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माँ बेटे की शादी प्यार और चुदाई | Maa Bete Ki Shadi Pyaar Aur Chudai

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Satish Kumar
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माँ बेटे की शादी प्यार और चुदाई | Maa Bete Ki Shadi Pyaar Aur Chudai

Maa Bete Ki Shadi Pyaar Aur Chudai

माँ बेटे की शादी प्यार और चुदाई | Maa Bete Ki Shadi Pyaar Aur Chudai

कुछ दिन पहले में मेरा एक क्लोज फ्रेंड के साथ सेक्स को लेके डिस्कुस कर रहा त। वह मध्य प्रदेश में जॉब करता है। मैं ना उसका नाम ,ना जगह का नाम कुछ भी देना नहीं चाहता हूण। उस से जब बात कर रहा था , तब उस ने मुझे एक ऐसी सच्ची कहानी सुनया, की तब से मेरा दिमाग जाम हो गया। वह कहानी आप लोगों से शेयर करना चाहता हूण।

वह जहाँ जॉब करता है, उस ऑफिस में, एक दूसरा सेक्शन में पटेल बोलके एक आदमी काम करता है। यह उस आदमी की कहानि है वह आदमी मेरा दोस्त का अच्चा दोस्त बन गया है। मेरा दोस्त उनके घर जाते है, खाना खाते है और कभी कभी चैस का अड्डा भी जमा लेता है। अच्छी दोस्ती होने के कारन उन्होंने मेरा दोस्त को उसका जीवन का एक गहरा सच बताया। पर में लिखने में कच्चा हूण। मैं उस कहानी में ज़ादा रंग न चढाकर, सच मुच जो घटा उस को ही अपना तरीके से आप लोगों को बताउंगा। इस में मेरा कुछ क्रेडिट नहीं है। मैं जब सुन रहा था, तब मेरे दिल ने जैसे उस कहानी को चित्रण किया था बस उतना ही कह पाऊंगा। मैं मि.पटेल का जबानी से कहते रहुंगा। काम आसान हो जाएगा। इस में सेक्स है पर इतना डिटेल्ड नहीं रहेगा ,क्यूँ की इतना प्राइवेट बात मिस्टर पटेल खुद बताया नहि। पर स्टोरी का सिचुएशन से आप समझ जायेंगे कैसे कैसे वह सब घटा उनका लाइफ में। कोशिश करूँगा कहानी एक गति में चलती रहे

आज में ज़ादा कहानी लिख नहीं पाऊंगा। बस आप लोगों को थोड़ा प्रेमिसेस क्या है कहानी का वह बता दूंगा और बहुत जलद ही कहानी पूरा बताके एन्ड करवा दूंगा।

आप लोग कुछ डिमांड मत कीजिये,क्यूँ की यह किसीका लाइफ की सच्ची घटनाएँ है। जो में सुना , वह आप भी जानीए। बस एक चीज़ कहानी को कैसे फील करते रहेंगे, वह बताइयेगा। आप लोग अगर इंटेरेस्टेड नहीं रहेंगे, तोह मेहनत करके बताने का जरूरत नहीं होगा।

एम पी । में मेरा दोस्त किसी के घर में पेइंग गेस्ट बन के रहता है। ।मि.पटेल एक छोटा बंगलो टाइप घर किराया में लेके वहां रेह्ते है। उनका घर में मिसेस पटेल और उन लोगों का नर्सरी में पड़नेवाली एक बेटी है,ज़ीस का नाम दिया है। वह मेरा दोस्त को चाचू बुलाता है। मि.पटेल (अब्ब से हितेश नाम से बुलाएँगे) को मेरा दोस्त नाम से ही बुलाता है पर उनकी पत्नी यानि की मिसेस पटेल (अब्ब से मंजु बुलाएँगे) को भाभी ही कहता है। गुजरात में अब्ब हितेश का कोई नहीं है। पिछला ५ साल से मंजु का परेंट्स भी गुजरात छोड़के मुंबई में आगये। वहाँ एक फ्लैट खरीद के वह दोनों रेह्ते है। कहानी उस समय से डिटेल मालूम है जब हीतेश इंजीनियरिंग का लास्ट इयर में था उस से पहला घटना भी बताऊँगा जितना में जानता हू। हितेश अहमेदाबाद में ही पड़ रहा था। अहमेदाबाद के पास एक जगह है(नाम पूछिए मत) जहाँ हितेश अपनी माँ, नाना और नानी के साथ रहता था। उस का फ़ादर एक अनाथ था पर अच्छा इंसान था। इस्स लिए उसका नाना उनको घर जमाई बना के अच्चा प्यार दिया था। उसका नानी थोड़ी हिचक रही थी क्यूँकि उस समय उनकी बेटी देखने में बड़ी होगयी थी पर उम्र में कम थी। गुजरात में शायद कम उम्र में शादी होती है लगता है। सब ख़ुशी से जी रहे थे साल घूम ने से पहले ही हितेश आगया। ख़ुशी से सब झूम उठे। पर ज़ादा टाइम यह हाल नहीं रहा। हितेश के जनम के दो साल बाद मलेरिआ से अचानक हितेश के फादर की डेथ हो गई। तब हितेश की माँ केवल १८ साल की थी। एक बड़ा झटका लगा था उस फॅमिली को पर धिरे धीरे वह लोग उस सदमें से बाहर आने लगे और नार्मल होने लगे। कुछ साल बाद हीतेश के नाना नानी मंजू की दोबारा शादी के बारे में सोचे। पर मंजु खुद ही मना कर दिया वह। हीतेश के नाना के पास पैसा और प्रॉपर्टी था। तोह वह लोग एक फॅमिली बन के , एक आराम की ज़िन्दगी बिता रहा थे पर हितेश जब कॉलेज ख़तम किया उसको काम्पुसिंग में ही जॉब लग गया केवल २० साल का उम्र में। कंपनी में जाके जॉब ज्वाइन किया। और वीकेंड में घर आया करता था। पर उसका नाना नानी यह सोच के परेशांन होते थे की इतने दूर , अकेला उसका रहना खाना सब अकेले में करने में तकलीफ होती होगी। सो उसके नाना नानी उसकी शादी करवा ने के लिए सोच लिया।

आगे के भाग को आसान करने के लिए हीतेश की जबान से बोलुंगा। की कैसे उसके लाइफ का एक छुपा हुआ सपना अचानक खुद के बिना कोशिश में सच हो गया। जो सपना केवल वह देखता था मन ही मन में, वही शामे चीज़ उसका नाना नानी सब ठीक विचार करके अपने सब के भलाई के लिए कैसे सच करवा दिया। सब की मर्ज़ी से यह कहानी आगें गई। जो कुछ परेशानिया आगे आई , वह कैसे कैसे दूर हुआ, कैसे वह एक सचचा प्यार से बढा हुआ फॅमिली ,एक ही रह गया ज़िन्दगी भर के लिये। हीतेश का नाना नानी अपना पोता हीतेश को खोये। उन लोगों ने एक नया पोता पाने का आशा किया था , आब वह लोग कभी पोता पाएंगे नाहि,पर नन्हि मुन्नी पोती दिआ को पाके ही खुश है। क्यूँ की डॉक्टर साफ़ मना कर दिया हीतेश को ,की अगर वह दूसरा बच्चे के लिए प्रयास करेगा तो उस्का पत्नी यानि की मंजु का जान जा सकता है। पहले पहले हीतेश का प्रॉब्लम होता था नाना नानी को मम्मी पापा बुलाने में। कभी कभी नानाजी, नानीजी मुह से निकल जाता था। पर आज सात साल में सब कुछ परफेक्ट हो गया। जिस तरीके से हीतेश रिस्पांसिबिलिटी लेके ज़िन्दगी बिता रहा है, अपना बीवी , बच्चा का ख्याल रखता है, बूढ़ा साँस ससुर का ध्यान रखता है, और कोई आता इस फॅमिली में तो शायद ऐसा नहीं ही पाता। यह लोग अपने दामाद से बेहद खुश है। और मंजू।।उसको पहले तो सब सपना जैसा लगा था। आब वह एक अच्छी हाउसवाइफ है। बूत यह सब आसानी ने नहीं हुआ कैसे हुआ वह में आप को बतौँगा।

एक एक्स दोस्त के कहने पर में इस सच्ची घटना को कहानी जैसा लिखने का कोशिश किया। आप लोगों का इस कहानी पड़ कर क्या फीलिंग्स होता है, वह जरूर बताइयेगा। मुझे होसला बढ़ेगा.

To be Continued

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Satish Kumar
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माँ बेटे की शादी प्यार और चुदाई | Maa Bete Ki Shadi Pyaar Aur Chudai | Update 2

मै हितेश। बचपन से में अपना नाना नानी और माँ के साथ रह के बड़ा हुआ। फादर न रहने के कारन मेरा नाना नानी कभी कमी नहीं छोड़ि प्यार और सपोर्ट देणे में। माँ हमेशा आपनि ममता और प्यार से मुझे पालन किया। नाना के पास पैसा होने के कारन मुझे कभी कुछ भी चीज़ का कमी मेहसुस करने नहीं दीए। मैं ऐसे ही तेज स्टूडेंट था। इस्स लिए सब लोग मुझे प्यार ही प्यार देते थे। मैं बदमासी भी करता था। पर इतना नहीं जो की बिगडे बच्चे करते है। छोटा मोटा शरारत करता वह अपनी तरीके से माफ़ किया कर देता थे। पर हाँ।।।मुझे हमेशा अच्चा वैल्यूज और मोरालिटी के साथ की पाला वह लोग। बाहर ज़ादा लोगों के साथ मेरा दोस्ती भी नहीं था। नाना नानी और माँ सब मेरा दोस्त भी थे और टीचर भी। डांटते भी थे । फिर सीखाते भी थे। हम चारों एक बॉन्डिंग से बढ रहै थे बचपन से।यही देखते गया। मैंने यह सुना की मेरा पिताजी गुजर जाने के कुछ साल बाद , मेरा नाना नानी मेरा माँ का दोबारा शादी करवा नेके लिए कोसिश किया थे। तब मेरा माँ २३-२४ साल की थी। बहुत सुन्दर देखने में थी। स्लिम और गोरी। लम्बे बाल था । पान का पत्ते जैसा मुह का शेप। उनका आँख , ऑय ब्रोव्स , नाक, होठ सब कोई अर्टिस्ट का बना हुआ लगता है। बारवी क्लास तक पढ़ी है। उसके बाद जिन्दगी में हदसा और बाद में मुझे देख भाल करके बड़ा करने में जुट गई। मेरा और कोई मौसी नहि। सो नाना नानी की वही देख भाल करति थी। घर का काम भी करति थी , फिर मुझे पढाती भी थी और टाइम मिलता तोह वह बड़े बड़े लेखक के नावेल स्टोरी पड़ने में उस्ताद थी। एक बेटी होने के कारन नाना नानी भी उनको घर में रहने का सब बंदोबस्त कर दिया था। उनको भी बुक पड़ने का नशा लग गया बचपन से। बाद में वह एक ही की थी जो वह अपनी खुद के लिए ,अपनी मन की ख़ुशी के लिए करती थी। मेरा नानी भी इतने ओल्ड नहीं थे। पर मेरी माँ मेरे पिताजी का फॅमिली नहीं होने के कारन अपना बेटा लेके नाना नानी के फॅमिली को ही अपना फॅमिली सोच के सब देख भाल करती थी। शायद उस में उनको ख़ुशी मिलति थी और वक़्त भी गुजर ने का तरीका मिला था। वह शांत स्वाभाव की थी पर हसि की बातों से हस्ति भी थी और टीवी में दुःख दर्द भरी फिल्म देखके मायूस भी हो जाति थी। कुछ लोग नाना जी के पास उनको शादी करने के लिए प्रपोजल भी लाया था। पर कुछ मेरा नाना जी।।और बाकि मेरा माँ कैंसिल कर दिया। स्टार्टिंग में नाना नानी माँ से गुस्सा करता था । माँ का भविष्य के लिए वह बोलते थे की सारी ज़िन्दगी पड़ी है तेरी, कैसे गुजारेगि। और यह भी कहते थे की हितेश को भी तो एक बाप पाने का इचछा होता होगा। बाप का प्यार। पर माँ का कहना था की अगर वह किसी को फिर से शादी किया तोह वह आदमी अपना अधिकार दिखाके मुझे त्याग करने को कहेगा और नाना नानी को छोड़ के भी जाने लिए कहेंगा। आब इस सिचुएशन पे वह उनके लिए सम्भब नहीं था वह मुझ से दूर नहीं रह सकति , और नाना नानी को अकेले छोड़के और किसी फॅमिली में जाके अपना गृहस्थी कर सकता थीं। माँ ने मेरा मुह देख के उनका सब सुख ख़ुशी विसर्जन देणे का फैसला किया था। नाना नानी धीरे धीरे उनका बात मान ने लगा , पर अंदर ही अंदर फ्यूचर को लेके परेशान थे।

इसी बीच में बड़ा होते रहा. नाना नानी को में बहुत बहुत प्यार करता था. उन लोगों से दूर नहीं रह पाता में. वह लोग मेरी दुनिया बन चुके थे. सबसे ज़ादा प्यार करता था माँ को. उनका सब कुछ मुझे बहुत अच्चा लगता था. वह जो कहे, जो करे, जो खाना बनाये, जो कपडा ख़रीदे मेरे लिये..सब...सब कुछ मुझे अच्चा लगता था. इतनी अच्छी होने के बाद भी उनको ज़िन्दगी बहुत कुछ दिया नही. फिर कुछ चीज़ देके फिर ले भी लिया. हमारे सब के ख्याल रखा, सब की जिम्मेदारी उठाना मुझे उनके लिए एक अद्भुत प्यार था मन में. मैं कभी उनको दुःख न देणे की कसम खाई थी मन में.

नाना नानी मुझे हमेशा 'तुम' केह्के बुलाते थे माँ भी. लेकिन में नाना नानी को 'आप' केह्के बात करता था. पर माँ को हमेशा 'तुम' ही कहता था. हम सब के बीच एक बॉन्डिंग था. नाना का घर काफी बड़ा था. नाना नानी एक बड़ा सा रूम में रहते थे मैं माँ के साथ रहता था दूसरे एक बड़े कमरे में. घर में और भी तीन रूम है. जो खाली पड़े है. सामान है. पर में जैसे जैसे बड़ा होता गया मेरे लिए एक स्टडी रूम बना. फिर में अकेला सोने लगा. मेरे नाना एक दिन एक रूम साफ़ सफाई करके और एक बेड लगा के वह रूम मेरे नाम कर दिया. मैं बहुत खुश था. आखिर मेरा भी एक आइडेंटिटी बन रहा है. मैं एक इंडिविजुअल भी बन रहा था. यह सोच के अच्चा लगता था.

मैने स्कूल में कुछ दोस्त बनाये थे. धीरे धीरे सेक्स के बारे में जानना, अपोजिट सेक्स के प्रति आकर्षित होना...सब बाकि लड़कों के जैसा फील करने लगता था. उन दोस्तोँ से में मुठ मारने के बारे में जानने लगा. अकेले एक रूम मिलने के कारण में रात को एकदिन मुठ मारना ट्राई किया. पर डर लगा. अगर किसी को पता चला तो. सब कुछ सोचा, फिर भी उस दिन ट्राई किया और अनाडी जैसा करके ख़तम किया. मुझे इतना अच्चा फील नहीं हुआ. पर हा..एक अजीब ख़ुशी के एक फीलिंग्स से मन भर गया था. कुछ दिन बाद फिर किया. पर शेम हालत थी. जब यह बात एक दोस्त ने सुना उसने मुझे एक बुक दिया. करीब एक महिना हो चुका पहला मुठ मारे उस दिन बड़ी डर डर के वह किताब छुपके घर लाया और इंतज़ार करते रहा रात का सब सो जाने के बाद में कुछ नया मेहसुस करने के उत्तेजना में कांप रहा था. हर दिन के तरह माँ सोते टाइम आके दूध का गिलास दिया और बिस्तर ठीक करके मेरे पास आई. मैं टेबल में पड़ रहा था. उन्होंने मेरे सर के बालों में हाथ फिराया प्यार से में उनको देखा और वह मुस्कुराके गुड नाईट बोलके चलि गयी. हर रोज मुझे इस पल बहुत ख़ुशी और माँ के प्रति प्यार अता है. पर आज एक अजीब उत्तेजना मेरे शरीर में था. मैं इंतज़ार कर रहा था कब वह जाये और में रूम लॉक करू. वह जाने के थोड़ा देर बाद में रूम लॉक किया और वह किताब निकाला. किताब खोलतेही मेरा मुह खुला के खुला रह गया. वह एक फोटोज से भरी बुक है. सेक्स करते हुए आदमी और औरत के फोटो. सब फॉरेनर्स है. पेहली बार यह सब देख के इतना उत्तेजित था की जल्दी ही मेरा निकल गया.

ऐसे कुछ दिन चलतारहाऔर अलग अलग किताब मिलता रहा. लेकिन वह इतना रॉ था और एक अद्धभुत दुनिया था की वह चीज़ से मन हट्ने लगा. फिर धीरे धीरे एक अजीब तरीके से मन उत्तेजित होना चालू किया. रस्ते में कोई लड़की देखके या बस में बैठि कोई लड़की के फेस देख के रात में वह सोचता था और मस्टरबैट करता था. ऐसा करने में मन में एक अलग ख़ुशी मेहसुस होता था. जैसे की कोई अपना सहर की लडकि, अपना जैसा अट्मॉस्फेरे में बड़ा हुआ एक लड़की के सरीर सोच के और उसके साथ मिलन के दृस्य कल्पना करके मेरा काम चलता था. सोचता था की एकदिन ऐसेही एक लड़की मेरी बीवी बनेगी और उसके साथ में मन भर के सेक्स करूँगा

यह सब के बाद भी मेरा पढाई में कोई कमी नहीं था. मैं अच्छे रिजल्ट करके आगे बढ़ते रहा. एक रविवार. मैं घर में था. नाना नानी के साथ वक़्त बितारहा था. माँ घर के काम में लगी हुए थी नानी भी माँ को हेल्प कररहे थी. मैं एहि सब देखरहा था सोफ़े में बैठके एक स्पोर्ट्स मैगज़ीन हाथ में लेके. उस दिन क्या पता क्यूं, में अजीब नज़रों से माँ को देखा. शायद यह मेरा इतना महीनों के हरकतों का फल था. पर में जब उनकी गर्दन हिला हिला के नानी से बात करते हुए देखा तब में उनकी कन्धा देखके मन अजीब नशा में बंद होने लगा. फिर उनकी ब्लाउज और साड़ी के बीच के पेट् नज़र आया. मेरा नशा लग गया था. अचानक वह बाथरूम से पैर धोके के निकली. साड़ी थोड़ा ऊपर करके पकडे थे मुझे उनकी हील्स के ऊपर से ऊँगली तक पूरा पैर नज़र आया. सुन्दर गोलगोल हील्स है और सुन्दर उंगलियां. एकदम लाइट कलर के नेल पोलिश लगा हुआ है. मैं उनकी फेस नहीं देखा. बस यह सब देख के नशा हो गया..

उस रात में जब मस्टरबैट किया मुझे खाली वह सब चीज़ नज़र के सामने आया. मैं बहुत टाइम लेके एक अजीब अद्भुत नए फीलिंग्स के साथ किया. ऐसा आज तक नहीं हुआ. मुझे ओर्गास्म के साथ जो सटिस्फैक्शन मिला

वह लाइफ में पहली बार फील हुआ. उस रात एक गहरी नीद आया.

To be Continued

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Satish Kumar
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अचानक वह बाथरूम से पैर धोके के निकली. साड़ी थोड़ा ऊपर करके पकडे थे मुझे उनकी हील्स के ऊपर से ऊँगली तक पूरा पैर नज़र आया. सुन्दर गोलगोल हील्स है और सुन्दर उंगलियां. एकदम लाइट कलर के नेल पोलिश लगा हुआ है. मैं उनकी फेस नहीं देखा. बस यह सब देख के नशा हो गया..

उस रात में जब मस्टरबैट किया मुझे खाली वह सब चीज़ नज़र के सामने आया. मैं बहुत टाइम लेके एक अजीब अद्भुत नए फीलिंग्स के साथ किया. ऐसा आज तक नहीं हुआ. मुझे ओर्गास्म के साथ जो सटिस्फैक्शन मिला

वह लाइफ में पहली बार फील हुआ. उस रात एक गहरी नीद आया.

माँ बेटे की शादी प्यार और चुदाई | Maa Bete Ki Shadi Pyaar Aur Chudai | Update 3

मैने हमेशा एक डिफरेंस देखा. मेरे बाकि दोस्तोँ की माँ और मेरी माँ में बहुत अंतर है. वह सब एक भारी भरकम माँ जैसा होता था, पर मेरी माँ उन लोगों के छोटी बहन या बेटी जैसे लगती थी. एक तो उम्र बहुत कम है. साथ में वह देखने में बहुत सुन्दर थी. उनको रस्ते में जाते हुए देंखे तो कॉलेज की लड़कियों की तरह लगती थी. पर किसको मालूम की उनको मेरे जैसा एक बेटा है और उनकी ज़िन्दगी में एक भयानक हदसा हो चुका है..

उस रात के बाद तीन साल बित चुका है. मैं इंजीनियरिंग में फर्स्ट इयर में एडमिशन ले लिया. मेरे रूम में ब कंप्यूटर आगया है. और मेरा बारवी क्लास का अच्छी रिजल्ट के लिए नानाजी ने मुझे एक छोटा डिजिटल कैमरा गिफ्ट किया है.

येह सब चेंजेस से ज़ादा जो चेंज हुआ वह है में खुद. मेरा नाना नानी और माँ के प्रति मेरा शद्ध भक्ति और प्यार , पहले जैसा है. जो सब लोक देखते है. पर अंदर ही अंदर मेरा माँ के प्रति एक दूसरी तरह का प्यार मन में जनम ले लिया. कब कैसे यह सब हुआ , मुझे भी पता नहीं चला. नाहीं कभी किसी को इस बारे में पता चलेगा. मैं उसको प्यार से मेरे मन के अंदर के कमरे में छुपा के रखा. बीच बीच में वहां से निकाल के अकेले उसके साथ मेरा सबसे अच्छा वक़्त बिताता हू. और फिर से वहां रख देता हू. इस्स प्यार को में बयां नहीं कर पाऊंगा.

उस रात मेरा माँ का कंधा, पेट् का हिस्सा और पैरों को सोच के मुझे जो एक सटिस्फीएड ओर्गास्म मिला था उस के बाद धीरे धीरे मेरे मन में माँ के लिए एक अद्भुत प्यार जागने लगा. नाकि वह केवल सेक्स से सम्बंद्धित है,...वह मेरे मन की ख़ुशी का सबसे बड़ा आधार है.

हां...उस दिन के बाद आज तक में जब भी मस्टरबैट किया, मेरे ख़यालों में सिर्फ वह ही आति है. और कोई कभी एंट्री नहीं ले पाया आज तक्. मैं धीरे धीरे उनको अलग नज़रियाँ से देखना सुरु किया..पर सब का नज़र छुपाके, एवं माँ को भी आज तक पता नहीं चला. वह आज भी हमेशा के तरह सोते टाइम एक गिलास दूध लेके आति है, बिस्तर ठीक करवाके मेरे पास आति है और सर के बाल पे प्यार से उँगलियाँ फ़िराती है. और थोड़ा देर बाद एक प्यारी सी स्माइल के साथ गुड नाईट केह्के चली जाती है. मैं जब उनको सोच के हिलाता हू, तोह मेरे तन्न मन एक नशे में भर जाता है और मुझे सब से ज़ादा संतुस्टि मिलति है.

मा हमेशा लाइट कलर नेल पोलिश पसंद करति है. जब भी वह किसीके घर शादी या और कोई प्रोग्राम में जाती थी तोह उन्होंने हल्का सा मेकअप लगा लेती थी. हलका लिपस्टिक उनके होठो को और भी खूबसूरत बना देती थी. मेरे साथ मेरी बड़ी दीदी जैसा लगता थी. और नाना नानी के साथ लगता ही नहीं था की वह उनका बेटी और में पोता हु.

कुछ दिन पहले तक में मेरी माँ का हर पिक्चर अपनी ऑखों से कैद करता था. उनकी तस्वीरें केवल मेरी आँख से ही खीचता था, उनकी जाने अन्जाने में तोंर तरीके की तस्वीर मेरे दिमाग में सेट कर लेता था. पर मुझे कैमरा मिलने के बाद में उस से फोटो खीचता हू. सब का पिक्स लेता हूण. नाना नानी का बहुत पिक्स लेता हूं..अन्य टाइम ..फिर अन्य तरीके से.... साथ में माँ का भी....डीजीटल कैमेरा होने के कारन कभी कभी माँ के अन्जाने में उनका बहुत फोटो खिचा. मैं सब फोटो पी. सी में रखा है. पर स्पेशल मेरे माँ का सब फोटो में एक सीक्रेट फोल्डर बनाके छुपाके रखा है. जो केवल मेरे लिए ही है. उस फोल्डर में माँ का हर तरीके का फोटोज है. हस्ते हुये, घुस्सेके टाइम, उदासी के फोटोस, प्यार भरी झुकि हुई नज़र का पिक्स, बाते करते वक़्त का पिक्स, काम करते वक़्त का फोटो, मेरे साथ पिक्स है जो नानाजी क्लिक किया. और बाकि कुछ जॉइंट फोटो से केवल माँ का पिक्चर काट के अलग कर लिया. ऐसा भरा हुआ है मेरा पिसी माँ का फोटोज से. अब में हर रात जब माँ दूध का गिलास देके चले जाते है और सब सो जाते है, में वह फोल्डर खोल के माँ को देखता हूण. उनका हर अदा गौर से देखता हूण. और एक सपने में डुब जाता हूण. माँ के लिए प्यार उभर के आने लगता है. तब में आहिस्ता से पैंट का ज़िप निकाल के अपना पेनिस निकाल ता हूण. वह अब और भी बड़ा होने लगता है. मेरा मुठ्ठी भी कम पडता है. अपनी पाँच उँगलियाँ से उसको टाइट पकडता हूँ और माँ के साथ मिलन का प्यारी दृस्य कल्पना करके धीरे धीरे हिलाने लगता हूण. अब पहले जैसा अनाडी के तरह नहीं करता हूण. अपना सुख पाने के लिए खुद ही सिख गया कैसे संतुस्टि मिलती है. मेरा पेनिस बहुत मोटा है. और उसका अगली पोरशन सबसे ज़ादा मोटा और राउंड शेप का है. सामने का पोरशन फ्लैट है. मेरे देखे हुये बाकि पेनिस की पिक्टुरेस जैसा अगला भाग पतला होक पॉइंटेड टाइप नहि. थोड़ा सा डम्बल के किनारे जैसा है. लम्बाई नार्मल है. जब ओर्गास्म होता है तब वह अगले भाग का कैप और फूल जाता है और मुठ्ठी के अंदर आने में अटक जाता है. पर में ओर्गास्म के टाइम अंख बंध करके माँके सरीर के अंदर मेरा सीमेन छोड़ने का सुख प्राप्त करता हूण
मेरा दोस्त जब हीतेश को पुछा था की वह इंटरनेट सेक्स में एडिक्ट हुआ था क्या कभी? उस ने बताया की उस को कभी वहां जाने की जरुरत नहीं पडी. वह अपना खुद का क्रिएट किया हुआ एक दुनिया बना के उस में ही संतुस्टि प्राप्त करता था. और क्या चाहिए इस के अलावा... पर हाँ हीतेश ने यह बताया था की जब वह अपना जॉब ज्वाइन किया और उसका शादी तय हो गया, तब शादी का डेट से पहले जितना दिन मिला था , वह सब दिन वह नेट से कुछ सेक्स एजुकेशन लिया था...क्यों लिया था... इस बारे में में टाइम होने पर बताऊंगा.

अब कहानी में आता हूँ हीतेश की जुबानी में। इसी तरह लाइफ चलति रही। और में इंजीनियरिंग की लास्ट सेमेस्टर में पहुच गया। मेरा रिजल्ट अच्चा हो रहा था। पढाई में में कोई ढील नहीं दि। जब नाना नानी और माँ मेरा इतना ख्याल रखते है, इतना प्यार देते है, तोह में क्यों न उन लोगों को खुश होने का मौका न दू !! मेरी पढाई से सब खुश थे। मैं भी नार्मल लड़का ही था। देखने में भी ठीक ठाक था और शरीर का स्ट्रक्चर भी अच्चा था। पढाई का प्रेशर और रात का फैंटसी सेक्स वर्ल्ड के कारन में बाकि स्टूडेंट से थोड़ा मेचुरड लगता था। एकबार में माँ के साथ घर का कुछ शॉपिंग में माँ को हेल्प करने के लिए उनके साथ एक सुपर मार्किट गया था । वहाँ मेरा एक क्लास मैट मेरी माँ को मेरा बेहन समझ के बात कर रहा था। जब उस्को बताया की यह मेरी माँ है, तोह उसके मुह की हालत क्या हुआ था , आज भी मुझे याद है। मेरा अच्चा ख़ासा एक मेनली अपीयरेंस के कारण कॉलेज में कुछ लड़की क्लास मैट मेरे साथ क्लोज होने की कोशिश करती थी। मैं कभी भी।।आज तक किसीके उप्पर वीक नहीं हुआ , फ्लिर्टिंग भी करता नहीं था। वह लोग दो चार दिन में समझ जाति थी और मेरे से दूर होने लगती थी। मुझे अपनि माँ छोड़के कोई भी अच्छी नहीं लगती थी। इस्स लिए शायद में अपनि माँ के ही प्यार में पडा। वह ख़ुशी की खबर मेरे दूसरे कान तक भी नहीं पहुँची कभी भी। मन्न की बात मन में ही रहती थी।

मुझे यह भी मालूम था की मुझे एक दिन ऐसे ही एक दूसरी कोई लड़की से शादी करनी पडेगी। नाना नानी का एक मात्र पोता और माँ का एक बेटा होने के कारन मुझे मालूम था, में मन में जो भी सोच के रोज खुश क्यों न हु, मुझे एकदिन एक लड़की को चुनना पड़ेगा मेरी बीवी बनाने के लिये। तब मुझे एक डर भी आता था। क्यूँ की में जानता था मेरा पेनिस और बाकि सब के जैसा नहि। यह बहुत मोटा और आगे का कैप बहुत बड़ा राउंड शेप का है। फिर स्कलन के टाइम तो वह कैप फूल के और भी बड़ा हो जाता है। मैं कैसे अपने बीवी के साथ सेक्स करूँगा। यह सोच के में कभी कभी मायुस हो जाता था। अगर वह लड़की मेरा पेनिस अपनी पुसी में न ले पाया तो!!! अगर मेरा पेनिस ठीक से अंदर कम्फर्टेबली एडजस्ट ना हुआ तो!! अगर वह दर्द से मुझेसे दूर रहा तो!! कैसे होगा पति पत्नी का मिलन!! कैसे मेरे फॅमिली की अगली पीडी पैदा होगी!! तब किसको बताएँगे यह सब प्रॉब्लम का बात!! कौन समझेंगे !!! यह सब सोच के डर लगता था। लेकिन आज २७ साल के उम्र में एक एक बात महसुस हुआ। पति -पत्नी के मिलान से जो सुख मुझे और मेरी बीवी को मिलता है , बहुत कम सौभ्ग्य्वान है , जिस को वैसा सुख प्राप्त होता होगा।

To be Continued

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अगर वह लड़की मेरा पेनिस अपनी पुसी में न ले पाया तो!!! अगर मेरा पेनिस ठीक से अंदर कम्फर्टेबली एडजस्ट ना हुआ तो!! अगर वह दर्द से मुझेसे दूर रहा तो!! कैसे होगा पति पत्नी का मिलन!! कैसे मेरे फॅमिली की अगली पीडी पैदा होगी!! तब किसको बताएँगे यह सब प्रॉब्लम का बात!! कौन समझेंगे !!! यह सब सोच के डर लगता था। लेकिन आज २७ साल के उम्र में एक एक बात महसुस हुआ। पति -पत्नी के मिलान से जो सुख मुझे और मेरी बीवी को मिलता है , बहुत कम सौभ्ग्य्वान है , जिस को वैसा सुख प्राप्त होता होगा।

माँ बेटे की शादी प्यार और चुदाई | Maa Bete Ki Shadi Pyaar Aur Chudai | Update 4

मेरे फाइनल एग्जाम से पहले मुझे काम्पुसिंग में ही जॉब मिल गया। एम पी में। एक बहुत बड़ा इंजिनेअरिंग कंस्ट्रक्शन कम्पनी। भारत की पुरानी कंपनी में से एक है।

उस दिन घर में जब यह न्यूज़ दिया , तोह सब ख़ुशी से झूम उठे। इस्स लिए नहीं की मुझे सैलरी मिलेगी, वह लोग खुश था इस लिए की एक लडका, जिसका बाप बचपन में चल बसा, उसको उसके नाना नानी और माँ पालके एक इंडिपेंडेंट आदमी बना दिया। अब लगता है की वह लोगों का ड्यूटी ख़तम हो गया। नाना का पैर छुआ तो वह मुझे गले लगा लिया। नानी का पैर छुए तो वह मेरा सर पकड़ के सर पे हाथ रख के अशीर्वाद देणे लगी। नाना नानी बहुत भावूक बन चुके थे। ख़ुशी से आँख नम्म होक छल छल करने लगी। और दोनों बहुत सारी बाते करे जा रहे थे। माँ एक साइड में खड़ी होके यह सब देख रही थी। जब में माँ के पास गया, माँ कुछ बोली नहि। लेकिन उनके आँखों में में जो प्यार और ख़ुशी देखि, वह उनके पास बरक़रार रखने के लिए में ख़ुशी से जान भी दे सकता हू। मैं उनका पैर छुए तो वह मुझे पकड के गले मिलने गई पर में ५'११'' का था , वह ५' ५'' कि, तोह उनका सर मेरे गले के पास कंधे में टिक गया। वह मुझे पकड़ के रखि कुछ मोमेन्ट्स। फिर छोड़ के मेरे दोनों गाल को दोनों हाथ से पकड के, आँखों में बहुत सारा प्यार लेके और होठो में ख़ुशी का स्माइल लेके मुझे देखा । फिर मुझे नाना बुलाये तो में उनके पास गया। माँ और नानी किचन में चलि गयी मेरे लिए खीर बनाने के लिये। यह एक चीज़ हमारे घर में होता था। जब भी कुछ ख़ुशी की बात होती थी तो घर में खीर बनती थी। मैं खीर बहुत पसंद करता हू। आज भी मेरे घर में खीर की परंपरा जारी है। मेरी बेटी भी खीर की भक्त है।

उस रात सब सोने के बाद जब में माँ का तस्वीर खोलके माँ को देख रहा थ, मुझे शाम का याद आया। माँ मेरे गाल पकड़ के मेरी तरफ एक प्यार भरी आँखों से जो नज़र दिया था, वह इनोसेंस से मेरा प्यार और बढ गया। मैं उन में खो गया और मुझमे मधहोसी छ गई। मैं झुक के कॉम्प स्क्रीन में खुला हुआ माँ का एक बिग क्लोज अप पिक्चर के पास गया। और आँख बंध करके धीरे धीरे उनकी लिप्स के साथ मेरा लिप्स मिलवाया। मेरा बदन में करंट सा खेल गया। पूरा बदनकाँपने लगा। मैं झट से ज़िप खोलके अपना पेनिस को पक़डा। आज मेरा पेनिस एक दम फूल कर, खड़ा होके, फुल रहा था। मैं फुली हुई पेनिस को पकड़के ज़ोर ज़ोर से झटका देणे लगा। और लिप्स में फिर से किस करने लगा। जल्दी ही ओर्गास्म के तरफ पहुच गया। मैं सीधा होके बैठ के फुल स्पीड से हिलाने लगा। मेरा पूरे बॉडी से निचोड के सब सीमेन पेनिस की नली भर के तेजी से बाहर की तरफ आने लगा। मैं आँख बंध किया । ओर्गास्म चरम सीमा में पहुच गया। जस्ट मेरा सीमेन निकल ने से पहले मेरा मुह खुल गया , हवा लेने के लिए में मुह ऊपर के तरफ किया और मेरा मुह से निकल ने लगा ''मंजू आई लव यू'' और पेनिस से सीमेन छिटक छिटक के गिरने लगा।

तीन महिना भी कट गया। इसी बीच मेरा फाइनल एग्जाम का रिजल्ट भी आगया। और मेरा जॉब ज्वाइन करने का टाइम भी आगया।

पहली बार में घर से दूर जाके रहने वाला हू। आज तक कभी नाना नानी और माँ को छोड़ के कहीं रहा नहि। एक दो बार स्कूल कॉलेज का ट्रिप में जाके दो चार दिन बाहर रात बिताया। पर वह रहना और अब बाहर अकेला रहने में बहुत ही अंतर है। लेकिन मुझे डर नहीं लगा। एक अलग चैलेंज जैसा मेरे सामने खड़ा हो गया। और में उस चैलेंज को मुकाबिला करने के लिए तैयार हूँ मेंटली। पर एक दुःख मुझे खाये जा रहा है।।।की मुझे मेरी माँ को बिना देख के वहां रहना पडेगा। नानाजी का स्ट्रिक्ट इंस्ट्रक्शन है की हर सैटरडे वापस आना पड़ेगा और फिर मंडे जाके ऑफिस ज्वाइन करना है। लेकिन बीच का ६ दिन मेरे पास ६ साल लगने लगा। जब माँ हर रात सोने से पहले मेरे पास आके मेरे बाल में उँगलियाँ फिराती है, और मेरे तरफ प्यार भरी नज़र से देख के स्माइल करती है-वह पल के लिए में कितना बेताब रहता था रोज। पर अब वह चीज़ से मुझे दूर रहना पडेगा। माँ ऐसे बोलती कम। बस देखती ऐसे है की जैसे आँखों में ही सब को कुछ बोल देती है। और अब मेरा जाने का वक़्त नज़्दीक आने में तो वह और भी चुप हो गई। बस नानीजी को किचन में हेल्प कर रही है, घर का बाकि काम कर रही है, टीवी देख रही है, मेरा जाने के लिए सब ज़रूरी चीज़ों को रेडी करके मेरे रूम में रख रही है। पर कभी कभी मायुस नज़र से मुझे एक पल देख के फिर चले जाती है। उनको भी तकलीफ हो रहा है होंगा। वह भी मेरे बगैर कभी रहा नहि। मेरे लिए ही उन्होंने ज़िन्दगी का सब सुख सब खुशियां विसर्जन कीया था। अब वह सोच के में भी मायुस होता हू।

पिछले ६ साल से में उनसे और एक दूसरे प्यार से अटैच हुआ हू जो खबर केवल मेरा मन ही जानता. और कभी कोई जान भी नहीं पायेगा. उनके प्यार मे में कब से मेरे अंदर एक अलग आदमी को जनम दे दिया है. जो आदमी माँ से प्यार करता है. उनके साथ एक अलग दुनिया में ही जीता है. लेकिन उसको भी मालूम है की यह मन की बात केवल मन में ही रहेगी पूरी ज़िंदगी.

ओर पिछला ६ साल से में अपनी ही माँ को सोच सोच के रोज रात में मस्टरबैट करते आ रहा हू उसमे मुझे दुनियाका सबसे ज़ादा ख़ुशी , और संतुष्टि मिलती है.

देखते देखते वह दिन भी आगया जिस दिन में कंपनी जाने के लिए. ट्रैन स्टेशन पे खड़ा है माँ, नानाजी, नानीजी सब आये है. कंपनी मुझे वहां रहने के लिए फिलहाल एक जगह प्रोवाइड कर रहा है. ज्वाइन करने के बाद में धीरे धीरे अपना रहने का बंदोबस्त खुद की करूंगा. इस्स लिए नानाजी मेरे साथ चल रहे है. नानीजी बार बार नानाजी को क्या क्या करना है वह याद दिला रही है. मुझे वहां में कोई तकलीफ न हो, इस लिए सब बंदोबस्त सही तरीके से करने के लिए उनको बार बार सब चीज़ों को एक एक करके बता रही है. लास्ट मोमेंट्स में सब को सब चीज़ बतानेका यह एक तरीका में बचपन से सब के अंदर देख ते रहा हू घर में भी यह सब डिस्कस हो चुका है. माँ मेरे पास मेरे सीट पे बैठ के मेरा एक एक हाथ उनकी दोनों हाथ के अंदर लेके चुप चाप बैठि है और नाना नानी का बाते सुन रही है. एक बार माँ मेरे तरफ देखी. उनकि आंखे गिली है. मन में कष्ट हो रहा है उनको . वह उस फीलिंग्स को दबा के रखा है सब के सामने. मुझे मालूम है माँ घर जाके रूम लॉक करके बहुत रोयेगी. मैं इतने सालों से उनको थोड़ा बहुत जानता तोह था. उनकी हर हरकत, हर अदा का क्या मीनिंग है वह में साफ समझ सकता था मैं उन्हें कभी दुःख पहुचाया नही, नाहीं की कभी दुःख दूंगा. यह मेरा खुद के साथ खुद का वादा है. मैं भी माँ को देख. उनका इनोसेंस फेस और नज़रियाँ मुझे हमेशा से अजीब फीलिंग्स देता है. वह मुझ से धीरे से बोली ' तुम मुझे रोज फ़ोन करना'. मैं स्माइल करके धीरे से गर्दन हिलाया हाँ में. उधऱ नानाजी नानाजी को सब समझा रहा है अभी भी. मेरा नाना हमेशा नानी से बेहद प्यार करते है. इस्स लिए उनका ज़ादा बोलना उनको कभी इर्रिटेट किया नही. वह खुद नानीजी से कम ही बोलते है. मेरी माँ शायद उनपे ही गई. इस्स लिए माँ नानाजी से भी कम बोलती है. सुनते और समझते ज्यादा. अचानक ट्रैन में एक झटका खाया. टाइम हो चुका है. अभी चलेगी. इस्स लिए सब उतरने लगे. नानीजी मेरा सर पकड़ के मेरा सर चूमा और उतरने लगी. माँ मेरा हाथ जो उनके हाथों से पकड़ा हुआ था वह मुह के सामने लाक़े मेरा हाथ चुमा. और मेरा गाल पे उनका दाया हात रख के एक बार फिराया और गिली आँखों से स्माइल किया. इस्स का मतलब मुझे मालूम है. मुझे ठीक से रहने का, ठीक टाइम पे खाने का, सोने का, ठीक से काम करने का, अपना ख्याल रखने का ..यह सब बाते वह बिना कुछ बोले मुझे समझा के गयी. . वह लोग बाहर जाके खिड़की के पास खड़ी हो गयी. और ट्रैन चल्ने लगी. नानी और माँ धिरे धिरे दूर होने लगी. ऐसा लगा की मेरा कुछ यहाँ रह गया और में कहीं चल पडा. क्या रह गया वह कह नहीं सकता. मेरा मन भारी हो गया. और ट्रैन रफ़्तार पकड़ने लगी.

To be Continued

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Satish Kumar
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नानीजी मेरा सर पकड़ के मेरा सर चूमा और उतरने लगी. माँ मेरा हाथ जो उनके हाथों से पकड़ा हुआ था वह मुह के सामने लाक़े मेरा हाथ चुमा. और मेरा गाल पे उनका दाया हात रख के एक बार फिराया और गिली आँखों से स्माइल किया. इस्स का मतलब मुझे मालूम है. मुझे ठीक से रहने का, ठीक टाइम पे खाने का, सोने का, ठीक से काम करने का, अपना ख्याल रखने का ..यह सब बाते वह बिना कुछ बोले मुझे समझा के गयी. . वह लोग बाहर जाके खिड़की के पास खड़ी हो गयी. और ट्रैन चल्ने लगी. नानी और माँ धिरे धिरे दूर होने लगी. ऐसा लगा की मेरा कुछ यहाँ रह गया और में कहीं चल पडा. क्या रह गया वह कह नहीं सकता. मेरा मन भारी हो गया. और ट्रैन रफ़्तार पकड़ने लगी.

माँ बेटे की शादी प्यार और चुदाई | Maa Bete Ki Shadi Pyaar Aur Chudai | Update 5

ओफिस में पहला दिन थोड़ा डर लग रहा था सब बड़े बड़े इंजिनिअर्स और ऑफिसर्स के साथ परिचय हुआ. सब के बीच मुझे नेर्वेस फील हुआ. सब मेरा हालत समझ गये थे इस्स लिए वह लोग मेरे साथ ऐसा कम्फर्टेबले तरीके से मिल घुलने लगा की एक ही दिन में मुझे इनिशियल हेसिताशन और डर भूलके कॉन्फिडेंस आने लगा. लेकिन एक बात है.. कोई बिस्वास नहीं कर रहा था की में २० साल का था और जस्ट कॉलेज से पास आउट हुआ. मुझे देख के इतना मचुर्ड समज रहे थे, जब में असलियत बताया तब सब हास्के मुझे गले लगाने लगे. मैं गुजरात से हू पर वह लोग मेरी अच्छी हिंदी सुनके मेरी तारीफ भी करने लगे.

इधर नानाजी मैं ऑफिस निकल जाते ही वह भी निकल गये. मेरा रहने के लिए अच्छा बंदोबस्त ढूँढ़ने के लिये. शाम को दोनों एक साथ घर वापस आये..यानी की जहाँ कंपनी हमें रहने के लिए रूम दिया था नानाजी मेरा ऑफिस का पहला दिन का एक्सपीरियंस सुने. मुझे भी उनका दिन भर का करनामे का वर्णन किया. रात को खाना खाके हम सोने गये. एक रूम था अच्छा है. पर एक ही बेड़. इस्स लिए नानाजी और मुझे एक साथ सोना पड़ेगा. नानाजी दिन भर इधर उधर भटके ,मेरे रहने के लिए घर ढूँढ़ते बिजी रहे, तोह वह भी थोड़ा थके थे. इस्स लिए वह जल्दी सो गये. थोड़ी देर में उनकी गहरी नींद की आवाज़ नाक से निकल ने लगी.

पर कल से में थोड़ा व्याकुल था कल भी रात को सोने का यहि इन्तज़ाम था इस्स लिए मुझे मेरा पिछला ६ साल का आदत से छूट ना पड़ा. अभी तक पीसी का इन्तेज़ाम नहीं किया. नया घर मिलतेही सब कुछ कनेक्ट करुन्गा. पर मेरे मन में मेरा हर वक़्त का ख़ुशी का मूर्ति , हमेशा के लिए जल जल कर रही थी. आँख बंध करते ही वह पूरा तन्न मन में छा जाती थी. पर कुछ कर नहीं सकते क्यों की में बाथरूम में जाके वह सब करके मज़ा पाया नहीं कभी. मुझे तो मेरा कम्फर्टेबल प्लेस चाहिए होता है. उप्पर से रोज की तरह माँ की उंगलिया फ़िरने का सुख और प्यार भरी नज़रों से स्वीट स्माइल बहुत मिस किया. आज भी वही शामे हाल है. मैं चेयर पे बैठ के आँख बंध कर के मेरी प्यारी माँ को याद कर रहा था, अचानक याद आया की माँ मुझे रोज फ़ोन करने के लिए कही थी. कल तोह पहली रात थी स्टेशन से आके सब कुछ समेट्ने में देर रात हो चुका था , ऊपर से आज ऑफिस ज्वाइन करना था इस्स लिए कॉल करना भूल गया. अब याद आया. मैं झट से चेयर छोड़ के उठा और मेरा मोबाइल उठाया. आब रात ११ बज चुके है. माँ इस टाइम में सो जाते है हमारे घर में. फिर भी में एकबार ट्राय करने के लिए सोचा. नानाजी को प्रॉब्लम न हो इस लिए रूम का दरवाजा खोल के बाहर बालकनी में आया. मा को फ़ोन लगाया. एक बार रिंग होते ही वह फ़ोन उठा ली. मेरा दिमाग में फ्रैक्शन ऑफ़ सेकंड में यह खेल गया की माँ जरूर मेरा फ़ोन का इंतज़ार में बैठि थी. इस्स लिए इतनी जल्दी रिसीव करली और इतनी रात को भी जागी हुई है. माँ रिसीव करतेहि मैंने बोला

'' हल्लो...मा...''.

मा के तरफ से कुछ रिप्लाई नहीं आई. मैं फिर से बोला

'' मा...कैसी हो तुम्"

फिर से सन्नाता. मैं भी चुप होकर समझने की कोशिश कर रहा था की आखिर हुआ क्या. मैं फिर बोला

'' क्या हुआ मा...तुम ठीक तो होना?'' मेरा आवाज़ में चिंता थी अब माँ थोड़ी देर बाद बोली

" कल तुम फ़ोन क्यों नहीं किये?"

मा की आवाज़ में न जाने क्या था जो मेरे कान में आते ही मेरा पूरा बदन एक अनजानी फीलिंग्स से कांप उठा. दिल की धड़कन तेज हो गई. मुझे यह भी तसल्ली मिली की वह सही सलामत है. मैं खुद को सम्हलकर जबाब दिया

" सॉरी माँ..कल सब कुछ करते करते बहुत रात हो गया था और आज ऑफिस में पहला दिन......"

मेरी बात ख़तम होने से पहले ही उन्होंने मुझे रोक दिया और बोल ने लगी

" बस बेटा...इतनी सफाई की जरुरत नही"

फिर थोड़ा रुक के बोलने लगी

"मैं कल पापा को फ़ोन किआ था"

मैं सोचने लगा , माँ नानाजी को कब फोन किया. शायद में जब रात को बाहर खाना खरीदने गया था , तभी किया होगा. फिर मेरा दिमाग में यह स्ट्राइक किया की माँ को मेरा मोबाइल नम्बर मालूम है. तोह मुझे क्यों नहीं किया. हाँ...उनका एक ही बेटा हू उनसे दूर गया. तो मेरी खबर तो वह लेंगी ही किसी भी तरीके से. लेकिन मुझे क्यों नहीं किया. तभी माँ बोली
चलो यह बताओ ..वहा तुम्हे कुछ प्रॉब्लम तो नहीं हो रहा है ना?

"नही मा...नानाजी साथ में है ना.. . तुम तोह उनको जानती हो. सब वही देख रहे है लेकिन में यह बता नहीं सकता की माँ तुम से दूर रहके मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लग रहा है."

तभी माँ बोली

" और आज पहला दिन ऑफिस में कैसा रहा..?"

" ठीक था मा. सब मुझे अच्छे से बात किया. और मेरा जो बॉस है मुझे अपना कोई पुराण पहचान वाला जैसा मेरे से बात किया. सब बहुत अच्छे लोग है. लेकिन...."

मैन चुप हो गया तो माँ ने पूचि

"लेकिन क्या?"

"सब मुझे देख के मेरी उम्र ज़ादा सोच रहे थे. पर मेरी सही उम्र जान के सब हस पडे." ऐसी बहुत सारी बाते माँ से होती रही.

माँ मुझ से बात करके खुश थी स्टार्टिंग में वह जैसे अभिमान लेके बात शुरू की थी , वह अंत में जाके एक प्यारी माँ आपने बेटे के लिए ढेर सारा प्यार उड़ेल कर मुझे भी एक सुकून सा दिया. मैं पता करने लगा की माँ से दूर रह के भी इस फ़ोन कन्वर्सेशन के जरिये उनको मेरे पास महसूस कर सकता हू अंत में माँ ने गुड नाईट बोलके फ़ोन काट दिया. मैं कभी माँ से बत्तमीज़ जैसा पेश नहीं हुआ, ना की माँ के साथ कभी लूसे टॉक किया, नाहीं कभी उनको ज़बर्दस्ती पकड़के हुग किया या गाल चुमके एक बेटा का प्यार दिखाया. मेरा परवरिष ही ऐसा था हमारे घर में हम सब के बीच गहरा प्यार बंधन है , साथ में सब सब को रेस्पेक्ट देते है. रेस्पेक्टफुल्ली पेश होते है. मेरे मन में माँ के लिए पिछला ६ साल से एक अजीब अद्भुत फीलिंग ग्रो किया, पर में कभी उनसे सेक्स लेके, या डबल मीनिंग बात लेके, या बिना कारन में उनको हुग करना या उनका टच पाने का कोशिश करना....यह सब कभी नहीं किया. नाही कभी करने का मन हुआ. हा...में उनसे प्यार करता हू रेस्पेक्ट भी करता हू पर वह प्यार में भाषा में बयां नहीं कर पाऊंगा. जो इंसान वह फील करता है, केवल वह उसको समझ सकता है.

To be Continued

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