और फिर तारक अपने आर्टिकल लिखने बैठ जाता है...और अंजलि किचन में चली जाती हाईईईईई.......

To be Continued

Reply
Satish Kumar
Posts: 1092
Admin
Topic starter
Member
Joined: 1 year ago

अंजलि :- अरे गुस्सा क्यूँ हो रहे हैं...मेरे पर आपके लिए एक सर्प्राइज़ है आज..

तारक :- झट से खड़ा होते हुए....क्या सच में तो जल्दी करो ना...

अंजलि :- हंसते हुए अरे वो नही....मेने आज आपके लिए पॉव भाजी बनाई है....

तारक :- अरे थोड़ा खुश होते हुए..अपनी नाराज़गी हटाते हुए...अंजलि तुम भी ना....और हंस पड़ता है....

ये देखकर अंजलि भी हंस देती है ... और फिर तारक अपने आर्टिकल लिखने बैठ जाता है...और अंजलि किचन में चली जाती हाईईईईई.......

तारक मेहता का नंगा चश्मा | Tarak Mehta Ka Nanga Chasma | Update 4

माधवी और भिडे की फच्च-फच्च चूं-चूं | Madhavi aur Bhide Ki Fatch-Fatch Chu-Chu

वैसे आर्थिक रूप से भिडे परिवार की हालत पूरी गोकुलधाम सोसायटी में सबसे कमजोर है, लेकिन जब पति-पत्नी की हेप्पी सेक्स-लाइफ की बात आये, तो उनके जितना सुखी कोई नही, फिर चाहे वो तारक-अंजली, दया-जेठा, रोशन एंड रोशन, हाथी-कोमल या अय्यर-बबिता हो. भिडे मास्टर ज्यादा लकी इसलिए भी है, क्योकि सोसायटी के अन्य मर्दों की तरह उसे ऑफिस, दुकान या गराज में नही जाना पड़ता. और दोपहर के टाइम पे, जब बच्चे स्कुल गए हो तो कोई ट्यूशन क्लासिस भी नही होते, इसलिए हर रोज- दोपहर १२ से शाम ५ तक, वो अपनी बीवी माधवी के साथ, रोमांस ही रोमांस करता है. चूँकि भिडे मास्टर अपनी बीवी की घर के कामो में बड़ी मदद करता है, इसलिए माधवी के दिल और चुत में उसके लिए एक खास जगह है. जितने चुद्दक्कड माधवी और भिडे है, उतने तो गली के आवारा कुत्ते भी नही. ज्यो ही मौका मिला, फट से चुदाई शुरू. लेकिन फिर, पूरा दिन मस्ती करने पर भी मास्टर का दिल नही भरता. रात को जेसे ही सोनू सो जाती है, माधवी-भिडे फिर से चालु हो जाते है. ऐसी ही एक रात का ये किस्सा है..

लोकेशन: मास्टर आत्माराम भिडे का बेडरूम

भिडे मास्टर अपनी मदमस्त वाइफ माधवी की जांघे और बोबे दबा रहा है. माधवी धीरे धीरे सिसकारिया ले भर रही है.

माधवीभाभी: अको बाई, बस अभी बहोत हो गयी बोबा-दबाई, अब ठुकाई का श्रीगणेश करो.

भिडे मास्टर: अरे माधवी ये क्या बेशिस्त बात कर रही हो?? अरे हमारे जमाने में जब हम चुदाई करते तो सबसे पहेले एक-घंटे ऐसे बोबे दबाई करके 'फॉर-प्ले' करते उसके बाद ही...

माधवी भाभी: आहो....अभी मेरे बदन में आग लगी है...चलो चढ़ो ना..जल्दी!!

भिडे मास्टर अपना कुर्ता उपर और पायजामा नीचे करता है, माधवी का गाउन उपर और पेंटी नीचे करता है.

बेडरूम की खिडकी से चांदनी रात प्रकाश, सीधे पलंग पे आ रहा है इसलिए रात के अँधेरे में भी, माधवी की अनुभवी-झांटेदार-रसीली और मादक खुश्बू वाली मराठी भोस साफ़ साफ़ दिख रही है. सोसायटी के बगीचे से आ रही चमेली के फूलो की भीनी भीनी मीठी मीठी खुश्बू और अंदर से माधवीभाभी की चुत की भीनी-भीनी-मीठी-मीठी, मानो पूरा बेडरूम कामरस से भर गया है, ८० साल का चंपक बुढ्ढा भी बिना वियाग्रा खाए टाईट हो जाए ऐसा माहोल है.

भिडे: देवा...शादी के २० साल होने को आये, लेकिन आज भी माधवी तुम्हे देखता हू तो लंड उतना ही फर्राटे से खड़ा हो जाता है, जितना सुहागरात के वक्त हुआ था.

भिडे तुरंत अपना सर माधवी की दो जांघों के बिच डाले के, तबियत से भोस-चटाई शुरू करता है.

माधवी भाभी: अब क्या...अरे मैंने आपको करने के लिए बोला और आप चाटने बेठ गए. अभी पूरा दिन जब मै आचार-पापड बना रही थी, तबभी मेरी साडी में घुसके आप यही कर रहे थे ना..अभी कितना चाटोगे.

भिडे: माधवी, तुम्हारी इस चुत की बात ही ऐसी है. बनानेवाले ने बड़े आराम से बनाई है, चाहे जितना भी इसे चुसू-चाटू मेरा मन ही नही भरता क्या करू??

माधवी भाभी: गप्पा बस..अबी एक सेंकड भी देरी किया न तो अभी के अभी मायके चली जाउंगी.

भिडे: नही नही...ऐसा गजब न करना.

भिडे माधवी की इच्छानुसार मिशनरी पोजिशन में माधवीभाभी पे सवार हो जाता है. माधवीभाभी की कामासक्त चुत पहेले से ही गीली और बेकरार है, भिडे का लंड बिना अवरोध के ठेठ अंदर चला जाता है जेसे मखन में छुरी. साथ ही साथ माधवी के मुंह से एक जबरजस्त फ्रेंच किस करके, अपने होठ, माधवी के होठों के साथ लोक कर देता है.

माधवी भाभी अपनी दोनों जांघे भिडे मास्टर की कमर के उपर भीड़ देती है, जेसे एनेंकोंडा किसी हिरन को दबोचता हो. और अपने दोनों हाथो से माधवीभाभी भिडे मास्टर के कुल्लो को पकड़के भिडे को धक्का देती है, ताकि वो और अंदर तक प्रवेश कर सके. दोनों जेसे जन्नत की सैर कर रहे है, ना ट्यूशन की फ़िक्र न आचार-पापड के ऑर्डर की..बस चुदाई में मग्न है मानो ये जिंदगी की आखरी रात हो.

फच्च-फच्च...कर के भिडे अंदर-बाहर धक्के मार रहा है. माधवी एक के बाद एक ऑर्गेजम में पानी छोड़ रही है, जिससे की धक्को की आवाज ओर बढ़ रही है..

फच्च-फच्च... साथ ही भिडे का 'उनके जमाने' का वो पुराना पलंग, जो की चूं-चूं आवाज कर रहा है.
फच्च-फच्च चूं-चूं
फच्च-फच्च चूं-चूं
फच्च-फच्च चूं-चूं

जेसे कोई erotic ओर्केस्ट्रा बज रहा हो....ऐसी रिधम में चुदाई चालु है.

माधवीभाभी के पुरे बदन में एक मीठा सा दर्द हो रहा है, अंतिम क्षण के वो बेहद करीब है,..

माधवीने अपने दोनों हाथो के नाख़ून, भिडे-मास्टर की पीठ में शेरनी की तरह गडा दिए है. भिडे बिचारा ओरत पे चढा मर्द कम और शेरनी के पंजो में जकडा मेमना ज्यादा लगता है, क्योकि जब सेक्स की बात आती है तो माधवी एक सभ्य-ओरत में से भूखी शेरनी बन जाती है, जिसे रोकना मुश्किल है, जिसकी भूख मिटाए बिना उसके पंजो में से निकलना नामुम्किन है..

माधवीभाभी: हाय देवा....बस थोड़ी देर ओर.

भिडे: माधवी आई लव यु. मै तुम्हारा गुलाम हू, तुम जो बोलोगी वो मैं करूँगा, बिलकुल बंधन के सलमानखान की तरह.
माधवी भाभी: गुलाम आप मेरे तो मै दासी आपके चरणों की. (माधवी सामने से भिडे के होठों पे जबरजस्त फ्रेंच किस करती है)

बस अब दोनों ही चरमसीमा के करीब है. पति तो पुरे हिंदुस्तान के चढते है अपनी बीवियो पर, लेकिन बीवी भी सामने सेक्स में उतना ही इंटरेस्ट ले, ऐसा बहोत कम देखने को मिलता है, भिडे-माधवी भी ऐसे लकी-कपल्स में से एक है.

फच्च-फच्च चूं-चूं
फच्च-फच्च चूं-चूं
फच्च-फच्च चूं-चूं

अचानक .....

माधवीभाभी: हाय दैया.....

बस ये ही वो परम-सुख का क्षण है, अपनी जांघों और हाथो से माधवी एकदम जोर से वो भिडे को जकड लेती है, मानो प्राण ही निचोड़ के ले लेंगी. वो तो मास्टर रोज योग-प्राणायम करते है, इसलिए उनके फेंफडो में इतना दम है, बाकि कोई एरागेरा लौडा हो तो साँस भी न ले पाया, उतनी मजबूत पकड है माधवीभाभी की.

भिडे भी अपनी 'स्कूटर' टॉप-गियर में डालता है, धक्को की स्पीड सुपर फास्ट करता है...और अचानक ही, उसी क्षण स्खलित होता है, जब माधवी झड रही होती है. जेसे सो-मीटर की रेस जित के धावक मैदान पे एक्जोस्ट होके लेट जाता है, मास्टर भी माधवी की छाती पे सर रख के हांफने लगते है, सो जाते है. माधवी उनके सर में ऊँगलीया फेरती है, कंधो को सराहती है, जेसे माँ अपने नवजात शिशु को सुला रही हो, क्योकि वो अब भूखी शेरनी में से वापस एक तृप्त ओरत बन गयी.

और इस तरह एकबार फिर, माधवी और भिडे, खुद भी संतुष्ट होते है, और अपने पार्टनर को भी संतुष्ट करते है. उन्होंने जो किया वो सेक्स नही था, क्योकि 'सेक्स' शब्द का मतलब बड़ा स्थूल है. सेक्स माने लंड का चुत में प्रवेश.

लेकिन जो माधवी और भिडे ने किया, वो सेक्स नही, सम्भोग है: कामशास्त्र में 'सम्भोग' की व्याख्या दी गयी है, सम्भोग माने दोनों साथियो को समान रूप से मिला भोग या आनंद.

इधर माधवी-भिडे के मिलाप समाप्त होता है,

पर गोकुलधाम सोसायटी में दो लोंडे ऐसे भी है, जिनके नसीब में मुठ और केवल मुठ मारना ही लिखा है.
उन दो डेढ़-सयानो में से एक है पत्रकार पोपट लाल, और दूसरे चम्पकलाल.
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

दोस्तो इनके बारे में फिर कभी बताउन्गा तब तक इधर देख लेते हैं क्या खिचड़ी पक रही है...

To be Continued

Reply
Satish Kumar
Posts: 1092
Admin
Topic starter
Member
Joined: 1 year ago

भिडे भी अपनी 'स्कूटर' टॉप-गियर में डालता है, धक्को की स्पीड सुपर फास्ट करता है...और अचानक ही, उसी क्षण स्खलित होता है, जब माधवी झड रही होती है. जेसे सो-मीटर की रेस जित के धावक मैदान पे एक्जोस्ट होके लेट जाता है, मास्टर भी माधवी की छाती पे सर रख के हांफने लगते है, सो जाते है. माधवी उनके सर में ऊँगलीया फेरती है, कंधो को सराहती है, जेसे माँ अपने नवजात शिशु को सुला रही हो, क्योकि वो अब भूखी शेरनी में से वापस एक तृप्त ओरत बन गयी.

और इस तरह एकबार फिर, माधवी और भिडे, खुद भी संतुष्ट होते है, और अपने पार्टनर को भी संतुष्ट करते है. उन्होंने जो किया वो सेक्स नही था, क्योकि 'सेक्स' शब्द का मतलब बड़ा स्थूल है. सेक्स माने लंड का चुत में प्रवेश.

लेकिन जो माधवी और भिडे ने किया, वो सेक्स नही, सम्भोग है: कामशास्त्र में 'सम्भोग' की व्याख्या दी गयी है, सम्भोग माने दोनों साथियो को समान रूप से मिला भोग या आनंद.

इधर माधवी-भिडे के मिलाप समाप्त होता है,

पर गोकुलधाम सोसायटी में दो लोंडे ऐसे भी है, जिनके नसीब में मुठ और केवल मुठ मारना ही लिखा है.
उन दो डेढ़-सयानो में से एक है पत्रकार पोपट लाल, और दूसरे चम्पकलाल.

तारक मेहता का नंगा चश्मा | Tarak Mehta Ka Nanga Chasma | Update 5

गोकुलधाम सोसाइटी की मुठ-बाजी स्पर्धा | Gokuldham Society Ki Muth-Bazee Spardha

भाग 1 / Part 1

नटु-काका: सेठजी आप मेरी पगार कब बढाने वाले हे?

जेठालाल : जब बबिताजी मुझे चुदाई का मौका देंगी!

नटु-काका: इसका मतलब इस जन्म में तो मेरी पगार बढने से रही!!

"रविवार दोपहर की बात हे, जेठालाल और भिडे, अब्दुल की बंध दुकान के बाहर बैठकर डींगे हांक रहे हे.."

मास्टर भिडे: अरे जेठालाल! हमारे जमाने में मै जब मुठ मारता तो आधे घंटे तक जड़ता नही था!

जेठालाल: जा जा फेंकू! अरे जब मै अपने जमाने में मुठ मारता था तो एक घंटे तक नही जड़ता था!

मास्टर भिडे: तो फिर लगी शरत? चलो अभी उपर छत पे जाके मुठ मारे और फेसला हो जाएगा!

जेठालाल: हाँ लेकिन हमे कोई रेफरी भी चाहिए!, एक काम करता हू मै महेता-साहब को बुलाके लाता हू.

मास्टर भिडे: नही वो तो तुम्हारा दोस्त हे..फिर तो मै भी सोढ़ी को बुलाके लाता हू..फिर दो अम्पायर से ही फेसला करवाएंगे!

जेठालाल: लेकिन सोढ़ी तो तुम्हारा भी पक्का दोस्त हे!

मास्टर भिडे: तो फिर चम्पक चाचाजी को ही बुला लेते हे! वो किसी की भी तरफदारी नही करेंगे!

जेठालाल: अरे भाई मरवाओगे क्या? बापूजी के डर से तो मेरी पुप्ली टाईट भी नही होती तो मुठ केसे मारूंगा??

मास्टर भिडे: तो ठीक हे डॉ. हाथी को ले लेते हे?

जेठालाल: नही वो तो छत पर धीरे धीरे चढेंगे तब तक सुबह से शाम हो जाएगी!

मास्टर भिडे: अब्दुल?

जेठालाल: हाँ ठीक हे..अब्दुल,महेता-साहब और सोढ़ी ..ये तीन हमारे अम्पायर रहेंगे.

जेठा और भिडे, तीनों लोगो को फोन करके छत पे बुलाते हे..

सोढ़ी: ओ भिडू! हमको उपर क्यों बुलाया?

भिडे: देखो ना सोढ़ी ये जेठालाल शेखी मार रहा हे की वो मुठ मारके एक घंटे तक नही जड़ता! तो फिर हमने शर्त रखी हे और तुमको रेफरी की भूमिका अदा करनी हे.

सोढ़ी: ओय तुम दोनों इधर मुठ मारके मजा करो और मै देखू? ओ बेवकूफ समजा हे क्या? ओ में भी इस स्पर्धा में शामिल होना चाहता हू!

(बेकग्राउण्ड म्यूजिक...ओ पापाजी..ओ पापाजी..)

"अब ये लोग मिलकर ये तय करते हे की तीनों (जेठा,भिडे और सोढ़ी) एकसाथ मुठ मारेंगे और महेता अपने मोबाईल की स्टॉप-वोच के जरिये देखेंगे की कोन सबसे अंत में जडता हे? और जो सबसे अंत में झड़ेगा, उसको बाकि के दोनों हारे हुए स्पर्धक एक महीने तक मुफ्त में सोडा पिलाएँगे!

किन्ही कारणों से अब्दुल अभी तक नही आया, इसलिए, उसके बगेर ही मुठ-बाजी स्पर्धा चालु हुयी!"

महेता: रेडी!!??? वन...टू..थ्री...एंड स्टार्ट!!

तीनों स्पर्धक बड़ी कुशलता से मुठ मार रहे हे, और

सोढ़ी (मुठ मारते हुए): बल्ले..बल्ले..वाहू..

कुछ ३-४ मिनट पश्च्यात:

सोढ़ी: आह मै तो झड़ने की कगार पे हू...अरे हाय रब्बा मै तो गया....
(सोढ़ी की पिचकारी छूट जाती हे!)

महेता: सोढ़ी तुम आउट हो गए!

सोढ़ी: ओ यार मेरा तो बेडलक ही खराब हे.

"अब केवल भिडे व् जेठा के बिच में स्पर्धा... कुछ १०-१२ मिनट के बाद:"

भिडे: आईई....आह मेरा लौडा इतना बे-शिस्त क्यों हो गया..में भी जड़ने वाला हू..अरे में तो गया...
(भिडे की बंदूक भी फायर कर जाती हे!)

महेता: भिडे तुम भी आउट हो गए! इसका मतलब जेठालाल विजेता हे!

भिडे: एक मिनट महेता साहब! जेठालाल ने कहा था की वो एक घंटे तक नही झड़ता इसलिए, अभी पिक्चर बाकी हे...उसे विजेता घोषित होने के लिए, एक घंटे तक बिना झडे मुठ मारनी होगी!

जेठालाल (मुठ मारते हुए): अरे एक घंटा तो क्या मै एक दिन तक ऐसे ही मुठ मार सकता हू!

कुछ ३० मिनट बाद:

जेठा का ६१-६२ अभी भी चालु ही हे, क्योकि वो मन ही मन सुन्दरलाल के बारे में सोच रहा हे इसलिए वह मानसिक रूप से सेक्स के लिए जरा भी उत्सुक नही हे, अत: झड़ने का तो सवाल ही पैदा नही होता! अब उसने आँखे भी बंध कर ली हे ताकि बिना रुकावट के अपना काम चालु रख सके.

भिडे को एहसास हो जाता हे, की जेठालाल का विजेता होना अब निश्चित हे! अत: वो एक खुराफाती तरकीब लगाता हे.. दौडकर निचे जाता हे और गोकुलधाम सोसायटी के सभी सदस्यों को बुला चुप चाप छत पे लाता हे! सब के होश उड़ जाते हे की जेठालाल आधी पेंट नीचे उतारे हुए, आखें बंध किये मुठ मार रहा हे!

दया से बिलकुल रहा नही जाता और ...

दया: हे माँ...माताजी! टप्पू के पापा ये आप क्या कर रहे हे??

जेठालाल (भोचक्का रहे जाता हे): अरे दया तुम?

दया: आप ये कर रहे हे यंहा पे? अरे अमदावाद में मेरी माँ को पता चलेगा तो वो क्या सोचेगी? की उनके जमाई-राजा रात को बेडरूम में बीवी चुदाई के बदले दिन-दहाड़े छत पे मुठ मारते हे?

जेठालाल : अरे ये तो वो भिडे...

चम्पकलाल: शूऊऊ....चुप कर जेठिया बबुचक! तुने तो आज मुझे शर्म से पानी पानी कर दिया. एक बच्चे का बाप हुआ तो भी अक्ल नही आई तुजमे! अब में भचाऊ में सब लोगो को क्या मुंह दिखाऊंगा?

जेठालाल : अरे ये तो वो भिडे... अरे महेता साहब आप कुछ बोलते क्यों नही??

महेता साहब: अब क्या बोलू जेठालाल ??

अंजली: तारक आप यहा क्या कर रहे थे?

महेता साहब(मन में सोचते हे): अगर इनलोगों को पता चल गया की मै यहा मुठबाजी स्पर्धा में निर्णायक बना था तो मेरी भी फजीहत हो जाएगी, इसलिए कोई बहाना बनाता हू..

महेता साहब (अंजली से): ये सब तुम्हारी गलती हे अंजली! एक तो तुम ठीक से कुछ खाना बनाके खिलाती नही मुझे! तो में बोर हो रहा था, तो छत पे घूमने आया था! और देखा की जेठालाल यंहां ये गंदी हरकत कर रहे हे तो में बस यहा उसको रोकने ही वाला था की आप लोग आ गए.!!

जेठालाल: ये क्या.... दोस्त दोस्त ना रहा..

रोशन (बीवी): ऐ रोशन टू इधर क्या करता हे बावा?

रोशनसिंह (वो भी जूठ बोलता हे): ओ मेरी सोणिये! ओ मै तो इधर बस फोन का सिग्नल नही आ रहा था इसलिए आया था..

रोशन (बीवी): टू घरे आवनि ...में टेरे को सबक सिखाती हू! टू पक्का इधर पार्टी-शार्टी का पोग्राम बनाने आया होगा!

बबिताजी: जेठाजी ये.... इट इज सो डिस्गस्टिंग! आई कैंट बिलीव यु वेर डूइंग धिस डर्टी थिंग हियर!

जेठालाल ( वैसे अंग्रेजी समज नही आती हे): अरे नही बबिताजी आप मुझे गलत समज रहे हे.. वो तो में ये भिडे ने ......

अय्यर: रहेने दो बबिता..ये जेठालाल में तो कुछ मैनर्स हे ही नही..चलो हम घर चलते हे.

जेठालाल: अरे अय्यर भाई मुझे बोलने का मोका तो दीजिए... ये भिडे ने मेरे साथ शर्त लगाई थी की कोन देर से झड़ता हे और ...ये खुद अभी यहाँ मुठ मार रहा था..देखो उसकी वीर्य की पिचकारी वो वंहा पड़ी..

जेठालाल छत की फर्श की और ऊँगली करता हे लेकिन दोपहर की गर्मी में भिडे का गिरा हुआ वीर्य तो कब का सुख चूका था वहा कोई नामोनिशान नही था!

भिडे: जेठालाल तुम गलती करते हुए पकड़े गए, अब बहाने बना रहे हो. अरे भाई तुम यहा पे एसी गंदी हरकते करते हो, कंही बच्चो ने देख लिया तो उनपर क्या असर पडेगा? अपनी उम्र का लिहाज करो और कुछ शिस्त से वर्तन करो, वरना सोसायटी के एकमेव सेक्रेटरी की हेसियत से मुझे तुम्हे दंडित करना होगा!

पोपटलाल: अरे मे तो कहता हु इस जेठालाल का यहाँ रहना कैन्सल कर देना चाहिए....

अय्यर: तुम ठीक कह रहे हो पोपटलाल....

जेठालाल (अय्यर ओर पोपटलालकी ओर गुस्से से देखते हुए मन मे): चापलिचंपा....

भिड़े (मनमे): अरे देवा, येतो सच मे जेठालाल को सोसाइटी से निकाल देंगे....

भिड़े (मेहता साहब के कानमे): मेहता साहब कुछ कीजिये नही तर ये लोग जेठालाल को सोसाइटी से निकाल देंगे....

मेहता साहब(भिड़ेसे): रुको में कुछ करता हु....

मेहता साहब(बाजी सँभालते हुए): नहीं पोपटलाल, तुम्हारी ये बात उचित नहीं हे इसमें गलती जेठालालकी हे उसकी सजा उसके पुरे परिवार को तो नहीं दे सकते.. नहीं नहीं ये बिलकुल गलत हे....

अय्यर: में क्या कहता हु मेहता साहब इस जेठालाल की मुछ मुंडवा दो....

To be Continued

Reply
Page 1 / 15

Join Free ! Unlock Premium Feature

Recent Posts