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भाभियों का रहस्य | Bhabhiyon Ka Rahasya

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Dr. Chutiya
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भाभियों का रहस्य | Bhabhiyon Ka Rahasya

Bhabhiyon Ka Rahasya

भाभियों का रहस्य | Bhabhiyon Ka Rahasya

मोबाइल के रिंगटोन से मेरी नींद खुली और स्क्रीन देखते ही चहरे में मुस्कान खिल गयी

“का रे बुधारू कैसे हो ? इतना सुबह कहे फोन किये ”

“ठीक है भैया …अम्मा ने कहा की बात करेंगी लो बात करो ”

अम्मा का नाम सुनते ही मैं बिस्तर से उठ बैठा ..

मेरी अम्मा मतलब श्रीमती कांति देवी जी , रिश्ते में मेरी बुआ लगती है, सभी लोग उन्हें अम्मा ही कहते है कुछ बुजुर्ग ठकुराइन भी कहा करते है , अब पुरे गांव की उनसे फटती है तो मैं किस खेत का मुली था , उनके ही बदौलत शहर में पढाई कर रहा था , मेरे माता पिता तो बचपन में ही स्वर्ग सिधार गए थे ..

“प्रणाम अम्मा “

“खुश रहो .. अभी तक सो के नहीं उठे हो ??”

मेरी और फटी

“नहीं उठ गया था बस …”

“चलो ज्यादा झूठ बोलने की जरुरत नहीं है सब समझती हु मैं , एक काम करो शहर में सुवालाल जी की दूकान देखि है ना “

“जी अम्मा ..”

“वंहा से कुछ रूपये लाने है , आज ही चले जाओ और शाम तक गांव आ जाओ ..”

“जी ..”

फोन कट हुआ तो मेरे माथे पर पसीना था , पता नहीं क्यों लेकिन अम्मा से मैं बहुत डरता था , ऐसा नहीं था की वो मुझे डांटती थी या और कुछ लेकिन बस उनका व्यक्तित्व ही ऐसा था की सामने वाला उनके सामने खुद को छोटा ही समझता है ..

ऐसे अम्मा मेरे पिता जी से 10 साल छोटी थी , अभी भी उनकी उम्र कोई 35 साल की ही रही होती जबकि मैं अभी २१ साल का हो चूका था , दुधिया गोरा रंग माथे में गढ़ा सिंदूर और मस्तक में लाल रंग का गुलाल , हाथो में रंग बिरंगी चुडिया जो की अधिकतर सोने के कड़े और लाला रंग की चुडिया होते थे , महँगी जरीदार साड़ी पहने हुए वो अपने नाम से बिलकुल मैच खाती थी ..

नाम के अनुरूप ही एक कांति उनकी आभा में हमेशा ही विद्यमान रहती , रोबदार चहरे में कभी सिकन दिखाई नहीं देती जबकि उनका व्यक्तिगत जीवन कठिनाइयों से भरा हुआ था , पति रोग से पीड़ित और अधिकतर बिस्तर में रहते , राजनितिक आपदा हमेशा सर में नचाती रहती , उनकी ही हवेली में उनके खिलाफ षडियंत्र करने वालो की कमी नहीं थी और ये बात उन्हें अच्छे से पता भी थी , मायके था नहीं ससुराल वालो जान के दुशमन थे , एक भाई जो उन्हें अपने आँखों में बिठाकर रखता वो जा चूका था और उनकी एक निशानी मेरे रूप में उनकी जिम्मेदारी बन चुकी थी , कोई ओलाद नहीं , अपना कहने को बस मैं था वो भी उनसे दूर ही रहा ….

पति के बीमार होने के बाद से ही बिजनेस और राजनीती की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधे में आ गयी थी जिसका निर्वहन उन्होंने बहुत ही अच्छी तरह से किया था , कोई नहीं कह सकता था की वो अंगूठा छाप है , एक दो भरोसे के लोग उनके पास थे जिनके भरोसे ही उन्होंने ये सब सम्हाल रखा था , वो लोग मुझे कहते की ये सब कुछ आगे चलकर तुम्हे ही सम्हालना है , लेकिन मैं खुद को देखता मैं तो अम्मा की आभा के सामने खड़े होने की भी हैसियत नहीं रखता था आखिर मैं कैसे उनका उतराधिकारी बन सकता था ??

खैर जो भी हो अम्मा ने काम बताया था तो जल्दी से जल्दी करना ही था …

सुवालाल जी गहनों के बड़े व्यापारी थी और हमारे परिवार के मित्र भी , उनके पास जाते ही बड़े ही आत्मीयता से मेरा स्वागत किया गया ..

“कैसे है कुवर निशांत जी ..”

मैं सुवालाल जी के साथ बैठा ही था की एक लड़की की आवाज आई , मैंने मुस्कुराते हुए उस ओर देखा

“काहे का कुवर यार तू भी टांग खिंच रही है “

वो मेरी कालेज की दोस्त और सुवालाल जी की बेटी अनामिका थी जिसे हम अन्नू कहा करते थे

अन्नू मेरे पास आकर बैठ गयी ,

“अरे कुवर साहब अम्मा का जो भी है वो आपका ही तो है , फिर आप कुवर ही हुए ना “

सुवालाल जी बोल पड़े

“क्या अंकल आप भी ना, ऐसे भी मुझे ये सब समझ नहीं आता “

“कोई नहीं आज गांव जा रहे हो फिर कब वापस आओगे “ इस बार अन्नू ने कहा था

“नहीं पता यार ऐसे भी पढाई तो ख़त्म हो ही चुकी है , तुम भी चलो मेरे साथ गांव घुमा कर लाता हु “

मेरी बात सुनकर अन्नू ने एक बार अपने पिता की ओर देखा

“अरे हां जाओ भई ये भी कोई पूछने की बात है क्या , मैं अम्मा से बात कर लूँगा “

पिता की बात सुनकर अन्नू ख़ुशी से उछल पड़ी ..

दो बॉडीगार्ड और एक ड्राईवर के साथ हम गांव की ओर निकल पड़े थे

आते ही अन्नू अम्मा के गले से लग गई , मेरे विपरीत ही अन्नू अम्मा से बिलकुल भी नहीं डरती बल्कि उनसे मिलने के लिए भी उतावली रहती , उन्हें देखकर ऐसा लगता जैसे ये दोनों माँ बेटी हो , अम्मा का व्यवहार भी अन्नू के लिए स्नेह पूर्ण रहा था , अम्मा ने पहले अन्नू के गाल खींचे ,

“कितने दिनों के बाद याद आई मेरी “

“क्या करू अम्मा ये आपका बेटा तो मुझे यंहा लाता ही नहीं “

“ओह तो गांव कितना दूर है जो तुझे इसकी जरुरत पड़ती है , और तूम इतने पैसो के साथ आ रहे हो और इसे भी साथ ले आये , अगर कुछ हो जाता तो “

अम्मा का गुस्सा मुझ पर फूटा , मैं कुछ बोल पाता उससे पहले ही अन्नू ने अम्मा को माना लिया ..

* * * * *

सफ़र के थकान मिटाने हम दोनों अपने कमरे में जाकर सो गए थे …

जब उठा तो शाम होने को थी की मैं अन्नू को लेकर बगीचे की तरफ चल दिया ,

“यार अम्मा इतनी प्यारी है तुम उनसे इतना डरते क्यों हो “

हम आम के बगीचे में टहल रहे थे , अन्नू के सवाल पर मैंने एक गहरी साँस ली

“मुझे नहीं पता की आखिर मैं उनसे क्यों डरता हु , उन्होंने मेरी परवरिस में कभी कोई कमी नहीं रखी , माँ पापा के जाने के बाद भी मुझे कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया , शायद यही कारन है की मैं उनकी बहुत इज्जत करता हु , जो की सबको डर के रूप में दीखता है “

अन्नू ने बड़े ही प्यार से मेरे गालो को सहलाया

“वो तुमसे बहुत प्यार करती है , मैंने उनकी आँखों में महसूस किया है , आखिर तुम ही तो उनका एक मात्र सहारा हो , अपना कहने को तूम्हारे सिवा उनका है ही कौन “

हम चलते चलते नदी के किनारे पहुच गए थे , ये पहली बार नहीं था जब मैं और अन्नू एक साथ यु घूम रहे थे, जब भी अन्नू और मैं गांव आते तो यही हमारा ठिकाना होता था , नदी की रेत में बैठे हुए हमने पैर पानी में डाल दिए , अन्नू का सर मेरे कंधे पर था ..

बड़ा सकुन का पल था , इधर सूर्य देव अस्त होने वाले थे , उनकी लालिमा आकाश में फ़ैल रही थी , पानी का कलरव और चिडियों की चहचहाहट , साथ में अन्नू का नर्म हाथ मेरे हाथो में था , मैं इसी पल में खुद को समेट लेना चाहता था ..

शांति के इस माहोल में किसी के गाने की आवाज ने हमारा ध्यान भंग किया ..

“बहुत प्यारी आवाज है आखिर है कौन ??’

अन्नू भी उस ओर देख रही थी जन्हा से आवाज आ रही थी

“चलो देखते है “

हम दोनों ही उस ओर निकल पड़े , थोड़ी दूर चलने पर आवाज स्पष्ट हो गई थी लगा दो तीन महिलाये एक साथ गाना गा रही है , झाड़ियो से निकलते हुए जब हम थोड़े करीब पहुचे तो वो दृश्य देखकर हम दोनों ही जम गए ..

सामने का नजारा था ही कुछ ऐसा ,

5 ओरते पूरी तरह से नग्न होकर आग के चारो ओर घेरा बनाकर नाच रही थी , सभी के बाल बिखरे हुए थे , मस्तक पर में बड़ा सा काले रंग का तिलक लगाये हुए ये महिलाये जैसे किसी और ही दुनिया में पहुच गई थी , सभी अपने में ही मग्न थी , सभी के कपडे पास ही पड़े थे साथ ही उनके घड़े भी रखे हुए थे , उनमे से एक को मैं पहचान गया था , वो बुधारू की बीबी रमा भाभी थी , बाकि की औरते भी मेरे ही गांव की लग रही थी , आखिर ये कर क्या रही है ..??

सभी जैसे किसी नशे में डूबी हुई थी , फिर उन्होंने अपने पास रखे मटके को उठा लिया और उसमे से पूरा पानी अपने उपर डाल लिया , हम दोनों आँखे फाड़े हुए उन्हें देख रहे थे , तभी …

“अरे वो देखो , पकड़ो उन्हें “ उनमे से एक औरत चिल्लाई , और सभी मानो सपने से जागी हो ,

सभी की नजरे हमारी ओर थी , उनको देख कर हम बुरी तरह से डर गए और तेजी से वंहा से भागे …

अन्नू की भी हालत कुछ ठीक नहीं थी और हवेली अभी भी दूर थी ..

पीछे से कोई आवाज नहीं आ रही थी लेकिन हम पूरी ताकत से भागे जा रहे थे …….

अचानक ही अन्नू ने मेरा हाथ खिंच लिया और चुप रहने का इशारा किया , उसने इशारे से मुझे सामने दिखाया हम तुरंत ही छिप गए , सामने कुछ महिलाये हाथो में डंडा लिए खड़ी दिखी , मैं उनमे से कुछ को पहचानता था वो हमारे ही हवेली में काम करती थी ,हम धीरे से दुसरे रास्ते से भागने लगे , और तब तक भागे जब तक की हवेली ना दिख गई …..

To be Continued

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5 ओरते पूरी तरह से नग्न होकर आग के चारो ओर घेरा बनाकर नाच रही थी , सभी के बाल बिखरे हुए थे , मस्तक पर में बड़ा सा काले रंग का तिलक लगाये हुए ये महिलाये जैसे किसी और ही दुनिया में पहुच गई थी , सभी अपने में ही मग्न थी , सभी के कपडे पास ही पड़े थे साथ ही उनके घड़े भी रखे हुए थे , उनमे से एक को मैं पहचान गया था , वो बुधारू की बीबी रमा भाभी थी , बाकि की औरते भी मेरे ही गांव की लग रही थी , आखिर ये कर क्या रही है ..??

सभी जैसे किसी नशे में डूबी हुई थी , फिर उन्होंने अपने पास रखे मटके को उठा लिया और उसमे से पूरा पानी अपने उपर डाल लिया , हम दोनों आँखे फाड़े हुए उन्हें देख रहे थे , तभी …

“अरे वो देखो , पकड़ो उन्हें “ उनमे से एक औरत चिल्लाई , और सभी मानो सपने से जागी हो ,

सभी की नजरे हमारी ओर थी , उनको देख कर हम बुरी तरह से डर गए और तेजी से वंहा से भागे …

अन्नू की भी हालत कुछ ठीक नहीं थी और हवेली अभी भी दूर थी ..

पीछे से कोई आवाज नहीं आ रही थी लेकिन हम पूरी ताकत से भागे जा रहे थे …….

अचानक ही अन्नू ने मेरा हाथ खिंच लिया और चुप रहने का इशारा किया , उसने इशारे से मुझे सामने दिखाया हम तुरंत ही छिप गए , सामने कुछ महिलाये हाथो में डंडा लिए खड़ी दिखी , मैं उनमे से कुछ को पहचानता था वो हमारे ही हवेली में काम करती थी ,हम धीरे से दुसरे रास्ते से भागने लगे , और तब तक भागे जब तक की हवेली ना दिख गई …..

भाभियों का रहस्य | Bhabhiyon Ka Rahasya | Update 2

हमारी सांसे फुल चुकी थी , हमने जो देखा था वो क्या था इसका हमें जरा भी इल्म नहीं था , हमने पीछे मुड कर देखने की बिलकुल भी जहमत नहीं उठाई हम सीधे भागते ही चले गए और सीधे हवेली में जाकर रुके , हवेली में भी हम सीधे मेरे कमरे में घुस गए …

थोड़ी देर तक हममे से किसी ने कुछ भी नहीं कहा

जब थोड़ी सांसे सामान्य हुई तो मैंने अपने कमरे की खिड़की से बाहर की ओर देखा

“अन्नू यंहा देखो “

अन्नू मेरे साथ बाहर देखने लगी , निचे कुछ महिलाये अम्मा के साथ खड़ी थी , वो चिंतित लग रही थी साथ ही अम्मा भी , मैंने ध्यान से देखा तो ..

“ये तो वही है जो नदी में थी “

अन्नू ने भी हां में सर हिलाया तभी अम्मा समेत सभी का सर उठा और सभी मेरे कमरे की ओर ही देखने लगे , हम दोनों ने ही झट से अपना सर अन्दर खिंच लिया

“यार ये हो क्या रहा है …ओरते नंगी होकर नाच रही है वो भी अजीब तरीके से , और कुछ उनकी पहरेदारी कर रही है , वही ये सभी अब अम्मा के पास भी आ गई , अम्मा भी चिंतित लग रही है “

मैं तेज कदमो से अपने कमरे में चहलकदमी करने लगा ..

थोड़ी ही देर हुई थी की हमारे कमरे में दस्तक हुई , अन्नू ने दरवाजा खोला ये कामिनी भाभी थी , हमारे हवेली में ही काम करने वाले बाबूलाल की बीवी , कोई 25 साल की कामिनी देखने में बहुत ही आकर्षक और तीखे नयन नक्स वाली थी , हल्का गदराया सांवला जिस्म और चंचल आँखे उसे और भी आकर्षक बनाते , वो अकसर ही मुझसे मजाक किया करती कभी कभी गालो को खिंच देती तो कभी मेरे कुलहो पर चपत मार देती , उनकी बातो में भी एक मादकता हमेशा ही रहती ,आज भी वो उसी अजीब सी मुस्कान के साथ हमारे सामने खड़ी थी …

“आपको अम्मा ने बुलाया है “

उसने अन्नू की ओर्र देखते हुए कहा ..

“म म मुझे …” उनकी बात को सुनकर अन्नू थोड़ी हडबडाई …

“जी आपको … चलिए “

अन्नू उसके साथ जाने को हुई

“मैं भी चलता हु ..”

मैंने भी तुरंत कहा

“अरे कुवर जी आप कहा चले , अम्मा ने अन्नू को बुलाया है वो भी अकेले में .. आपकी सेवा करने हम है ना , कहो तो रुक जाती हु “

कामिनी भाभी की बात सुनकर मैंने थोडा सकपकाया

“नहीं मैं ठीक हु .., अन्नू तुम जाओ मैं इन्त्त्जार कर रहा हु “

मेरी हालत देख कर कामिनी मुस्कुराई और अन्नू उनके साथ चली गई …

मैं बेचैन सा अपने कमरे में ही बैठा रहा कोई आधे घंटे के बाद अन्नू वापस आई , उसका चहरा पीला पड़ा हुआ था …

“क्या हुआ क्या कहा अम्मा ने ..”

अन्नू ने एक बार मुझे देखा लेकिन वो कुछ बोली नहीं बल्कि सीधे जाकर बिस्तर में बैठ गयी

“अरे बताओगी भी की आखिर क्या कहा अम्मा ने …?”

मैं भी उसके बाजु में जाकर बैठ गया , उसने एक बार मुझे देखा

“कैसे बताऊ कुछ समझ नहीं आ रहा है ….”

वो अपना सर पकड़ कर बैठ गयी

“तुम बताओ तो सही …जो भी हो मैं तुम्हारे साथ हु “

मैंने उसका हाथ अपने हाथो में ले लिया , उसने फिर से मुझे देखा उसकी आँखे गीली थी ,डबडबाई हुई आँखों से कुछ सेकण्ड के लिए वो मुझे देखने लगी

“निशांत तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो “

वो मेरे गले से लग गई , मैं भी उसकी पीठ सहलाने लगा

“हा ये कोई बोलने की बात है क्या ??”

इस बार उसके चहरे में एक मुस्कान आई

“नहीं ये कोई बोलने की बात नहीं है लेकिन अब ये मुझे बोलना होगा क्योकि अब हमें हमारी दोस्ती से उपर एक काम करना होगा …”

वो फिर से चुप हो गई ..

उसकी रहस्य मयी बात सुनकर मैं सोच में पड़ गया की आखिर ऐसी कौन सी बात हो गई ,

मैंने उसके हाथो को अपने दोनों हाथो से थाम लिया और उसकी आँखों में देखने लगा

“जो भी हो मैं तुम्हारे लिए सब कुछ करने को तैयार हु , तुम फिक्र मत करो .. मैं तुम्हारे उपर कोई भी मुसीबत नहीं आने दूंगा , चाहे तो अम्मा से भी लड़ जाऊंगा “

मेरी बात सुनकर उसके होठो में हल्की सी मुस्कान आई और आँखों में हल्का आंसू

“ये तुम्हे मेरे लिए नहीं निशांत इस गांव के लिए करना होगा “

अन्नू ने मेरे गाल को सहलाते हुए कहा

“साफ साफ बताओ की आखिर बात क्या है ??”

वो कुछ देर के लिए चुप रही फिर एक गहरी साँस ली

“हम दोनों को सम्भोग करना होगा निशांत “

अन्नू ने एक ही साँस में ये कहा

“क्या ???” मैंने जो सुना मुझे उसपर विश्वास भी नहीं हो रहा था ,शायद मैंने कुछ गलत सुन लिया था

“क्या कहा तुमने ??”

“वही जो तुमने सुना , हमें सम्भोग करना होगा , सम्भोग का मतलब तो तुम समझते ही होगे “

अन्नू की नजरे नीचे थी , हम दोनों बचपन के दोस्त थे , साथ खेले थे सुख दुःख में एक साथ खड़े हुए , मेरे मन में उसे लेकर कभी ऐसी भावना नहीं आई थी , वो मेरी बहन तो नहीं थी लेकिन उससे कम भी ना थी ..
वो हमेशा से ही मेरी हमसाथी रही थी …

मैं अब जवान था वो भी जवान थी , जवानी की दहलीज पर आकर मन में कुछ तरंगो का उठाना लाजमी था, मेरे मन में भी ऐसी तरंगे उठती , कुछ लडकिया भी थी जिन्हें मैं पसंद करने लगा था , लेकिन उसके साथ … ये सोच कर ही मेरा दिल जोरो से धडकने लगा था ..

“तुम ये क्या बकवास कर रही हो ..??”

मेरा स्वर लड़खड़ाने लगा था , हडबडाहट और बेचैनी ने मेरे मन को घेर लिया था

“सच कह रही हु , सबसे पहले मेरे साथ और फिर …”

वो फिर से रुक गई ..

“और फिर क्या अन्नू “

अन्नू की नजरे अभी भी जमीन को घूरे जा रही थी ..

उसने फिर से एक गहरी साँस ली जैसे वो किसी चीज के लिए हिम्मत जुटा रही हो ..

“मेरी बात ध्यान से सुनो निशांत , तुम अब एक सामान्य लड़के नहीं हो , तुम इस गांव के भविष्य हो , इस गांव को एक श्राप लगा है जिसके कारण कई सालो से यंहा किसी की कोई ओलाद नहीं हुई , जो बेटिया इस गांव से बाहर ब्याही गई बस उन्हें ही संतान का सुख मिला , यंहा आने वाली बहुओ को ना संतान का सुख मिल पाया ना ही ओरत होने का जिस्मानी सुख जो उन्हें उनके पति से सम्भोग से मिलना था …

यंहा जो भी बच्चा या जवान तुम्हे दिखाई पड़ते है सभी बाहर के रहने वाले है या फिर यहाँ की बेटियों की संताने है जिनका ब्याह बाहर हुआ है , और ये बात सभी को पता है , इस श्राप से मुक्ति के लिए यंहा की सभी ओरते जो यंहा की बहुए है वो सभी मिलकर एक साधना करते है , जिसे हमने देखा था वो भी इसका ही एक अंश था ,साधना की शर्त ये थी की वो पूरी तरह से गुप्त होनी थी और कुछ सालो में श्राप का असर ख़त्म हो जाना था , लेकिन हम लोगो की गलती के कारण वो साधना भंग हो गई , लेकिन इस साधना को भंग करने वाले की भी एक सजा मुक़र्रर की गई थी और शायद ये उस श्राप का एक तोड़ भी है , तुम्हे ही अब यंहा की सभी ओरतो को माँ बनाना होगा , अब ये तुम्हारी जिम्मेदारी होगी और इसकी शुरुवात तुम्हे मेरे साथ करनी होगी क्योकि साधना को भंग करने वालो में मैं भी शामिल थी “

अन्नू की बात सुनकर मेरे तोते उड़ गए , आखिर यंहा ये कैसा चुतियापा चल रहा था , किसी लड़की के जिस्म से खेलने का मन तो मेरा भी था लेकिन इस तरह नहीं ,

“ये लोग पागल हो गए है कैसा अंधविस्वास है ये , मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगा ..”

मैं गुस्से से तलमला गया था

“करना तो तुम्हे पड़ेगा कुवर ,प्यार से नहीं तो जबरदस्ती से , आखिर ये हमारे भविष्य का सवाल है “

अचानक पीछे से एक आवाज आई , जब मैंने मुड़कर देखा तो गांव की कई ओरते हमारे दरवाजे के बाहर खड़ी हुई थी , उनमे से कुछ तेजी से मेरी ओर बढ़ी मैं कुछ समझ पाता उससे पहले ही मेरे सर में एक जोरदार चोट लगी …

“ये सब क्या है … आह ..”

चोट की वजह से मेरी आँखे धीरे धीरे बंद होने लगी थी …

To be Continued

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अन्नू की बात सुनकर मेरे तोते उड़ गए , आखिर यंहा ये कैसा चुतियापा चल रहा था , किसी लड़की के जिस्म से खेलने का मन तो मेरा भी था लेकिन इस तरह नहीं ,

“ये लोग पागल हो गए है कैसा अंधविस्वास है ये , मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगा ..”

मैं गुस्से से तलमला गया था

“करना तो तुम्हे पड़ेगा कुवर ,प्यार से नहीं तो जबरदस्ती से , आखिर ये हमारे भविष्य का सवाल है “

अचानक पीछे से एक आवाज आई , जब मैंने मुड़कर देखा तो गांव की कई ओरते हमारे दरवाजे के बाहर खड़ी हुई थी , उनमे से कुछ तेजी से मेरी ओर बढ़ी मैं कुछ समझ पाता उससे पहले ही मेरे सर में एक जोरदार चोट लगी …

“ये सब क्या है … आह ..”

चोट की वजह से मेरी आँखे धीरे धीरे बंद होने लगी थी …

भाभियों का रहस्य | Bhabhiyon Ka Rahasya | Update 3

आँखे खुली तो मैंने खुद को अपने ही बिस्तर में सोया हुआ पाया , पुरे शरीर में दर्द भरा हुआ था , भोर के सूर्य की किरने खिड़की से छानकर सीधे मेरे चहरे पर पड़ रही थी , मैं हडबडा कर उठा कल मेरे साथ जो हुआ था वो मुझे एक स्वप्न की तरह लग रहा था …

मैंने अपने सर को छुवा जहा कल जोरदार वार किया गया था लेकिन वंहा कोई भी दर्द नहीं था ..

मैंने उठ कर बैठ गया और और अपने ही ख्यालो में खोया हुआ कमरे से बाहर आया , निचे सब कुछ सामान्य चल रहा था , बड़े से सोफे में जो की सिहासन नुमा था ,अम्मा आराम से बैठे हुए नौकरों को हिदायत दे रही थी एक बार उनकी नजर मुझपर पड़ी ..

“आज बड़ी जल्दी उठ गए कुवर जी , कल से सो ही रहे हो ,खाने के लिए भी नहीं उठे , शहर में भी ऐसा ही करते हो क्या ??”

उनकी बातो से मेरा सर घुमा ,मैं जो सीढियों से निचे की ओर उतर रहा था तुरंत फिर से उपर चला गया और सीधे अन्नू के कमरे में पंहुचा जो की मेरे कमरे के बाजु में ही था ..

थोड़े देर दरवाजा खटखटाने पर उसने दरवाजा खोला और खोलकर सीधे बिस्तर में जा गिरी ..

“अन्नू अन्नू उठ न यार ..”

मैंने उसे झकझोरते हुए कहा

“सोने दे ना यार तू तो पूरी नींद ले लिया और मुझे इतने जल्दी उठा रहा है … जब से आया तब से तो सो ही रहा था , अब मुझे सोने दे , अम्मा के साथ बात करते रात हो गयी थी ..”

वो इतने बेफिक्री से ये बात कह गई की मुझे खुद पर अचरज होने लगा …

“कल जो हुआ उसके बाद भी तुम इतनी बेफिक्र कैसे हो सकती हो ??”

उसने एक बार मुझे मुड़कर देखा

“कल क्या हुआ ??? ओह अम्मा ने तुम्हे डाटा था की तुम इतने पैसे के साथ आ रहे हो और मुझे भी ले आये .. अब अम्मा डांटती ही रहती है इतना टेंशन क्यों लेना “

मैं सोच में पढ़ गया था , क्या जो भी कल मैंने देखा वो सिर्फ एक सपना था ???

मैं वही बिस्तर में बैठ गया , और अन्नू भी बाजु मुह करके सो गई

“मतलब कल हम नदी के किनारे घुमने नहीं गए थे “ मैंने कुछ सोचते हुए उससे कहा

वो आँखे खोलकर मुझे गुस्से से देखने लगी

“तू जा ना यार क्यों सुबह सुबह दिमाग ख़राब कर रहा है “

मैंने उससे और कुछ भी पूछना सही नहीं समझा और अपने कमरे में चले आया ,अब दो ही चीजे हो सकती थी , पहली की मैं सपना देख रहा था , लेकिन इतना स्पष्ट सपना जो की बिलकुल हकीकत ही लगे ..

ये थोडा अटपटा था , दूसरी चीज हो सकती थी की ये सब सच ही हो और मेरे बेहोश हो जाने के बाद सभी मुझसे झूठ बोल रहे हो , लेकिन अगर सभी आज झूठ बोल रहे हो तो भी ये अजीब था क्योकि अगर कल की बाते सच है तो फिर मुझे सभी भाभियों के गर्भ को भरना था , और इसलिए ही तो उन्होंने मुझे पकड़ा था , फिर यु छोड़ क्यों दिया …

जब कुछ समझ नहीं आता तो सब छोड़ कर अपना काम करना चाहिए , मैंने भी यही करने की सोची और अपने कमरे में जाकर शावर लेने लगा …
नाश्ता करके मैं अपनी बुलेट में घर से निकल गया थोड़ी दूर चलकर मैं एक घर के सामने रुका

“अंकित …” घर के बाहर से ही मैंने उसे आवज दी

अंकित मेरे ही उम्र का लड़का था मेरे साथ बचपन से खेला था , वो भी अपने नाना जी के घर रहता था , तभी मुझे उसकी भाभी निकलते हुए दिखाई दी ..

“अरे कुवर जी आप “

“नमस्ते गुंजन भाभी “

“आइये न अन्दर “

“नहीं भाभी मैं बस अंकित को लेने आया हु “

“रुकिए बाबु को बुला कर लाती हु “

गुंजन भाभी अंदर चली गई और मैं उन्हें देखता ही रह गया , आज से पहले वो मुझे कभी इतनी सुन्दर नहीं लगी थी , अंकित के मामा के दो लड़के थे दोनों की ही शादी हो चुकी थी लेकिन कोई संतान अभी तक नहीं थी , गुंजन भाभी बड़े भाई की बीवी थी … अचानक से मेरे दिमाग में कल की बात पर चली गई , ये बात तो सच है की यंहा के कई लोगो के बच्चे नहीं है और खासकर लड़के तो नहीं है …..

गुंजन भाभी के चहरे में मुझे देख कर एक अलग ही मुस्कान आई थी , साड़ी के पल्लू से उन्होंने अपना सर ढक रखा था लेकिन उनके लाल रसीले होठ और उसमे आई वो मुस्कान मुझे साफ साफ दिखाई पड़ी थी , आँखों के काजल से जैसे उनकी आंखे कुछ बड़ी हो गई हो , और चंचलता से भरे मासूम आँखों ने अनजाने में ही मेरे अंदर कुछ कर दिया था , एक अजीब सी कसक मेरे मन में हुई थी जैसी की मैंने कभी महसूस नहीं की थी ..

मैं उस अजीब सी संवेदना को समझने की कोशिस ही कर रहा था की अंकित घर से बाहर आ गया

“अरे भाई इतने दिनों के बाद आया तू “

वो सीधे आकार मेरे गले से लग गया

“कल मैं हवेली गया था तो मुझे पता चला की तू आया है लेकिन तू सोया था इसलिए तुझे डिस्टर्ब नहीं किया “

“तू कल हवेली आया था ??”

“हा … क्यों ?”

“कितने समय “

“शाम के समय शायद 6-7 बजे “

उसने अपने सर को खुजलाते हुए कहा

चलो एक और आदमी ने मुझे कह दिया की मैं सोया हुआ था …

“चल बैठ घूम कर आते है, माल रख ले “

वो अंदर गया और कुछ सामान लेकर वापस बाहर आया ..

साथ ही गुंजन भाभी भी आई

“अरे कुवर जी कहा जा रहे हो , यही बैठो आपके लिए मुर्गा बना देती हु “

“नहीं भाभी ठीक है .. ऐसे भी जानते हो ना अम्मा को मेरा ये सब करना पसंद नहीं “

वो हँस पड़ी

“आप अम्मा से बहुत डरते हो , अरे खाओगे नहीं तो बल कैसे आयेगा बहुत काम करने है आपको ,पुरे गांव की जिम्मेदारी आपके ही कंधे पर है “

उनकी बात सुनकर मैं एक बार उनको देखता ही रह गया , अब ये जिम्मेदारी वाली बात तो मैं हमेशा से ही सुनता रहा हु लेकिन भाभी आज कौन सी जिम्मेदारी का कह रही थी इस बात का मुझे संदेह था ..

“फिर कभी भाभी “मैंने अहिस्ता से कहा , भाभी जी बस मुस्कुरा गई

अंकित मेरे पीछे बैठा और मैंने बुलेट बढ़ा दी , हमारा एक अड्डा हुआ करता था पहाड़ी के पास का एक छोटा सा झरना जो की कोई 5 किलोमीटर दूर था , अंकित ने सारी चीजे रख ली थी जो की हम अकसर रखा करते थे ..

हमारे गांव में घर घर ही शराब बनाई जाती थी और यंहा शराब पीना एक आम सी बात थी लेकिन अम्मा के सामने मैंने कभी शराब नहीं पि थी ना ही कभी ज्यादा पि कर उनके सामने ही गया था , अंकित के घर में भी शराब बनती थी , और गांव की शुद्ध शराब की तो महक ही कुछ और होती है , एक बोतल में शराब और कुछ खाने का सामान पकड़ कर हम निकल गए थे ,

शराब की बोतल खुली और मैंने एक बार अच्छे से उसे सुंघा

“वाह क्या सुगंध है “ मैंने बोतल को अपने नाक के पास लाते हुए कहा

“अरे तुम शहरी लोग क्या जानो इसका महत्व , तू तो वो बड़ी बड़ी दारू पीते हो “

अंकित पैक बनाने लगा , ये इस गांव में मेरा इकलौता दोस्त था और जब भी मैं यंहा आता तो हम इस जगह पर जरुर आते ..

“क्या हुआ कुवर जी आज थोडा बेचैन लग रहे हो “

दो पैक अंदर जाते ही अंकित की बकचोदी शुरू हो गई थी ,मैं हलके से हँस पड़ा

“बस यार एक अजीब सा सपना आया था कल , थोडा बेचैन हु , तू बता कैसे चल रहा है सब गांव में “

“बढ़िया है सब , ऐसे अपनी एक सेटिंग के बारे में तुझे बताया था न … अरे वही जिसे इसी झरने में लाकर पेला करता था “

मैं समझ गया था की ये किसके बारे में बात कर रहा है ..

“छि बे तू कभी नहीं सुधरेगा ..”

“अरे कुवर जी इसमें छि वाली क्या बात है , लड़के और लडकियों को तो प्रकृति ने ही ऐसा बनाया है की वो सम्भोग कर सके , समझ नही आता आप क्यों इतना दूर भागते है ,या फिर कही ऐसा तो नही की हमारे सामने ही ये शराफत दिखाते हो और शहर में घपघप करने में डिग्री ले रखी हो “

मैंने पास रखा कंकड़ उसे दे मारा वो हँसने लगा

“इतनी अच्छी पर्सनाल्टी है भाई तेरी , इतना पैसा है तेरे पास , और अम्मा का रुतबा .. इस गांव के लोग तुझे कुवर कहते है , किसी भी लड़की के उपर हाथ रख दे न तू तो कोई ना नहीं बोलेगी और तू है की साधू बना बैठा है “

अंकित मुझपर ऐसे तंज अक्सर कसा करता था , मैं भी उसे कभी सीरियस नहीं लिया लेकिन आज ना जाने उससे दिल की बात कहने का मन कर रहा था ..

आँखों के सामने गुंजन भाभी का चहरा घूम रहा था और मैं अंकित को कहना चाहता था की मैं किसी और को नहीं तेरी प्यारी भाभी के साथ सम्भोग करना चाहता हु ..

क्या सच में मैं ऐसा चाहता था ..??? मुझे सच में ये नहीं पता था की मैं क्या चाहता था लेकिन घूँघट की आड़ से झलकता गुंजन का चहरा मेरे अंदर कुछ हिला रहा था , मैं अब वैसा नहीं था जैसा मैं पहले हुआ करता था , और उपर से देसी शराब का वो हल्का हल्का सुरूर ..

अंकित मेरे चहरे को जैसे पढ़ रहा हो ..

“भाई कुछ तो हुआ है तुझे तू ऐसा तो नहीं था ,”

“कुछ नही हुआ मुझे “ मैंने उसकी बात को टालते हुए कहा

“नहीं कुछ तो बात है , अरे भाई समझ कर बोल दे , आखिर हम बचपन के दोस्त है , भले ही ये बात अलग है की तू कुवर है और मैं एक गरीब लड़का “

उसने मुह बनाया

“चुप बे .. जब देखो नाटक करता रहता है कुछ भी तो नहीं हुआ है मुझे , चल एक पैक और दे “

वो हलके से हँसा

“कुवर जी चहरे से दर्द छिपा लोगे , दिल में दर्द दबा लोगो लेकिन नीचे का क्या करोगे …तुम्हारा दर्द खड़ा हो गया है , ना जाने किसके बारे में सोच रहे हो हा हा हा “

वो जोरो से हँस पड़ा , मैं सकपका कर नीचे देखा तो मैंने महसूस किया की मेरा लिंग तना हुआ मेरे पेंट में तम्बू बनाये हुए है ..

गुंजन भाभी के बारे में सोचने मात्र से मेरा ये हाल हो गया था , मैं बचपन से ही शराफत की मूरत की तरह जिया था , इस उमंग को स्वीकार करना भी मेरे लिए बहुत भारी था ..

मुझे संकोच में सकुचाते हुए देखकर अंकित थोडा गंभीर हो गया .

“भाई तू मेरा दोस्त है , मेरे भाई जैसा है तुझे ऐसा देखकर दुःख लगता है , माना तू शराफत की मूरत है लेकिन अब तो तू जवान हो गया है , यार अपने अंदर की आग को स्वीकार कर वरना ये तुझे जला जाएगी …”

अंकित को इतना गंभीर होकर बात करते मैंने कभी नहीं देखा था , मैं उससे थोडा खुलना चाहता था ताकि मेरा भी बोझ थोडा हल्का हो जाए ..

“पता नहीं यार मुझे ये क्या हो गया ..”

मेरा सर शर्म से झुक गया था , वो हँस पड़ा

“अबे तू लड़की है क्या जो इतना शर्मा रहा है , इतना तो मेरी वाली भी नहीं शर्माती , और लौड़ो का खड़ा नहीं होगा तो क्या होगा , लेकिन मुझे एक बात सच सच बता की आखिर किसके बारे में सोच रहा था जो ऐसा बम्बू बन गया “

“अबे छोड़ ना “

“अच्छा हमारे गांव की है क्या ??” उसने बड़े ही उत्सुकता से पूछा

मैंने हां में सर हिला दिया ..

“साले तू तो बड़ा हरामी निकला , ऐसी कौन सी लड़की है जिसे देख कर कुवर का खड़ा हो रहा है ?? शादी शुदा की कुवारी ???”

वो मुझे जांचने की निगाहों से ही देख रहा था

“अबे छोड़ ना पैक बना ..”

“ओ साला यानि की शादीशुदा है , सच में कुवर जी आप तो पहुचे हुए निकले …कौन हो सकती है ,समझ गया जरुर कामिनी भाभी होगी , उसे देखकर तो मेरा भी खड़ा हो जाता है , वही है ना “

अंकित की उत्सुकता बहुत बढ़ गई थी

“अबे छोड़ न “

“भाई बता ना … जो भी तू बोल एक बार उसे यही झरने में लाना मेरा काम है तुझे दिलवा कर रहूँगा “

मैं सोच में पड़ गया था की आखिर इस गांडू को कैसे बताऊ की वो कोई और नहीं उसके ही घर की ओरत है जिसे ये माँ की तरह मानता है , अंकित जैसा भी हो लेकिन वो अपने भाइयो का बेहद आदर करता था आखिर जन्म से ही वो उनके घर में रहता था , वही वो अपनी भाभियों को अपनी माँ की तरह इज्जत करता था , ये बात उसने कई बार मेरे सामने कही भी थी … एक तरफ वो मुझे बार बार जोर दे रहा था , दूसरी तरफ मैं एक दुविधा में फंस चूका था ..

उसने मेरे सामने एक पैक बढ़ा दिया

“ये गटक जा तुझे हिम्मत आ जाएगी , चल मैं कसम खाता हु की तू जिस भी ओरत के कारन खड़ा करके बैठा है उसकी मैं तुझे दिलाऊंगा “

मैंने एक ही साँस में वो पैक पि गया , मेरे आँखों में खुमार चढ़ चूका था और साथ ही सामने गुंजन भाभी का चहरा भी घूम रहा था , नशा और हवास दोनों का काकटेल बहुत ही खतरनाक होता है , वही हालत मेरी भी थी , दिल जोरो से धडकने लगा था , दूसरा अंकित की बाते ..

“यही उसे चोदना , इसी पत्थर में झरने की आवाज और उस लड़की की चीख वाह भाई मजा ही आ जायेगा और वो भी कोई गदराई हुई भाभी हो गई तब तो मजा दुगुना ही हो जायेगा , अब बता भी दे की वो खुशनसीब कौन है जिसे कुवर जी का मिलने वाला है “

मैंने एक बार आंखे बंद की और मेरे मुह से निकल गया

“गुंजन भाभी …”

माहोल में एक शांति छा गई थी , अंकित का मुह खुला का खुला रह गया था , मैंने अपने लिंग पर अपना हाथ रखा और उसे जोरो से मसल दिया ..

“आह ..सुनना चाहता था ना , तो सुन अब , हा जब से उसे देखा हु तब से बेहाल हो रहा हु , अब बता दिलवाएगा ,लायेगा उसे यंहा “

मैं हवस और शराब के नशे में डूबा जा रहा था

वही अंकित सकते में था, वो कुछ भी बोलने को असमर्थ था, उसका चहरा पीला पड़ चूका था , गुस्से से ज्यादा आश्चर्य उसके चहरे पर झलक रहा था , वो झटके से खड़ा हो गया और बिना कुछ कहे ही पीछे मुड़कर जाने लगा , मुझे एक बार को होश आया की मैंने क्या कह दिया है लेकिन अब देर हो चुकी थी …

शायद मैंने अपने बचपन का दोस्त खो दिया था ,...

To be Continued

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Satish Kumar
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@chutiya Tum har bar surprise kar dete ho, Reader ko padhne pe padhne ko majbur kar dete ho...

tumne suspense create kar hi diya abhise..

Congrats for your new story..

Flowers

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Dr. Chutiya
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“गुंजन भाभी …”

माहोल में एक शांति छा गई थी , अंकित का मुह खुला का खुला रह गया था , मैंने अपने लिंग पर अपना हाथ रखा और उसे जोरो से मसल दिया ..

“आह ..सुनना चाहता था ना , तो सुन अब , हा जब से उसे देखा हु तब से बेहाल हो रहा हु , अब बता दिलवाएगा ,लायेगा उसे यंहा “

मैं हवस और शराब के नशे में डूबा जा रहा था

वही अंकित सकते में था, वो कुछ भी बोलने को असमर्थ था, उसका चहरा पीला पड़ चूका था , गुस्से से ज्यादा आश्चर्य उसके चहरे पर झलक रहा था , वो झटके से खड़ा हो गया और बिना कुछ कहे ही पीछे मुड़कर जाने लगा , मुझे एक बार को होश आया की मैंने क्या कह दिया है लेकिन अब देर हो चुकी थी …

शायद मैंने अपने बचपन का दोस्त खो दिया था ,...

भाभियों का रहस्य | Bhabhiyon Ka Rahasya | Update 4

एक अजीब सी हालत थी मेरी , मेरे जैसा शर्मीला लड़का जिसे हमेशा ही अपने महत्वकांक्षाओ से ज्यादा परवाह समाज के नियमो की रही थी , अपने सामाजिक रुतबे और इज्जत की परवाह करने वाला मैं ये क्या कर गया था …

मैं भी वंहा से उठा और अपने पुरे कपडे निकाल कर नग्न ही जाकर झरने के निचे खड़ा हो गया , शराब का नशा झरने के ठन्डे पानी के पड़ने से थोडा कम तो हो रहा था लेकिन साथ ही साथ आँखों में गुंजन भाभी का चहरा झूमता जा रहा था , झरने के पानी की कलकल और जंगल का वो शांत वातावरण मिलकर भी मुझे वो चहरा भुला नहीं पा रहे थे , ठन्डे पानी में कुछ देर तक यु ही खड़े रहने से मेरा मन थोडा शांत होने लगा था , लिंग का कसाव भी धीरे धीरे कम पड़ने लगा था लेकिन अपने लिंग में इतनी कसावट मैंने अपने जीवन में पहली बार महसूस की थी , ऐसी जलन ऐसी आग , वासना का ऐसा तूफान मैंने अब से पहले कभी महसूस ही नहीं किया था ..

पानी का जोर बढ़ता हुआ मालूम होने लगा और मैं शांत होकर वंहा से बाहर आया …मेरे मन में एक अजीब सी हलचल मच चुकी थी , एक तरफ वो आग थी जिसमे जलने से भी मुझे एक गजब का आनंद मिल रहा था , दुसरे तरफ मेरा अंतर्मन था जो कह रहा था की ये सब कुछ गलत है , , मेरी सामाजिक चेतना को ये स्वीकार नही था की मैं इस तरह की हरकत करू , लेकिन ये नैतिकता के सारे बोध मिलकर भी मुझे उस पाप को करने से नहीं रोक पा रहे थे , मन में द्वन्द ऐसा छिड़ा की मैं वही बैठ कर रोने लगा , कुछ भी समझ आना बंद हो चूका था , सही गलत का बोध जी मेरे मन से मिट गया हो …

कुछ देर तक रोने से मेरा मन हल्का हो गया , मैंने पहला फैसला किया की मैं जाकर अंकित से माफ़ी मांग लूँगा , लेकिन इसके लिए मुझे उसके घर जाना होगा ??? और वंहा …

नहीं मैं अगर गुंजन भाभी को फिर से देखू और मेरे मन में फिर से उनके लिए गलत विचार आने लगे तो मैं क्या करूंगा ???

मैंने उसे फोन करने की सोची लेकिन क्या वो मेरा फोन उठाएगा ???

मैंने कपडे पहने और अपनी बुलेट घर की ओर बढ़ा दी ..

मैं कुछ ही दूर गया था की गांव के आखिर में पड़ने वाले चाय की टपरी में बैठा हुआ अंकित मुझे दिखाई दिया , वो हाथो में सिगरेट लिए नीचे सर किये बैठा हुआ था ,मेरे बुलेट की आवाज भी उसको उसके विचार से नहीं जगा पाई , वो अपनी ही सोच में गुम था , मैंने गाड़ी रोकी और और उसके पास पहुच गया ..

“अंकित …अंकित “

उसने एक बार नजर उठा कर मुझे देखा , लेकिन वो कुछ भी नहीं बोला

“भाई माफ़ कर दे मैं बहक गया था ..पता नहीं मुझे क्या हो गया था “

वो अब भी कुछ नहीं बोला , बस वो खड़ा हो चूका था और …

चटाक ..

एक जोरदार झापड़ मेरे गालो में पड़ा , मैं लडखडा गया लेकिन सम्हला , टापरी का मालिक एक अधेड़ उम्र का आदमी था वो भी बाहर आ चूका था और बड़े ही आश्चर्य से हमें देख रहा था , उसे भी पता था की मैं कौन हु और ये भी की मैं और अंकित बचपन के दोस्त है …

मैंने इशारे से उसे जाने को कहा ,

“वो मेरी माँ है … तू उनके बारे में ऐसा कैसे बोल सकता है , तू तो मेरे बचपन का दोस्त है ना “

अंकित की आवाज ऊँची नहीं थी , वो बिलकुल सधे हुए अंदाज में बोल रहा था , आवाज इतनी ही तेज थी की सिर्फ मैं सुन सकू ..

लेकिन गुस्से की आग उसके एक एक शब्द में मौजूद थी ..

“भाई मुझे माफ़ कर दे , पता नही क्या हो गया था , प्लीज् घर चल “

मैंने उसका हाथ पकड़ा तो उसने हाथ झटका दिया , मैंने एक बार फिर से उसका हाथ पकड़ा

“प्लीज भाई …”

उसने एक बार मुझे देखा ..

“आज के बाद कभी मेरे घर मत आना , अब से तू मेरा कोई नहीं है “

इतना बोल कर वो फिर से वंहा से पैदल ही गांव की तरफ बढ़ गया था ….

मैं अपना सर पकड़ कर वही रखी बेंच पर जा बैठा …

कुछ देर हो चुके थे मैं वैसे ही बैठा था , अब हवस का तूफ़ान ख़त्म हो चूका था और उसकी जगह आत्मा की ग्लानी ने ले ली थी , आज मैंने अपनी नैतिकता को ताक में रखकर माँ समतुल्य भाभी पर गन्दी नजर डाली थी , आज मैंने अपना एक दोस्त खो दिया था …

“कुवर जी सिगरेट चाय लेंगे “

वही अधेड़ उम्र का आदमी मेरे पास आ गया

“हा काका एक चाय पिला दो और एक सिगरेट भी दे दो ..”

एक हाथ में सिगरेट और दुसरे में चाय की प्याली , दो गहरे कस ने जैसे मुझे पुरे जन्झावातो से निकाल दिया , मैं उठ कर खड़ा हुआ जैसे मुझे अब पता था की मुझे क्या करना है …

पैसा देने के लिए जैसे ही मैं वंहा पंहुचा

“कैसे है कुवर जी…”

मैंने सर उठा कर देखा … सामने जो चहरा था मैं उसे पहचानने की कोशिस करने लगा ..

“अब्दुल ..??? तुम अब्दुल ही हो ना “

मेरे मुह से निकला , ये अब्दुल था मेरे साथ 10th तक साथ पढ़ा था , उसके बाद मैं शहर चला गया

“हा ये मेरी ही दूकान है , अब कभी कभी यंहा बैठता हु “

उसने मुस्कुराते हुए कहा , तभी पीछे से काका आ गए जो की एक जालीदार बनियाइन और लुंगी में थे ..

“ये मेरा बेटा है कुवर जी , बहुत पढ़ लिया अब सोच रहा हु की इसे भी काम में लगा दू “

उन्होंने आते ही कहा

“बहुत दिन बाद आपको देखा कुवर जी “ अब्दुल बोल उठा

“अरे यार तुम तो मुझे कुवर मत बोलो , आखिर हम एक ही साथ पढ़े है “ मैंने पैसे देते हुए अब्दुल को कहा

“आज अंकित को क्या हो गया वो ऐसा गुस्से में था “ अब्दुल ने मुझे छुट्टा लौटते हुए कहा

“क्या पता ??? और तुम बताओ क्या चल रहा है ….”

“कुछ नहीं बस पास के गांव से कॉलेज कर रहा हु “

अब्दुल के चहरे में एक अजीब सी उदासी थी , मुझे याद आया की वो क्लास का टापर हुआ करता था , मैंने 10 तक की पढाई गांव से की थी उसके बाद शहर चला गया था , जब तक यंहा रहा तब तक मेरे दोस्तों में सिर्फ अंकित ही रहा , बाकि किसी से मुझे कोई मतलब ही नहीं रहा , आज बहुत दिन बाद मुझे पुराना बंदा मिला था …

“अच्छा है …”

मैंने बेतकल्लुफी से कहा था

“क्या अच्छा है कुवर , जन्म से अब तक मैं हर क्लास में टॉप करता रहा , कॉलेज में भी मेरे टीचर कहते है की मैं ब्रिलिएंट स्टूडेंट हु , लेकिन मेरी तक़दीर में तो बस इस छोटे से टपरी को सम्हालना ही लिखा है “

उसके बातो में एक अजीब सा दर्द मैंने महसूस किया …

“अरे तो आगे पढो परेशानी क्या है “ मैं अपनी चिन्ताओ को छोड़ कर अब अब्दुल की बातो को सुनने लगा था ,

तभी उसके पिता सामने आये

“अरे कुवर जी , आप भी कहा इन बातो में आ गए … अरे हमारे पास इतने पैसे नहीं है की इसकी पढाई करवाए , चुप चाप ये धंधे को सम्हाले या कोई और काम करके पैसे कमा ले तो इसकी शादी करवा दे .. और ये साला बोलता है की इसे और पढना है , कलेक्टर बनना है .. अरे साला गरीब आदमी का बेटा कभी कलेक्टर बनता है क्या …इतने बड़े सपने काहे को देखना , समझाओ इसे साला कालेज जाकर बिगड़ रहा है “

उसके पिता झुंझला कर बोल उठे और अब्दुल का चहरा और भी उदास हो गया , उसकी उदासी जैसे मुझे चुभने लगी थी ,

“अरे काका एक काम करते है इसे हवेली भेज दो , मैं इसे काम दिलवा दूंगा , बाकि रही पढाई की बात तो वो हम देख लेंगे “

मेरी बात सुनकर दोनों बाप बेटे की आँखे मेरे तरफ उठ गई , अब्दुल का चहरा तो जैसे खिल कर फुल हो गया हो ..

“कुवर बड़ी महेरबानी “ अब्दुल ने हाथ जोड़ते हुए कहा

“अरे तू फिर से कुवर बोला , अबे नाम भूल गया है क्या …”

अब्दुल बस मुस्कुरा कर रह गया था …….

To be Continued

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Dr. Chutiya
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“अरे कुवर जी , आप भी कहा इन बातो में आ गए … अरे हमारे पास इतने पैसे नहीं है की इसकी पढाई करवाए , चुप चाप ये धंधे को सम्हाले या कोई और काम करके पैसे कमा ले तो इसकी शादी करवा दे .. और ये साला बोलता है की इसे और पढना है , कलेक्टर बनना है .. अरे साला गरीब आदमी का बेटा कभी कलेक्टर बनता है क्या …इतने बड़े सपने काहे को देखना , समझाओ इसे साला कालेज जाकर बिगड़ रहा है “

उसके पिता झुंझला कर बोल उठे और अब्दुल का चहरा और भी उदास हो गया , उसकी उदासी जैसे मुझे चुभने लगी थी ,

“अरे काका एक काम करते है इसे हवेली भेज दो , मैं इसे काम दिलवा दूंगा , बाकि रही पढाई की बात तो वो हम देख लेंगे “

मेरी बात सुनकर दोनों बाप बेटे की आँखे मेरे तरफ उठ गई , अब्दुल का चहरा तो जैसे खिल कर फुल हो गया हो ..

“कुवर बड़ी महेरबानी “ अब्दुल ने हाथ जोड़ते हुए कहा

“अरे तू फिर से कुवर बोला , अबे नाम भूल गया है क्या …”

अब्दुल बस मुस्कुरा कर रह गया था …….

भाभियों का रहस्य | Bhabhiyon Ka Rahasya | Update 5

हवेली आने के बाद भी मैं थोडा बेचैन था , एक दोस्त मैंने खो दिया था और फिर गुंजन भाभी का नशा अभी तक हल्का हल्का सुरूर लिए मेरे जेहन में मंडरा रहा था ..

मैं अभी अपने कमरे में था की अन्नू वंहा पहुची

“अरे कुवर जी आप तो ईद के चाँद हो गए हो , सुबह से जो निकले अभी आ रहे हो “ उसने तंज कसते हुए कहा ..

मैं अभी अभी बिस्तर में लेटा ही था ..

“यार दिमाग मत खराब कर ऐसे भी आज सुबह से दिमाग का भोस…”

मैं इतना बोलते ही चुप हो गया

अन्नू अजीब निगाहों से मुझे देख रही थी

“क्या बोला तू …” उसने किसी खोजी की तरह सवाल किया

“कुछ भी तो नही .. बस आज अच्छा नहीं लग रहा “

“नही नही तूने गाली दी ..”

वो मेरे और करीब आ गई थी

“पागल है क्या मैं कभी गली देता हु क्या ?? अब अजीब सा लग रहा है “

मैंने बात को बदलते हुए कहा , लेकिन जैसे उसपर इसका कोई भी असर नहीं हुआ हो , वो मेरे पास ही आकर बैठ गई और मेरे सर को छूने लगी

“बुखार तो नहीं है , आखिर हुआ क्या है जो ऐसे खुन्नस में बैठे हो “

मैं थोड़ी देर चुप रहा , लेकिन अन्नू मेरी बहुत अच्छी दोस्त थी और वो मुझे बड़े ही परखी नजरो से देख रही थी , उससे मैं झूठ नहीं बोल सकता था लेकिन सच भी नहीं बोल सकता था ..

मैंने बीच का रास्ता अपनाने का सोचा ,,क्यों ना ऐसा सच बोला जाए की आधी बात ही बताई जाए

“वो यार मेरा अंकित से झगड़ा हो गया बस कुछ और नहीं , इसी बात को लेकर थोडा अजीब लग रहा है “

अन्नू अंकित से मिल चुकी थी , मेरे एकमात्र दोस्त को वो भी अच्छे से जानती थी

“अंकित से झगड़ा ??? इतने सालो से तुम दोनों को देख रही हु आज तक तो तुम कभी नहीं झगड़े .. आज आखिर क्या हो गया “

“कुछ नहीं यार वो गुंजन ….” इतना बोलकर मुझे आभास हुआ की मैं तो पूरा सच बता रहा हु , मैं वही चुप हो गया

“गुंजन क्या ??? गुंजन तो उसकी भाभी का नाम है ना “ उसने फिर डिटेक्टिव बनते हुए कहा

“हा गुंजन भाभी … कुछ नही बस वो शराब के लिए …तुझे तो पता है की मुझे यंहा की देशी शराब कितनी पसंद है , भाभी वो देने से मना कर रही थी तो .. बस यु ही झगड़ा सा हो गया “

मैंने अपने तरफ से बात बनाने की पूरी कोशिस की थी , लेकिन शायद मैं सफल ना हुआ

अन्नू मेरे पास आई और मेरे मुह को हल्का सा सुंघा

“शराब तो तूने पि हुई है … बात क्या है कुवर जी …”

उसकी बातो का मेरे पास जवाब नही था और मैं उसे सच नहीं बताना चाहता था

“कुछ नहीं यार तू भी ना .. चल थक गया हु सोने दे “

उसने मुझे अजीब अंदाज में देखा

“साले कितना सोयेगा तू , कल से सो ही तो रहा है “

“प्लीज यार सोने दे न “

उसने एक बार मुझे देखा और बिना कुछ बोले वंहा से चली गई ….

* * * * *

शाम हो चुकी थी और शरीर में एक अजीब सी थकान महसूस कर रहा था ..फ्रेश होकर निचे आया तो वंहा अब्दुल अम्मा के पास खड़ा हुआ दिखा ,

“जब से आया है बस सोते ही रहता है तबियत तो ठीक है न तेरी “

मुझे देखते ही अम्मा ने कहा

“जी अम्मा ठीक है बस थोडा सुस्ती सी है “

“हम्म्म तुमने इसे काम के लिए कहा था ???”

उन्होंने फिर से सवाल दागा ..

“हा वो यंहा का लेखा जोखा करने के काम में इसे लगा देते हो अच्छा हो जाता , गरीब आदमी है और पढने में भी बहुत तेज है , हिसाब किताब अच्छे से देख लेगा “

अम्मा ने एक बार मुझे देखा और एक बार अब्द्ल को , मैंने आज तक किसी की सिफारिस नहीं की थी , उन्होंने हामी भर दी , अब्दुल की आँखों में कृतज्ञता के भाव थे , इस काम के साथ वो अपनी पढाई भी कर पायेगा , मुझे भी इस बात की ख़ुशी थी ….

कुछ देर बाद ही अनु भी वंहा आ गई ,

हम दोनों हेवली के ही बगीचे में बैठे थे ..

“तुम आज बहुत परेशान थे आखिर हुआ क्या है ..”

अन्नू के चहरे की मासूमियत में एक चिंता की लकीर खिंच गई थी ..

“कुछ भी तो नहीं … “

मैंने उसी बेतकल्लुफी के साथ कह दिया , उसने मेरे हाथो को अपने हाथो में ले लिया और मेरे हाथो पर एक किस कर दिया ..

“तुम्हे ऐसे देखा नहीं जाता , तुम हसते खेलते ही अच्छे लगते हो “

उसकी मासूम सी आँखों में पानी का एक कतरा था , हलके काजल लगी आँखों में वो पानी उसकी उज्जवल आँखों को और भी बढ़ी बना रही थी ..

मैंने भी उसके हाथो को चूमा और उसके आँखों में आये पानी को अपनी उंगली से साफ़ किया

तू पागल है क्या क्यों रो रही है , मैंने उसके गालो को सहलाते हुए कहा था ..

उसने एक बार मुझे देखा और हलके से मेरे होठो को चूम लिया , उसके इस कृत्य से मैं थोडा सा चौका ..

सालो से हम साथ थे और हमारे बीच एक गहरी दोस्ती भी थी , हमने एक दुसरे के साथ बहुत समय अकेले बिताया था , प्यार से एक दुसरे को छुवा था , बाते की थी लेकिन दोस्ती की दिवार को कभी लांघा नहीं था , ना ही कभी इस पवित्र रिश्ते को अपनी वासना से बर्बाद करने की कोशिस की थी ..

अन्नू ने मेरे होठो को चूमा था , अगर कोई दूसरा समय होता तो शायद मैं इसे उसके प्रेम की प्रतिक्रिया के रूप में स्वीकार कर लेता , लेकिन आज उसके चुम्मन में एक अजीब सी बात थी , उसके दिल की धड़कने बहुत ही तेज चल रही थी , उसकी चंचल आँखे आज शांत थी और मुझे ही घुर रही थी , उसके आँखों में मेरे लिए विश्वास और प्रेम के अलावा भी कुछ दिखाई पड़ रहा था , ये वो अन्नू नहीं थी जिसे मैं जानता था , ये थोड़ी बेचैन थी , कुछ तो हुआ था इसे ..

“तुम्हे क्या हुआ है …??”

मैंने थोड़े आश्चर्य में भरकर उसे पूछा …

वो चुप ही रही और मुझे ही देखते रही ..

“कुछ हो रहा है निशांत कुछ अजीब सा ,समझ नहीं आ रहा है की क्या हो रहा है , मैंने एक अजीब सा सपना देखा और ….”

वो चुप हो गयी उसके दिल की धड़कने बहुत तेज थी जो की मुझे बाजु में बैठ कर भी समझ आ रही थी ..

“क्या देखा अन्नू ..”

मैंने हलके से उससे कहा ..

“कैस बताऊ … यंहा की ओरते और उन्होंने मुझे …तुम्हारे साथ … छि नहीं मैं पागल हो गई हु “

उसने तुरंत जैसे खुद को सम्हाला और खड़ी हो कर जाने लगी , लेकिन मैंने उसका हाथ थाम लिया ..

“बताओ की तुमने क्या देखा और कब देखा “

मैंने उसे थोड़े कडक स्वर में कहा

“कल रात ही , सुबह मैंने उसे एक सपना समझ कर ध्यान नही दिया , लेकिन अब अजीब सी बेचैनी हो रही है , मेरे दिमाग में अजीब अजीब से ख्याल आ रहे है , दिन भर आँखों में बस …. छि मैं ये क्या सोच रही हु “

वो जैसे खुद को कंट्रोल करने की कोशिस कर रही थी ..

मुझे जैसे कुछ समझ आया कुछ ऐसा ही तो मेरे साथ भी हो रहा था , गुंजन भाभी को लेकर

“आँखों के सामने मेरा चहरा आ रहा है ???”

मेरी बात सुनकर उसने आश्चर्य से मेरी ओर देखा जैसे मैंने उसके दिल की बात कह दी हो ..

“मेरा हाथ छोडो निशांत हमें अब यंहा अकेले नहीं रहना चाहिए , मैं अपने दोस्ती के इस पावन रिश्ते को गन्दा नहीं कर सकती “
उसकी आवाज लडखडा रही थी वो लगभग रोते हुए बोली थी ,मैं उसकी तकलीफ समझ सकता था , एक तरफ नैतिकता और मेरे लिए उसकी दोस्ती की जंजीरे थी तो दूसरी तरफ मन में उठने वाला वो आकर्षण जो अजीब तरह से इतना ज्यादा था की आज मैं खुद अपना आपा खो चूका था , हमारे साथ कुछ तो गलत हुआ था , अन्नू की बात ही इस बात का जीता जगाता गवाह थी , क्या उसने भी वही देखा जो मैंने देखा ???

मैं उससे पूछना चाहता था लेकिन वो इतनी बेचैन थी की मुझे उसके उपर दया आई और उसके लिए चिंता भी होने लगी , अभी तो वो बहकी थी अगर मेरे अंदर भी वो आग जल जाती तो शायद वो हो जाता जो एक दोस्ती के रिश्ते में नहीं होना चाहिए …

मैंने उसका हाथ छोड़ दिया , लेकिन वो वंहा से गई नहीं , मैंने उसे देखा

“अगर मैं तुम्हारे साथ कुछ कर बैठू तो क्या तुम मुझे माफ़ करोगे “

उसने डबडबाई हुई आँखों से देखते हुए कहा , उसकी ऐसी हालत देख एक बार मेरा दिल भी रो पड़ा था …

“तुम्हारे लिए कुछ भी ..तुम जाकर ठन्डे पानी से नहाओ , ये सपना सिर्फ सपना नहीं है ..” मैं बस इतना बोल पाया ,उसने हां में सर हिलाया . मुस्कुराई और हवेली की ओर भाग गई ….

* * * * *

मैं बेचैन सा बगीचे में ही बैठा था कि मुझे अब्दुल आते हुए दिखाई दिया ..

“भाई धन्यवाद तुमने मेरी बड़ी मुश्किल हल कर दी “

“कोई नहीं यंहा रहकर पढाई कर और कलेक्टर बन , हमें भी तेरे उपर गर्ब होगा “

मेरी आत सुनकर वो मुस्कुराया

“पूरी कोशिस करूँगा … तुम चिंता में लग रहे हो ,क्या बात है , सुबह भी तुम्हारा अंकित से झगडा हो गया ??”

अब मैं उसे क्या बताता …

“तुम यंहा कब से हो …??” मैंने उससे सवाल किया

“जब मैं बहुत छोटा था तभी से मेरे अब्बू अम्मी यंहा कमाने आ गए थे “

“ओह … कुछ श्राप के बारे में जानते हो ??”

“श्राप …??” वो थोडा चौका फिर कुछ सोचने लगा और फिर बोल उठा

“हा सुना तो है की इस गांव में कोई श्राप है लेकिन वो क्या है ये कोई नहीं जानता , और कोई जानता भी हो तो बताता नहीं “

उसकी बात सुनकर मैं हँस पड़ा

“अगर बताता नहीं तो तुम्हे कैसे पता “ मैंने हँसते हुए कहा

“मेरे एक प्रोफ़ेसर ने मुझे बताया था , मनोविज्ञान और दर्शनशास्त्र के प्रकांड विद्वान , परामनोविज्ञान के ज्ञाता , डॉ चुन्नीलाल तिवारी यरवदा वाले … हमारे ही कालेज में मनोविज्ञान पढ़ाते है , और भुत प्रेतों में बहुत ही दिलचस्पी रखते है , यंहा आकर वो कोई शोध भी करने को कह रहे थे ….”

“डॉ चुन्नीलाल …???” मैं शख्स का नाम सुनकर तो लग ही नही रहा था की कोई विद्वान होगा

“हा लोग उन्हें डॉ चुतिया भी कहते है “

मैं उसका नाम सुनकर जोरो से हँस पड़ा

“अबे ये कैसा नाम है ..”

“भाई नाम में मत जा बहुत पहुची हुई चीज है डॉ चुतिया , और सपनो पर तो विशेष महारत है उनकी “

“सपनो पर …???” मैं एक बार को चौका

“हा मनोविज्ञान में सपनो का बहुत महत्व होता है , कभी कोई परेशानी हो तो बताना “

उसकी बात सुनकर मैं कुछ सोच में पड़ गया ..

“अच्छा मिलवा सकता है इस चुतिया से “

वो हँस पड़ा

“बिलकुल कल ही चल …”

अब्दुल जा चूका था और मैं फिर से अपने सोच में खो गया था , दो लोगो को एक सा सपना नहीं आ सकता , लेकिन अन्नू को क्या सपना आया है ये तो मुझे भी नहीं पता था , लेकिन इन दोनों सपनो में कुछ तो समानता थी और शायद ये सपने ही ना हो ..????
क्या मुझे इस डॉ चुतिया के पास जाना चाहिए …??

इसे कैसे पता की गांव में श्राप है , शायद इसे ये भी पता हो की वो श्राप क्या है ???

मैंने फैसला कर लिया ..

चलो मिल ही लेते है डॉ चूतिया से ………….

To be Continued

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