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[Completed] चुत श्रृंगार | Choot Shringar

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Sexy Emma
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“कौन चोदता है उसको?”

“अरे मेमसाब, कौन चोदेगा उस बुढ़िया को? मेरा बाप ही चोदता है।”

“तेरी बहन भी देखती है, जब तेरी माँ चुदती है?”

“क्या मालूम मेमसाब सोती है कि देखती है। वैसे देखती जरूर होगी। जब कोई कमरे में चिल्ला-चिल्ला कर चुदे, तो नींद किसको आता होगा। जरूर देखी होंगी। मैं तो रोज नाइट शो देखता हूँ।”

“तेरा दिल नहीं करता चोदने को, जब तू माँ को चुदते देखता है?”

“अरे मेमसाब अपना अपना 4-4 गर्ल फ्रैंड है। अपन उनकी चूत ठोकता है।”

“तेरी बहन भी चुदती है?”

“चुदती होंयगी, क्या मालूम?

चुत श्रृंगार | Choot Shringar | Update 6

“तेरी बहन भी चुदती है?”

“चुदती होंयेगी क्या मालूम? चुदे बिना कौन लड़की रहती है, जरूर चुदती होगी। बड़ी वाली का तो मुझे पक्का पता है, वो तो पक्का चुदती है।”

“तुझे कैसे पता?”

“अरे मेमसाब अपन ही तो उसके लिए कस्टमर ले कर आया था एक बार।”

“क्या धन्धा करती है?”

“नहीं मेमसाब, बस एक बार किया था अपन को पैसे की जरूरत थी।”

“ओह ! तो क्या तुम भी चोदने के पैसे लेते हो?”

“क्या बात करता है मेमसाब, मर्द को कौन पैसे देता है।”

“मैं पैसे दूँ, तो मुझे चोदेगा?”

“क्या मेमसाब आप तो मस्त चीज हो आपको चुदना है, तो बोलो कस्टमर की लाइन लगा दूँगा। अपना कमीशन 10 टका।”

“चल चल बकवास बंद कर और काम कर।”

उसको काम पर लगा कर मैंने ब्रा उतारी और छोटे बच्चे को अपने मम्मे चुसवा कर दूध पिलाने लगी। मम्मे चूसते-चूसते छोटा तो सो गया। मुझे आज उससे चुसवाने में उतना मजा नहीं आया। शायद भाई से चुसवाने के बाद अब मुझे उसकी जरूरत नहीं थी। मैं तो बाई के बड़े बेटे की बातें सुन के हैरान हो रही थी। मैं भी 18 साल की थी, जब पहली बार चुदी थी, पर ये तो भाई तौबा-तौबा।

काम खत्म कर के वो बोला- मैं जा रहा हूँ।

मैंने कहा- रूक, क्या नाम है तेरा?

उसने कहा- किस्सना।

मैंने कहा- तेरा नाम किस्स–ना क्यों है? क्या तू किस्स नहीं कर सकता?

वो मेरे मजाक को समझ नहीं पाया।

मैंने कहा- तेरी माँ ने तो कहा था, वो तुझे लेने आएगी।

उसने कहा- मुझे नहीं, इस छोटे को।

मैंने कहा- रुक जा माँ के आने तक।

“क्या करूँ रुक के? कोई काम तो है नहीं।”

“है ना, आ मेरी मालिश कर दे।”

“ठीक है। तेल कहाँ पड़ा है?”

“तेल नहीं क्रीम से कर। वो पड़ी है, वहाँ अलमारी में।”

वो क्रीम उठा कर लाया और मैंने क्रीम अपने मम्मों पर लगा कर कहा- ले मालिश कर, यहाँ मम्मों की।

“इसके लिए तो तुम्हारे पीछे से आना पड़ेगा और मेरे सारे कपड़े सन जाएंगे।”

“तो आ ना पीछे से और अपने कपड़े उतार ले।”

उसने कमीज पजामा दोनों उतार लिए नीचे कुछ भी नहीं था। लंड लटकाए बो बिल्कुल नंगा बिस्तर पर चढ़ गया और मेरी कमर से अपनी छाती सटा कर मेरे मम्मों की मालिश करने लगा। वो एक मम्मे को दोनों हाथों से पकड़ता और क्रीम से उसका हाथ फिसल जाता वो और जोर से मम्मा दबा के मसलता हाथ फिर फिसल जाता।

थोड़ी देर में मम्मों ने सारा क्रीम चूस लिया। मम्मे चमकने लगे और हाथ भी मम्मों पर अच्छी तरह से दबाने लगा। मुझे मजा आने लगा और वो भी मजे लेकर दबा रहा था। उसका लंड खड़ा होने लगा और खड़ा लंड मेरी कमर से टकराने लगा।

जैसे ही वो मम्मा दबा कर मम्मा आगे की ओर खींचता, उसका लंड मेरी कमर में धक्का मारता।

मम्मे खूब दबाने के बाद जब उसका लंड बहुत तन कर खड़ा हो गया तो वो बिस्तर से उतर कर बोला- अब मैं चलूँ?

उसका लंड देख कर मैं हैरान थी। इस उमर में इतना मोटा और इतना तनाव। मैंने लंड की और इशारा कर के कहा- इसका क्या करेगा?

वो बोला- मुट्ठ मारूँगा। यहीं मार लूँ?

मैंने कहा- कर ले, मुझे क्या?

और वो मुट्ठ मारने लगा। मैंने थोड़ी देर उसे देखा फिर मैं उठ कर जाने लगी तो बोला- बैठी रहो, मुझे लड़की देख कर मुट्ठ मारने की आदत है।

मैं बैठ गई। मैंने पूछा- घर में किसको देख कर मुट्ठ मारता है?

वो बोला- बहन को।

मैंने उसे गले से लगा लिया। कोई तो मेरे जैसा है। वो मुट्ठ मारता रहा और मैं सैक्स की बातें करती रही जिससे उसे और मजा आ रहा था। कई बातें जो वो पहले छुपा रहा था अब खुल कर बोला।

मैंने पूछा- घर में कब मुट्ठ मारता है?

“जब माँ चुदती है।”

“उस वक्त बहन के मम्मे कैसे देखता है?”

“बहन भी माँ की चुदाई देख कर कमीज उठा कर मम्मे दबा रही होती है।”

“वो तुझे अपने मम्मे दिखा देती है?”

“हाँ।”

“उसे पता है तू उसके मम्मे देख रहा है?”

“हाँ।”

“तूने उसे अपना लंड दिखाया?”

“मुट्ठ मारता हूँ, तो वो देख रही होती है।”

“तूने कभी उस के मम्मे दबाए?”

“हाँ, अभी तेरे मम्मे दबा लूँ? मुट्ठ मारने में बड़ा मजा आएगा।”

“दबा ले, चूस ले।”

मैं भी बड़ी उत्तेजित हो गई। मैंने उसका लंड पकड़ लिया और उसने दोनों हाथों से मेरे मम्मे पकड़ लिए। वो मेरे मम्मे दबा रहा था और मैं उसकी मुट्ठ मार रही थी। क्रीम बाले हाथों से लंड रगड़-रगड़ कर चमकने लगा।

उसके चमकते हुए लंड को देख कर मैं बिल्कुल भूल गई कि वो नौकरानी का बेटा है और मैंने उसका लड़ मुँह में ले लिया और मजे से चूसने लगी।

मुझे लंड चूसता देख उसने मेरा मुँह अपने दोनों हाथों में थाम लिया और लंड के ऊपर ऐसे घुमाने लगा, जैसे ये मुँह नहीं चूत हो और वो चूत मार रहा हो।

फिर मुँह में से लंड निकाल कर जोर-जोर से मेरा मुँह चूमने लगा और लम्बी साँसें खींच कर बोलने लगा, “हाय मेरी डार्लिंग! मेरे लंड की रानी ! मेरा लंड चूस ले !”

वो मेरे मम्मे दबाता जा रहा था, मुझे चूमता जा रहा था और मैं उसके लंड से अपना मुँह चुदवा रही थी।

फिर मैंने जोर-जोर से उसके लंड की मुट्ठ मारनी शुरू की। बहुत देर तक यह सिलसिला चलता रहा। कभी मैं मुँह में लेती और कभी मुट्ठ मारती।

थोड़ी देर बाद वो ‘सी-सी’ करने लगा। मैं समझ गई कि वो झड़ने वाला है। वो मेरे मम्मे और जोर से दबाने लगा और मैं भी जोर-जोर से मुट्ठ मारने लगी। फिर उसने मेरा मुँह पकड़ कर अपने होंठ मेरे होंठों पर जोर से दबाए और वो झड़ गया।

उसके लंड से जो मक्खन निकला, वो मेरे मम्मों पर और मेरे पेट पर। उसने वो सारा मेरे मम्मों पर मल दिया।

मैंने कहा- यह क्या किया?

वो बोला- मम्मों की मालिश की। माँ तो रोज इसी से मालिश करती है और इतना मक्खन कहाँ से आएगा।

“हट मैं नहाने जा रही हूँ।” ये कहते हुए मैंने अपनी कच्छी उतारी। मेरी टांगों के बीच ठीक चूत के ऊपर जोर से थप्पड़ मार कर वो बोला- क्या गद्देदार चूत है !

न जाने क्यों मैं उसे ऐसा करने से रोक नहीं रही थी। वो मेरी चूत को थप्पड़ मारता जा रहा था और मैं टांगें फैला कर उसको अपनी चूत पर थप्पड़ पे थप्पड़ मारने दे रही थी।

फिर उसने मुझे धक्का देकर बिस्तर पर लिटा दिया और मेरी चूत में जीभ डाल कर चाटने लगा। पहली बार चूत चटवा रही थी। कुछ अजीब सा लग रहा था। कैसे कोई पहली मुलाकात में किसी की चूत में मुँह डाल सकता है। पर वो तो मजे से कुत्ते की तरह मेरी चूत चाट रहा था।

थोड़ी देर में मेरी साँसें फूलने लगीं, साँसों के साथ मेरे मम्मे भी फूलने लगे। मैं अपने मम्मे दबाने लगी और वो मेरी मेरी टांगों के बीच बैठा मेरी चूत में जीभ लपलपा रहा था। चाटते-चाटते जब चूत ज्यादा गीली हो जाती तो वो चूत में उंगली डाल के अच्छी तरह घुमाता और चूत का पानी इकट्ठा कर के पी लेता। इसी तरह वो चाटता रहा और ऊँगली डाल डाल कर चूत को गर्म करता रहा। जैसे जैसे वो चाटता गया मजा और बढ़ता गया।मैं सिसकने लगी।

“आ…ए… आआँए… आआ…आँ… ऊऊऊँ… हाय…”

चूत में उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी। मेरी साँसें भी और मेरे मम्मों के फुलाव भी। अब दिल कर रहा था चूत झड़े तो शान्ति हो, पर चूत थी कि झड़ने का नाम ही नहीं ले रही थी। लंड से चुद रही होती तो कब की झड़ गई होती, पर इसमें तो उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी, मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था।

मैंने कहा- किस्सना… आआह…आ… जोर जोर से मार उंगली से मार।

उसने एक उंगली डाली, मैंने कहा- उंगली डाल जोर से मार और जोर से 2 उंगली डाल जोर से मार और जोर से और तेजी से हाय जोर से मार ना मर जाऊँगी ! मैं जोर से और जोर से आह… अह… आआह…आअ… अई… आईई… उईईई… हाय… ऊऊऊ…”
बस झड़ गई। चुदी सी का एहसास हो रहा था। मैं किस्सना को अपने मम्मों में दबा कर लेटी रही तो चैन मिला।

मैंने पूछा- चोदने के लिए बुलाऊँ तो आकर चोदेगा?

To be Continued

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चूत में उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी। मेरी साँसें भी और मेरे मम्मों के फुलाव भी। अब दिल कर रहा था चूत झड़े तो शान्ति हो, पर चूत थी कि झड़ने का नाम ही नहीं ले रही थी। लंड से चुद रही होती तो कब की झड़ गई होती, पर इसमें तो उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी, मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था।

मैंने कहा- किस्सना… आआह…आ… जोर जोर से मार उंगली से मार।

उसने एक उंगली डाली, मैंने कहा- उंगली डाल जोर से मार और जोर से 2 उंगली डाल जोर से मार और जोर से और तेजी से हाय जोर से मार ना मर जाऊँगी ! मैं जोर से और जोर से आह… अह… आआह…आअ… अई… आईई… उईईई… हाय… ऊऊऊ…”
बस झड़ गई। चुदी सी का एहसास हो रहा था। मैं किस्सना को अपने मम्मों में दबा कर लेटी रही तो चैन मिला।

मैंने पूछा- चोदने के लिए बुलाऊँ तो आकर चोदेगा?

चुत श्रृंगार | Choot Shringar | Update 7

मैंने पूछा- चोदने के लिए बुलाऊँ तो आकर चोदेगा?

“हाँ !” वो बोला- मस्त चोदूंगा। कब चुदेगी?

मैं बोली- बुलाऊँगी ! जरूर चुदूँगी तेरे से !

और मैं उठ कर नहाने चली गई। जब मैं नहा रही थी तो बाई आई और अपने बच्चों को लेकर चली गई।

शाम को जब भैया आए तो मैं सिर्फ़ ब्रा और कच्छी में उसका इन्तजार कर रही थी।

भैया तो देखते ही उत्तेजित हो गए बोले- हाय, मेरे लिए मम्मे खोल कर बैठी है।

और भैया ने दोनों हाथों से मेरे दोनों मम्मे पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और मुझे अच्छी तरह दबोच कर मुझे खूब चूमा और मेरा मुँह और गला चाट चाट कर मेरा मुँह, गला, कंधे और मम्मे सब गीले कर दिए।

फिर मेरे मम्मे दबा कर मेरे मुँह में जीभ डाल कर मेरे मुँह को अपनी जीभ से खूब चोदा। और ऐसा करते-करते भैया ने मेरे मुँह में हल्का सा थूक दिया। भैया ने मुँह में थूक ठीक ऐसे ही डाला जैसे जीभ नहीं लंड हो और चोदते-चोदते उसका रस निकल गया हो।

प्यार से मुँह में चोदा हुआ थूक मैं प्यार से खा गई।

मैंने भैया से पूछा- तुमने मेरे मुँह में थूका क्यों?

वो बोला- पगली, यह थूक नहीं प्रेम-रस है।

“वो तो मुझे मालूम है !” मैंने कहा- पापा भी मम्मी के मुँह में थूका करते थे और जब वो थूक खा जाती मतलब उस रात खूब चुदेगी वो पापा से।

भैया हैरान हो कर बोले- अच्छा तूने देखा है? मम्मी को चुदते हुए देखा है?

“तो और क्या ऐसे ही कह रही हूँ !” मैं बोली- तुम तो हमेशा हॉस्टल में रहे, तुम्हें क्या पता घर में क्या क्या होता था?

“बता, बता न, कैसे-कैसे क्या-क्या देखा?” भैया बड़े उत्तेजित हो कर पूछने लगे।

मैंने कहा- सब बताऊँगी, पहले मेरा मजा तो ले ले।

भैया ने इन्कार नहीं किया कि प्रेमी की थूक चाटने से उनका मतलब चोदना है। मुझे लगा आज तो ये चोदेगा।

मैंने पक्का करने के लिए कहा- मेरे मुँह में अपना थूक दे ना।

उसने मम्मे दबा कर मेरे होंठ चूसे और मेरे मुँह में फिर थूका और मैं चाट गई।

और मैंने कहा- मम्मी जितना ज्यादा थूक चाटती थी, मतलब उतनी ज्यादा लम्बी चुदेगी।

भैया ने और मम्मे दबाए और चूमा और मेरे मुँह में कई बार थूक दिया। मुझे यकीन हो गया कि आज रात तो ये मुझे जी भर के चोदेगा।

मेरे पति मुझे चोदने से पहले मेरी चूत को खूब सजाते थे। आज मैं फिर से चुदने वाली थी तो मैंने भी सोचा क्यों न चूत को सजाया जाए।

मैं गुसलखाने में जाने लगी तो भैया भी पीछे-पीछे हो लिए। मैंने भैया से ही चूत का श्रृंगार करवाया। मैं टांगें फैला कर बैठ गई और भैया ने अपनी शेव करने वाली क्रीम मेरी चूत के चारों और लगाई। फिर भैया ने रेज़र से चूत की अच्छी सी शेव की। चूत खूब चिकनी हो गई। तब भैया ने चूत को अच्छी तरह धो कर पोंछा और चूत के चारों ओर क्रीम लगाई और उस क्रीम से चूत की खूब मालिश की।

चूत चिकनी और चमकदार हो गई। फिर मेरे कहने पर भैया ने मेरी चूत पर लिपस्टिक लगाई, ठीक उसी तरह जैसे होंठों पर लगाते हैं। उसके बाद भैया ने चूत के ऊपर सिन्दूर से टीका लगाया।

चूत एक नई-नवेली दुल्हन की तरह सज गई और अपनी चूत में अपने लंड के गृह-प्रवेश कराने को तैयार हो गई। मैं भैया के साथ बिस्तर में गई। आज मैं बिल्कुल नंगी थी, खुले मम्मे खुली चूत, पूरी तरह से चुदने को तैयार।

मैंने भैया से कहा- मुझे कल की तरह चूमो-चाटो।

भैया ने मुझे पिछले रोज की तरह चूत से लेकर मुँह तक खूब चूमा और चाटा। पिछली रात तो मैं सोने का बहाना कर रही थी, इसलिए अपनी साँसों को दबा रही थी, पर आज मैं खुल कर मजा ले रही थी। लंबी-लंबी साँसें ले रही थी, मीठी-मीठी ‘आँहें’ भर रही थी और ‘आह… उह… हाय…’ वगैरह बोल कर अपनी खुशी भी जाहिर कर रही थी। चाट-चाट कर भाई ने मुझे खूब गर्म कर दिया।
मैं बोली- चोद ले, चोद मुझे, नहीं तो मर जाऊँगी।

पर ये क्या ! चुदने को मेरी जान निकली जा रही है और वो मेरी चूत में लंड ही नहीं दे रहा। बार-बार मिन्नत की, मेरी चूत मार ले, चोद ले मुझे, लंड दे दे ! पर उसने चूत नहीं मारी।

बोला- तेरी चूत में लंड कैसे दे दूँ? तू तो मेरी बहन है।

मैं बोली- और यह जो इतनी चुम्मा-चाटी कर के मुझे चूत मरवाने के लिए गर्म किया तब भी तो मैं तेरी बहन थी?

उसने कहा- देख, शरीर को छूना अलग बात है और चूत में देना अलग बात है। मैं बाहर से सब मजा दूँगा पर चूत मरवाने पर जोर मत दे।

मैं समझ गई कि यह चूत नहीं मारेगा, सोचा, कमला बाहर से ही मजा ले ले।

मैंने कहा- अच्छा लंड तो दिखा दे।

उसने पजामे में से लंड निकाला। बहुत सुन्दर था मैं देखती ही रह गई। मैंने मुँह में लेकर चूसा और चूसती ही रह गई। भैया सिसकारियाँ लेकर मजा ले रहे थे।

मैंने कहा- भैया, तूने तो बहन को चोद लिया।

भैया हड़बड़ाए, “क्या ! क्या ! क्या बोली तू?”

मैंने कहा- तूने अपने लंड से मेरा मुँह चोद लिया।

भैया बोले- अब मैं तेरे मम्मे भी चोदूँगा। भाई ने अपना तना हुआ लंड मेरी चूची पर रख कर दबा दिया। चूची के दबते ही मम्मे चारों तरफ से उभर आए, जैसे लंड को चारों ओर से कैद कर रहे हों। लंड को अच्छी तरह से दबा कर, उसने मम्मों के बीच घुमाया। मम्मों के मांस को लंड के चारों तरफ नाचते देख भाई को बहुत मजा आया।

उसने पूछा- कैसा लग रहा है मम्मे चुदवा कर?

मैंने कहा- बहुत अच्छा लग रहा है। ऐसे लग रहा है, मैं उड़ जाऊँगी। तुम मुझे थाम लो। मेरे ऊपर लेट जाओ और मुझे जोर से दबा लो।

भैया ने लंड पजामे में डाला और मेरे ऊपर लेट गया और मुझे चूमने लगा।

मैंने कहा- मुझे चोद ले प्लीज़।

वो बोला- हम चोद तो नहीं सकते, पर जब तू कहती है चोद ले तो बहुत प्यारी लगती है।

मैंने कहा- अच्छा चोद मत पर चोदने का नाटक तो कर सकता है। लंड को पजामे में छुपा रहने दे और धक्के मार।

भैया ने एक धक्का मारा तो खड़े लंड से चूत पर ठोकर लगी। पजामे से ही सही पर लंड ने चूत से बात तो की। मुझे तो तसल्ली सी हुई। चूत का श्रृंगार बेकार नहीं गया। मुझे मजा आया।

मैंने कहा- और चोद।

उसने और धक्के मारे, कभी धक्का ऐसे भी लगता कि लंड चूत के द्वार पर ठोकता मानो पजामे से निकल कर चूत के अंदर घुसने की कोशिश कर रहा हो।

मैं बोलती गई और वो लंड को ठोकता गया।

“चोद और चोद ! चोद मुझे, मेरी चूत ठोक दे, जोर से और जोर से मार, जोर से मार, बहुत जोर से !” और मैं ‘आधी-चुदी’ सी इतने में ही खुश होती रही।

अगले दिन मैंने सोचा अब यह तो मेरी चूत के अंदर अपना लंड देगा नहीं और कौन है जो मुझे चोद लेगा। मेरी निगाह में दो जने थे– एक तो काम वाली बाई का बेटा किस्सना और दूसरा होटल का मालिक चंदू या दिल से कहूँ तो मेरा चोदू।

मैंने भाई से कहा- चंदू ने हमें अपने होटल आने का न्योता दिया था, आज चलें?

भाई ने कहा- ठीक है, तुम फ़ोन पर उससे बात कर लेना और डिस्काउंट की भी बात कर लेना। जरूर चलेंगे।

भैया दफ़तर चले गए तो मैंने चंदू को फ़ोन किया, मैंने पूछा- पहचाना या याद दिलाऊँ?

“अरे तेरे मम्मों में मेरी जान है ! पहचानूँगा कैसे नहीं !”

“उस दिन जब तुमने मुझे अपना नाम बताया तो मैंने गलती से तुम्हारा नाम ‘चोदू’ समझा था ।

“तुमने गलत नहीं समझा, मैंने चोदू ही बताया था। मैं दुनिया के लिए चन्दू हूँ, तेरे लिए चोदू।”

“सच कब चोदेगा?”

‘अभी आ जा।”

“ऐसे कैसे आऊँ, उसके साथ ही आऊँगी।”

“कब आएगी?”

“आज शाम को, खाने पे, कितना डिस्काउंट देगा?”

“खाना फ़्री।”

“मैं उसके साथ होऊँगी, चोदेगा कैसे?”

“अपना होटल है। कोई रास्ता निकल ही आएगा।”

“ठीक ! पर मुझे चोदना जरूर। मैं खाना खाने नहीं आ रही, सिर्फ चुदने आ रही हूँ।”

“फ़िक्र ना कर ठोक-ठोक कर चोदूँगा, तेरी चूत फाड़ कर रख दूँगा।”

To be Continued

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“सच कब चोदेगा?”

‘अभी आ जा।”

“ऐसे कैसे आऊँ, उसके साथ ही आऊँगी।”

“कब आएगी?”

“आज शाम को, खाने पे, कितना डिस्काउंट देगा?”

“खाना फ़्री।”

“मैं उसके साथ होऊँगी, चोदेगा कैसे?”

“अपना होटल है। कोई रास्ता निकल ही आएगा।”

“ठीक ! पर मुझे चोदना जरूर। मैं खाना खाने नहीं आ रही, सिर्फ चुदने आ रही हूँ।”

“फ़िक्र ना कर ठोक-ठोक कर चोदूँगा, तेरी चूत फाड़ कर रख दूँगा।”

चुत श्रृंगार | Choot Shringar | Update 8

आज तो मैं चुद के रहूँगी, ये सोच कर मैं भैया के साथ शाम को चन्दू के होटल पहुँची। वहाँ हमने चन्दू को बुलाने के लिए संदेश भेजा और रेस्तरां की एक टेबल पर उसका इन्तज़ार करने लगे।

इसी बीच मैं शौचालय गई। वापिस आई तो चंदू भाई के साथ गपशप कर रहा था।

मुझसे बोला- कैसा लगा आपको हमारा होटल?

मैंने कहा- होटल तो अभी देखा नहीं, पर मुझे शौचालय अच्छा नहीं लगा, मैं तो बिना किए ही आ गई।

वो बोला- ओ जी, वैरी सैड जी ! आप उधर गई क्यों जी? आपके लिए तो स्पेशल शौचालय इधर है।

चन्दू भैया से बोला “ओ जी, आप बैठो कुछ नाश्ता आर्डर करो, मैं इनको शौचालय का रास्ता दिखा कर आता हूँ।

और चोदू मुझे अपने कमरे में ले गया। उसके कमरे में एक शौचालय भी था, बहुत ही साफ और पूरी दीवार पर शीशा लगा था।

मेरे मम्मे दबा कर शीशे मे देख कर बोला- क्या जोड़ी है जी हमारी। चलो आप सूसू कर लो फिर बात करते हैं।

मैंने कहा- मैं सूसू करके आई हूँ।

“ओ सच्ची?” वो बोला, “बहुत स्मार्ट हो जी, चुदने को यहाँ आई हो, तो चल नंगी हो जा।”

और उसने मेरी साड़ी खींच ली, मैंने ब्लाउज़ उतारा तो उसने मेरी कच्छी। दो पल में हम दोनों नंगे। उसने मुझे शीशे के सामने झुकाया और पीछे से मेरी चूत में अपना लंड एक धक्के में डाल दिया।

मैं चीखी, “हाय !”

वो बोला- दर्द हुआ?

मैंने कहा- दर्द होता है, तभी तो मजा आता है।

उसने फिर निकाल कर जोर से ठोका।

मैं चिल्लाई, “हाय, मेरी चूत फट गई।”

उसने मेरे मम्मे कस कर दबाए और खींचे मेरे मम्मे में भी दर्द हुआ। मेरे मुँह से ‘सी.ई…’ निकला तो उसने फिर चूत में जोर से धक्का मारा। मुझे दर्द भी हो रहा था और मजा भी आ रहा था। उसका लंड मोटा भी था और लंबा भी। मोटे लंड से तो मैं पहले भी चुद चुकी हूँ, पर यह इतना लंबा था कि मेरी चूत के अंदर बच्चेदानी को भी चोट मार कर दर्द कर रहा था, पर दर्द में चुदने का मजा भी आ रहा था।

वो चोदता जा रहा था और मैं उसे और चोदने को उकसा रही थी।

“चोद ! मेरी चूत ठोक दे !”

“ठोक के मार ! मेरी चूत फाड़ दे !”

वो चोदता जा रहा था और मैं चुद गई। मेरी चूत नदी की तरह बह रही थी। उसका लंड मेरी चूत में झड़ गया। मैं खुश थी कि मैं चुद गई। वो भी मुझे चोद के खुश। मुझे ध्यान आया बहुत देर हो गई, भैया क्या सोच रहे होंगे।

मैंने उसे कहा- मेरे उनको यहीं भेज देना।

वो भाई को मेरा पति समझ रहा था। मैंने भी सोचा गलतफ़हमी बनी ही रहे तो अच्छा है। वो भाई के पास चला गया। मैंने अपनी चूत पर से उसके लंड का मसाला धोया। तब तक भाई आ गया। मैं नंगी थी।

मैंने कहा- टट्टी करते हुए साड़ी उतार दी थी कि खराब न हो जाए। जरा मदद करो।

भाई ने कहा- वो क्या सोचेगा?

मैंने कहा- परवाह मत करो, उसे लगता है तुम मेरे पति हो। बस उसके सामने मुझे दीदी मत कहना।

मैंने भैया को शीशा दिखा कर कहा- देखो इसके सामने चोदने में कितना मजा आता होगा ना।

मैं शीशे के सामने झुक के खड़ी हो गई और भैया चोदने का नाटक करने लगा। वो धक्का मारता तो मम्मे इधर-उधर झूलते। भैया को बड़ा मजा आ रहा था।

वो बोला- तू मेरी बहन नहीं होती तो आज यहाँ तुझे जरूर चोदता।

हम खाना खाकर होटल से घर लौटने के लिए चले तो चन्दू हमें गाड़ी तक छोड़ने आया। बाहर आकर देखा तो गाड़ी खराब। कार चलने का नाम ही ना ले।

चन्दू बोला- आप ही का होटल है, रात यहाँ रुकिए, सवेरा होते ही गाड़ी ठीक करा देंगे। चले जाना जल्दी क्या है?

भैया से नज़र बचा कर चन्दू ने आँख मारी तो मैं समझ गई यह इसी का किया-धरा है। मैं खुश थी कि चन्दू एक बार और चोदने का रास्ता निकाल रहा है।

मैं और भैया होटल के एक कमरे में गए।

भैया ने कहा- रात को पहनने के कपड़े तो हैं नहीं और अगर ये कपड़े पहन कर सोए तो सवेरे इन्हें पहन कर बाहर जाने लायक नहीं रहेंगे।

मैंने कहा- कपड़े पहन कर सोने की क्या ज़रूरत है। तौलिये हैं ना !

भैया नहाने गए और तौलिया बाँध कर आ गए।

फिर मैं नहाने गई। मुझे अपनी चूत पर बड़ा तरस आ रहा था बेचारी का कल श्रृंगार हुआ तो चुदी नहीं और आज चुदी तो बिना श्रृंगार के।

मैंने चूत का श्रृंगार किया। शेव किया क्रीम से नहला कर रगड़ा और उसे खूब चिकना बनाया और नहा कर नंगी ही बिना तौलिये के बाथरूम से बाहर आ गई।

मम्मे और चूत देख कर भाई बोला- क्यों, तौलिया नहीं मिला क्या?

मैंने कहा- तुम्हारी तरह इतना आसान नहीं है। एक ही तौलिया है, मम्मे छुपाऊँ तो चूत नंगी और चूत छुपाऊँ तो मम्मे नंगे। तुम्हारा क्या है, एक लंड है कहीं भी छुपा लो।

और यह कह कर मैंने उसका लंड पकड़ लिया और उसका तौलिया गिर गया।

मैं भागने लगी तो उसने मेरे मम्मे पकड़ते हुए कहा- इतने मोटे मम्मे लेकर कहाँ भाग रही हो?

और हम दोनों नंगे होकर एक दूसरे के जिस्म से खेलने लगे। फिर हम थक कर बिस्तर पर लेट गए और वो मुझे चूमने-चाटने लगा।
अच्छी तरह सारा बदन चटवा कर मैं बोली- चोद ना !

उसने घूर कर देखा तो मैंने कहा- कल रात की तरह ऊपर-ऊपर से ! चोद ना !

और वो धक्के मारने लगा। आज वो भी नंगा था और उसका लंड कभी मेरी टांगों से, कभी मेरे पेट से टकराता। एक-दो बार चूत के आस-पास भी वार हुआ। हम दोनों मस्त होते जा रहे थे।

“और चोद !” मैं बोलती और वो और धक्के मारता। इसी तरह मस्ती करते-करते जब वो धक्के मार रहा था, तो मैंने अपनी टांगें खोलीं और उसका लंड फिसलता हुआ मेरी चूत के अंदर।

मैंने उसे दबोच लिया और धक्का नहीं मारने दिया, मैंने कहा- कसम है तुझे, अब बाहर ना निकालना। यह तूने मेरे अंदर नहीं दिया है, भगवान की मर्ज़ी से हुआ है।

मैं उसे समझा ही रही थी कि उसने एक धक्का मारा, फिर एक और !

फिर बोला- भगवान की मर्ज़ी है तो चुद ले मेरी रानी !

और वो जोर-जोर से धक्के मारने लगा।

वो मुझे एक सच्चे प्रेमी की तरह चोद रहा था और मैं एक सच्ची प्रेमिका की तरह चुदवा रही थी। हमारे प्रेम-आलाप से होटल के कमरे की दीवारें गूंज रही थीं।

चोद मुझे !

चुद ले मेरी रानी !

मेरी चूत के राजा !

मेरे लंड की रानी !

मेरी चूत मे लंड दे !

ले, और ले, चुद ले !

मेरी चूत का मजा ले !

मेरे लंड का मजा ले !

और मैं चुदती गई। फिर अचानक मेरी चूत की पेशियाँ खिंचने लगी और लंड को कस कर पकड़ने लगीं। लंड का धक्के मारना मुश्किल हुआ तो भैया ने और जोर लगाना शुरू कर दिया। मैं झड़ने वाली थी। मुझसे सहा नहीं जा रहा था।

मैंने चिल्लाना शुरू कर दिया- हाय मैं चुद गई ! हाय मेरा पानी निकल रहा है !

हाय मैं मर जाऊँगी ! मुझे छोड़ मत ! जोर से चोद !

हाय मैं चुद गई ! चुद गई ! चुद गई ! चूऊऊऊद गआआईई !

मेरी चूत नदी की तरह बह रही थी। भैया ने धक्के मारने बन्द कर दिए और मेरे होंठ चूसने लगे। मैं ठंडी हो चुकी थी। जैसे जैसे भैया ने मुझे चूमा-चाटा और मम्मे दबाए मैं फिर से गर्म हो गई।

मैंने फिर भैया को कहा- चोद मेरी चूत को।

भैया ने फिर से मुझे चोदा। मेरी चूत फिर झड़ गई। मैं उस रात 6 बार झड़ी और 6 बार झड़ने के बाद मेरी चूत लगातार झड़ती रही। फिर भैया ने तूफान की तरह लगातार धक्के मार-मार कर चोदा और वो मेरी चूत में झड़ गया। सारी रात वो मेरे मम्मों से चिपका रहा।

सवेरे उठ कर बोला- बाथरूम में वैसा ही शीशा है जो कल तुमने उस शौचालय में दिखाया था। चल शीशे में देख-देख कर चोदते हैं।

मैंने कहा- कल तो तुम्हें शीशा देख कर इतनी उत्सुकता नहीं हो रही थी।

वो बोला- कल तक हम चोद भी नहीं रहे थे।

मैंने पूछा- आज चोदोगे?

“हाँ बहुत चोदूंगा।”

‘चूत के अंदर दोगे?’

‘चूत फाड़ के रख दूंगा।’

‘मालूम है ना मैं बहन हूँ?’

‘हाँ, मालूम है।’

‘अपनी बहन को प्यार से चोदना, ज़िंदगी भर चोदना !’

भैया ने कहा- अब बस कर, पहले नहीं चोदा उसके लिए ‘सॉरी’

और भैया मुझे गोद में उठा कर बाथरूम में ले गया और मुझे शीशे के सामने खड़ा करके पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डाल कर उसने मुझे खूब चोदा। जैसे-जैसे वो धक्के मारता मेरे लटके हुए मम्मे हिलते और हिलते हुए मम्मे देख कर उसका लंड और तन जाता और वो और जोर से चोदता।

‘हाय !’ वैसी चुदाई न किसी ने की होगी, ना किसी ने कराई होगी।

मैंने ज़िंदगी में जो चाहा था, वो मुझे आज मिल गया। हम दोनों चिल्ला-चिल्ला कर चुदाई का मजा ले रहे थे:

चोद मुझे !

ले दीदी !

अपनी बहन का मजा ले !

चुद ले दीदी !

लंड दे दे !

ले चुद ले !

जोर से चोद अपनी बहन को !

हाय मेरी प्यारी दीदी भाई का लंड ले !

बहुत अच्छा है, भैया चोद अपनी दीदी को !

अच्छी तरह चोदने के बाद भैया ने मेरी चूत में ऊँगली डाल के चूत साफ़ की, चूत को धोया और पोंछा। फिर मुझे जमीन पर लिटा कर मेरी दोनों टांगों को अपने कंधों पर रख लिया, जिससे चूत बिल्कुल उसकी आँखों के सामने थी।

मैंने पूछा- अब क्या करना चाहते हो?

तो उसने जवाब दिया- ‘चूत श्रृंगार !’

THE END

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