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Incest मां के हाथ के छाले | Maa Ke Hath Ke Chhale

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Sahil
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मां के हाथ के छाले | Maa Ke Hath Ke Chhale

शनिवार का दिन था यानी की मेरी जोब की छुट्टी, सुबह जब नींद खुली खिड़की से बाहर देखा तो थोड़ी थोड़ी बारिश आ रही थी। मैं अंगड़ाई लेता उठा कमरे से बाहर निकला तो मां किचन में आटा गूंध रही थी और जब उनसे पूछा के पापा कहां है? तो वो बोली के वो तो ड्यूटी पर गए और बोलके गए हैं के 4-5 दिन बाद आएंगे और सोनू से कहना के कार का बिगड़ा हुआ एसी ठीक करवा ले याद से। मैं बोला : ठीक है मां करवा दूंगा। और फिर मोसम देखकर मैनें मां से कहा, मां आज बारिश का मौसम है और मेरा पकोड़े खाने का मन है, तो मां बोली जा दुकान से बेसन ले आ, मैं बना देती हूं पकोड़े इसमें कोनसी बड़ी बात है।

मैं थोड़ी देर बाद बेसन लेकर आया और मां को देकर नहाने चला गया, बाथरूम से जैसे ही नहा कर बाहर आया तो मां के चीखने की आवाज आई, मैं दौड़कर किचन में गया और देखा तो तेल की कढ़ाई नीचे गिरी पड़ी थी और मां अपने हाथों को देख देख कर रो रही थी, क्योंकि गर्म गर्म तेल मां के हाथों पर गिर गया था और उंगलियों और हथेली पर लाल हो गया था। मैंने तुरंत फ्रीज से बर्फ निकाली और उन्हें बाहर रखे सोफे पर बैठाकर उनके हाथों पर लगाई, कुछ देर बाद मां को थोड़ा आराम आया और उनका दर्द कम हुआ। कढ़ाई नीचे गिरने से कुछ छीटे मां की पजामी और कमीज पर भी पड़े और वहां वहां से उसमे छेद हो गए और शरीर पर जहां जहां तेल गिरा था वहां वहां पर थोड़ी देर बाद छाले पड़ने लगे। मैं मां को हमारी फैमिली डॉक्टर के पास गाड़ी में ले गया और छाले सूखने की दवाई लेकर उन्हें घर लाया। थोड़ी देर बाद मैंने मां को खाने की टैबलेट दी और उन्हें उनके छालों पर ट्यूप लगाने लगा, जब मैनें उनके हाथों पर ट्यूप लगा कर बंद की तो मां बोली, रुक बेटा।

मैं बोला : हां मां क्या हुआ।

मां : वो वो वो....

बोलकर चुप हो गई

मैंने फिर उनसे पूछा क्या हुआ मां बोलो ना

मां : वो बेटा मेरे पैरों पर और शरीर पर भी छाले हैं, मैं खुद लगा लेती वहां पर, पर मेरे हाथों पर दुखेगा अगर मैं ऐसा करूंगी, क्या तू वहां भी लगा देगा?

मैं: अरे इसमें हिचकिचाने वाली क्या बात है मां, दिखाओ मैं लगा देता हूं।

मैं और मां उसवक्त बड़े वाले सोफे पर बैठे थे। मां ने सोफे पर मुझसे तीसरी वाली सीट पर सरक के अपने दोनों पैर ऊपर बीच वाली सीट पर रख लिए और अपने घुटनो को मोड़कर मुझे पैर दिखाने के लिए बैठी के मेरी इक नज़र एक पल के लिए मां की पजामी में से बनी चूत और थोड़ी सी गांड़ पर पड़ी और दूसरे ही पल मैं खुदको संभाल कर उनके गोरे गोरे पैरों पर वो छोटे छोटे छाले देखने लगा जो चमक से रहे थे। मैं जैसे ही उनके छालों पर ट्यूब लगाने लगा वो सिसक उठी

मां : आह, बेटा।

मैं: सॉरी मां, मैं धीरे धीरे से लगाता हूं।

मां थोड़ा दर्द से सिसकते हुए बोली : हां , बेटा।

जब उनके पैरों पर ट्यूब लग गई तो मैं बोला : मां यहां भी लगा दी है, और कहीं तो नहीं हैं न छाले?

वो बोली : बेटा वो मेरे पेट के पास भी 4-5 तेल की बूंदे गिरी थी, मैंने वहां देखा तो नहीं पर मुझे जलन सी हो रही है, तु देख तो सही जरा।

मैं : ठीक है मां, दिखाओ

मेरे कहते ही मां सोफे पर लेट गई पेट की ओर इशारा करती बोली : थोड़ा सा कमीज ऊपर करके देख तो सही कितने हैं?

मैंने कांपते हाथों से उनकी कमीज को थोड़ा सा ऊपर उठाया तो उनका गोरा पेट और उसमे बनी गोल गहरी नाभी नजर आई और उसके थोड़ा सा ऊपर उनकी वो गाड़ेदार रैड कलर की ब्रा जिसे देखकर मुझे अच्छा सा लगा। वहां पेट के पास भी 2-3 छाले थे, मैनें उनपर भी ट्यूब लगाई और बोला : मां 2-3 ही थे बस, लगा दी है यहां भी, बस और तो कहीं नहीं है ना?

मां : बेटा ये थोड़ा सा लेफ्ट में नीचे तो देख

मैं: कहां पर मां?

मां थोड़ा सा मुड़ी और अपने पेट के थोड़ा सा लैफ्ट साइड पर नीचे की ओर इशारा करने लगी और बोली : बेटा ये चुभ सा रहा है , थोड़ा इसको एडजस्ट करदे बस।

मैनें देखा के उनकी पेंटी ऊपर से थोड़ी मुड़ कर इक्ट्ठी हो रखी थी जिसकी वजह से शायद उन्हें कम्फर्ट महसूस नहीं हो रहा था, उनकी पैंटी ब्राउन कलर की थी, अक्सर शादी शुदा हाउसवाइफ ब्रा पेंटी की मैचिंग पर ध्यान नहीं देती और मां भी उनमें से एक थी

मैं बोला : क्या मां?

मां : बेटा वो थोड़ा सा मेरी पैंटी मुड़ी हुई है , मुझे चुभ सी रही थी , थोड़ा सही करदे बस।

मैं: ओके मां 

ये बोलकर मैनें मां के लैफ्ट चूतड पर से एक हल्के हाथ से उनकी पजामी को ऊपर की तरफ खींचा और दूसरे हाथ से उस पैंटी को ठीक करने लगा, ऐसे करते हुए मेरी नजर उस मुड़ी हुई गांड़ पर पड़ी और मैं सोचने लगा के पापा कितने लक्की हैं यार, जो उन्हे मां जैसी बीवी मिली, फिर मैंने दोबारा मां से पूछा : और तो कुछ नहीं है मां?

वो बोली : नहीं बेटा, थैंक्यू बस।

फिर मैं बोला : अरे इसमें थैंक्यू की क्या बात है मां, भला बेटे से भी कोई मां थैंक्यू बोलती है, आप अब सोफे पर ही थोड़ा आराम करो और मैं नाश्ता बाहर से ले आता हूं।

मां : ठीक है बेटा।

तो अब मैं आप सबको अपनी परिवार के बारे में थोड़ा बता दूं, मेरी मां निशा, जो थोड़ी मजाकिया और फिल्मी टाइप की थी, उन्हें हमेशा पुरानी फिल्मों के डायलॉग ही सूझते रहते थे । वह एक हाउसवाइफ थी और पापा रेलवे कर्मचारी और वो 3-4 और कभी कभी हफ्ते बाद ही घर आया करते थे। मैं सोनू, उम्र 22, अभी फिलहाल ही में मैनें एक नोकरी ज्वाइन की थी जिसमे मुझे वर्क फ्रोम होम ही मिल गया था जिसमे वीकेंड पर छुट्टी रहती थी। हमारा छोटा सा परिवार खुश था अपनी जिंदगी से।

तो अब चलते हैं कहानी की ओर

मैं बाहर से कुछ देर बाद ब्रैड पकोड़े लेकर आया और साथ में चाय बनाकर मां के पास गया तो मां देखकर खुश हो गई और मैनें उन्हें एक कप पास किया तो वो बोली : ठाकुर ये हाथ मुझे दे दे।

ये सुनकर मैं हंस पड़ा और बोला : लो जी, मां आपका फिल्मी रूप शुरू।

फिर हम दोनों हंस पड़े और मां बोली : अरे सच में ही अब तुझे अपने हाथ कुछ दिनों के लिए मुझे देने पड़ेंगे जब तक ये छाले ठीक नहीं हो जाते।

फिर मैं बोला : आप फिक्र ना करो मां, मैं आपका हूं तो ये हाथ भी तो आपके हुए ना।

और फिर मां मेरी तरफ मुड़ी और मुस्कुरा कर बोली : लव यू बेटा।

मैं: लव यू मां।

फिर मैंने अपने हाथों से उन्हें एक एक घूंट कर चाय पिलाने लगा और साथ में अपने कप से पीने लगा और फिर एक ब्रैड का टुकड़ा तोड़कर उन्हें खिलाता और फिर एक टुकड़ा अपने ब्रैड से तोड़कर खुद खाता। दो तीन चुस्की भरने के बाद मां बोली : अरे सोनू, ये बार बार तु मेरा कप उठाएगा और फिर अपना कप उठाएगा , इस से अच्छा हम एक ही कप में ना चाय पी लें।

फिर मैने दोनों कप की चाय एक ही में कर कर उन्हें पिलाने लगा और खुद भी पीने लगा। फिर मैनें उनसे पूछा : मां, चाय कैसी बनी है?

मां : पहले तो फीकी थी पर अब...

में : पर अब क्या?

मां फिर फिल्मी अंदाज में आकर बोली : पर अब मेरे बेटे के लबों से लगकर मीठी लगने लगी है

इस पर हम दोनों मुस्कुराने लगे, फिर वो बोली : ब्रैड तो खिला बेटा, भूख लगी है मुझे।

मैं: अरे हां, सॉरी सॉरी।

ये बोलकर मैंने ब्रैड चटनी में डूबा कर उन्हें खिलाने लगा के चटनी की कुछ बूंदे उनके क्लीवेज पर गिरी। जिसे देखकर मां बोली : अरे बेटा, ये चटनी से दाग पड़ जाएगा मेरी कमीज पर, जा जाकर एक कपड़ा गिला कर कर लेकर आ। मैं उठा और एक कपड़ा गिला कर के लाया और उन्हें पकड़ाने लगा के वो बोली : थोड़ा सा ऊपर से ये कपड़ा पकड़ और इसे ये गीले कपड़े से घिस।

मैं जैसे ही सूट पकड़ने लगा के मेरी उंगलियां मां के सूट के अंदर घुसकर उनके क्लीवेज पर लगी और वो बोली : आ, पागल इतने ठंडे ठंडे गीले हाथ लगा रहा है, मुझे गुद गुदी हो रही है।

मैंने फिर कपड़ा घिसना शुरू किया और मेरी नजर उनके क्लीवेज के अंदर गई और मां को लेकर मेरा मन डोलने लगा। सूट साफ करके हमने ब्रैड खत्म किए और मैं बर्तन रखकर जैसे ही किचन से बाहर आया के वो बोली : बेटा मुझे सुसु लगी है।

में : तो कर लो मां, इसमें बताने वाली क्या बात है

मां : अरे पागल, वो मेरे कपड़े अड़ेंगे ना बीच तो

मैं समझ गया के अब तो जब तक छाले ठीक नहीं होते तब तक मुझे बहुत कुछ दिखेगा जिंदगी में जो पहले कभी देखने को नहीं मिला। मैनें फिर सोचा क्या मां अब मुझसे अपना पजामी उतारने को तो नहीं कह देंगी? 2 मिनट तक मैं इन्ही खयालों में डूबा रहा।

To be Continued

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Satish Kumar
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Nice Story.. 

Flowers   Flowers Flowers  

Welcome to BENUDES..

Congratulation for your new Topic..

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Sahil
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@skcbn1982 Thankyou so much brother ❤️

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Sahil
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Joined: 3 months ago

बेटा मुझे सुसु लगी है।

में : तो कर लो मां, इसमें बताने वाली क्या बात है

मां : अरे पागल, वो मेरे कपड़े अड़ेंगे ना बीच तो

मैं समझ गया के अब तो जब तक छाले ठीक नहीं होते तब तक मुझे बहुत कुछ दिखेगा जिंदगी में जो पहले कभी देखने को नहीं मिला। मैनें फिर सोचा क्या मां अब मुझसे अपना पजामी उतारने को तो नहीं कह देंगी? 2 मिनट तक मैं इन्ही खयालों में डूबा रहा।

मां के हाथ के छाले | Maa Ke Hath Ke Chhale

Part:2

मां ने फिर आवाज लगाई तो मैं अपनी सोच से बाहर आया : जल्दी कर बेटा, मुझे जोर से आई है।

मैं: क्या करू मां , बोलो

मां : चल मेरे साथ आ पीछे पीछे

ये बोलकर मां बाथरूम की और मैं उनके पीछे पीछे चल के उन्हें देखता रहा और सोचता रहा मन में : क्या ये सच में हो रहा है, कहीं सपना तो नहीं ना ये?

फिर मां की आवाज आई : जल्दी आ सोनू बेटा

मैं: हां मां, बोलो क्या करूं 

मां : बेटा देख मेरी मजबूरी है ये वरना तुझसे ना कहती

मैं: अरे कोई बात नहीं , बोलो आप

मां पजामी की और इशारा करते हुए : इसे थोड़ा सा नीचे कर ना

मैं (चौंक कर) : क्या?

मां : अरे जल्दी कर ना पागल, निकल जाएगी वरना बीच में ही

मैंने धीरे से उनकी कमीज को पकड़ा , थोड़ा सा ऊपर उठाया और एक हाथ से पजामी नीचे करने लगा के मां ने ऊपर उठी कमीज को अपनी गर्दन से पकड़ लिया और बोली: बेटा दोनों हाथों से नीचे कर जल्दी , वरना कहीं यहीं नदी ना बह जाए। मैनें दोनो हाथों को उनके लैफ़्ट और राइट साइड रखकर धीरे धीरे नीचे सरकाया और उनकी पैंटी मेरे सामने आगई जिसे देखकर मैं खो सा गया के तभी मां बोली : सोनू, बेटा कहा खो गया।

मैं: हां मां, कर दी नीचे, लो कर लो, मैं बाहर खड़ा होता हूं।

मां : तु पागल है क्या, मेरी पैंटी में तुम मर्दों के अंडरवियर जैसा कोई छेद थोड़ी है जो उसमे से कर लूंगी, इसे भी नीचे सरका।

ये सुनकर मैं हंस पड़ा पहले तो फिर अपने हाथ उनके कोमल चूतड़ों के आजू बाजू रखकर पैंटी को नीचे सरकाया ही था के मेरे सामने मां की बालों वाली चूत आ गई, जिसे देखकर मेरा मुंह खुला का खुला रह गया। पहली बार मैनें किसी औरत की चूत देखी थी असलियत में और वो भी अपनी मां की। मेरे पेंटी नीचे सरकाते ही मां फट से घुटनो के बल नीचे बैठ गई और सिटी बजाकर अपनी मूत की धार छोड़ने लगी। ये आवाज सुनकर और सब देखकर मैं तो पागल ही हुए जा रहा था के एकदम होश में आया और खुदसे बोला, मेरी मां मजबूरी में है और मैं उसका फायदा उठा रहा हूं, ये गलत है। ऐसा सोच कर मैं जैसे ही मुड़ा जाने के लिए के मां की आवाज आई : रुक बेटा, कहां जा रहा है।

मैं: मां, आप कर लो, जब हो जाए बताना, मैं ऊपर कर दूंगा ये।

मां : हां ऊपर तो कर देगा, पर ......

मैं : पर कया?

मां मुझे समझाते हुए : बेटे हम औरतों का तुम जैसा नहीं होता ना

मैं: क्या मतलब मां?

मां : मतलब मर्दों का मूतने के बाद बिना उसे धोए चल जाता है पर हमें उसे थोड़ा सा धोना पड़ता है नहीं तो वो स्मैल करता है बाद में और जैसे तुम मर्द लोगों का एक पिचकारी की तरह निकलता है वैसे हमारा ना.......और चुप हो गई

मैं: आप औरतों का क्या मां?

मां : अरे बेटा, समझा कर ना

मैं: अरे आप बताओगी तभी समझूंगा ना

मां : बिल्कुल ही बुद्धू है तु, लगता है तेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है, ना ही कोई लड़की फ्रैंड है जो तुझे ये सब कुछ पता हो

मैं: हां,मां वो तो नहीं है, अब आप ही बताओ ना

मां : मेरा मतलब था के जैसे हम जब पेशाब करते हैं न बैठ के तो हम औरतों का क्या है के जैसे होठों के बीच से निकलता है तो थोड़ा बहोत निकलते वक्त इधर उधर बह जाता है तो उस बहने वाले को साफ करना जरूरी होता है, अब आ गई समझ

मैं: ओ, अच्छा ऐसा है मां, ठीक है समझ गया।

मां : क्या समझ गया मां, अब समझ गया है तो कर भी तो सही बेटा।

मैं : क्या मतलब, मुझे साफ करना पड़ेगा अब ये?

मां : बेटा मजबूरी है , वरना मैं तुझे कभी ना कहती ये करने को, क्या आज तक मैनें कभी तुझे ऐसा कुछ करने को कहा है।

मैं: नहीं मां

मां : तो फिर

मैं: ठीक है मां, मैं कर देता हूं।

मैंने जैसे ही वो टॉयलेट सीट के वॉशर का नल घूमाया के एक सीधी तेज पिचकारी मां की चूत और गांड़ पर आकर लगी और मां एक दम बोली : अरे पागल, सारे कपड़े भीग जाएंगे मेरे , क्या कर रहा है

मैनें एकदम से वो नल बंद किया और बोला : सॉरी सॉरी मां, वो अचानक से चल गया।

मां : हां , कोई बात नहीं , अब धीरे से चला इसे।

मैनें धीरे से थोड़ा सा नल खोला तो पानी हल्के हल्के से उनके चूतड़ों तक ही पहुंचा, फिर वो बोली : बेटा थोड़ा सा और तेज कर

फिर मैनें वैसा ही किया और कुछ सेकंड्स के बाद मां बोली : हां, बस बेटा , हो गया।

मैनें नल बंद किया और मां उठी और बोली : ये ऊपर करदे अब , बस फिर तुझे कुछ काम नहीं कहूंगी।

मैं जैसे ही थोड़ा बैंड हुआ उनकी नीचे पजामी को उठाने के लिए , मैनें सोचा क्यूं ना एक छोटी सी शरारत की जाए और मैनें उनकी पेंटी बिना ऊपर किए ही उनकी पजामी ऊपर करदी और बोला : ओके मां,हो गया, और कोई काम हो तो बिना किसी संकोच के बता देना।

तभी मां बोली : थैंक्यू मेरे बुद्धू बेटे, थैंक्यू सो कुछ

और जैसे ही वो चली बाथरूम से बाहर उन्हे पता चल गया के मैनें पैंटी तो ऊपर की ही नहीं और वो मुझे जाते देख बाथरूम के बाहर निकलकर बोली: रुक बुद्धू कहीं के, इधर आ

मैं हस्ते हुए मुड़ा और बोला : हां मां?

मां समझ गई की मैनें ये जान बूझ कर किया है और बोली : अच्छा जी, मां से मस्ती करते हो, बदमाश कहीं के, मुझे सब पता चल गया के तूने ये जान बूझ कर नीचे ही छोड़ दी ना।

मैंने हंसते हुए कहा : नहीं तो मां

मां : चुप बदमाश, सही कर इसे जल्दी से

मैं फिर से बाहर सोफे की ओर जाते हुए: अरे रहने दो ना , कोई कुछ हो थोड़ी रहा है इस से।

मां मेरे पीछे पीछे वैसे ही आई और : अरे पागल, मजाक मत कर ना, मेरे बाल ज्यादा हो रखे हैं बेटा वहां पर, बिना उसके डाले फिर खुजली सी होती रहती है

To be Continued

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Sahil
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मां के हाथ के छाले

Part : 3

मां मेरे पीछे पीछे वैसे ही आई और : अरे पागल, मजाक मत कर ना, मेरे बाल ज्यादा हो रखे हैं बेटा वहां पर, बिना उसके डाले फिर खुजली सी होती रहती है

मैं: तो फिर बाल काटते क्यूं नही आप?

मां : बेटा, बाल तो हर 2 हफ्ते बाद साफ करती हूं और इस बार भी कल के रविवार का सोचा था के काट लूंगी और अब ये सब हो गया के रह ही गए।

मैं: मां फिर इसका मतलब जब तुम बाल काटती हो , उसके बाद बिना पैंटी के रहती हो?

मां : चुप बदमाश कहीं का

मैं: बताओ ना मां प्लीज

मां : अम्म हां, काटने के बाद 3-4 दिन तक तो जरूरत नहीं पड़ती उसे पहनने की पर फिर...

मैं: फिर क्या मां?

मां : अरे मेरे बुद्धू , फिर दोबारा से बड़े होने लग जाते हैं ना वो

मैं: अच्छा, मां क्या ये मर्द लोग भी काटते हैं नीचे के बाल?

मां इसपर हंसने लगी और बोली : हां, सभी काटते हैं

मैं: मैनें तो नहीं काटे मां कभी भी

मां : हां, तेरी गर्लफ्रेंड नहीं है ना, इसलिए तुझे कभी जरूरत ही नहीं पड़ी शायद।

मैं सब समझ कर भी अनजान बनता रहा और इस सिचुएशन का मजा लेता रहा बातों से ही, मुझे लगा नहीं था के ये इस से भी आगे जाएगा पर मैं शायद गलत था।

मैं अनजान बनकर पूछा : क्या मतलब मां?

मां (हंसते हुए बोली) : कुछ नहीं मेरे बुद्धू बेटे, चल अब बाते छोड़ और मेरी ये पैंटी ऊपर कर

मैं सोफे पर जा बैठा था और मां मेरे सामने आई , खड़ी होकर बोली : कर भी दे अब, ओ बुद्धू

मैं: करता हूं मां

इधर सामने टीवी चल रहा था और मां पहले तो मेरी तरफ मुंह करके खड़ी थी पर जैसे ही टीवी पर चलते गाने की आवाज आई वो उसे देखने के लिए थोड़ी सी घूमी और मेरी तरफ अपनी गांड़ करके खड़ी हो गई ,

इधर मेरा पूरा ध्यान बस मां पर ही था, अपनी आखों के इतने पास उनकी गांड़ देख कर मन तो किया की बस खा जाऊं, पर मैंने खुदपर काबू किया और उनकी पजामी को थोड़ा सा नीचे सरकाया और ये क्या इतनी गोरी गांड़ देख के तो जी ललचा सा ही गया, फिर जैसे ही मैं नीचे उनकी पैंटी ऊपर करने के लिए झुका तो मां अचानक से ही थोड़ा पीछे हो गई और मेरा मुंह ऊपर आते वक्त उनकी गांड़ की दरार से होते हुए आया, वाह क्या पल था वो, वो गांड़ की एक भीनी सी खुश्बू सूंघ कर तो मानों नशा सा सवार हो जाए किसी पर भी, फिर मैनें ज्यादा ना सोचते हुए उनकी पैंटी ऊपर की और फिर पजामी भी, ऐसा करने के दौरान मां खड़ी रही और टीवी पर नजर गड़ाए बस गाना गुनगुनाती रही।

मैं बोला : हो गया मां।

मां बोली : थैंक्यू मेरे बुद्धू।

और फिर सोफे पर मेरे साथ आकर बैठ गई और टीवी देखने लगी। फिर यूंही बातों में और टीवी देखने में समय बीत गया और दोपहर हो गई। मुझे भूख लगी तो मैंने मां से भी पूछा : मां आपको भूख लगी है क्या?

मां : हां, बेटा लगी तो है, जा जाकर कुछ ले आ बाजार से।

मैं: हां मां, बताओ क्या खाओगी आप

मां सोचने लगी और बोली : बेटा मेरा आज रोटी खाने का दिल नहीं कर रहा, तु पिज्जा ऑर्डर करदे ना।

मैनें दो पिज्जा और एक कोल्डड्रिंक ऑर्डर की। तकरीबन आधे घंटे बाद पिज्जा आया। हम दोनो की भूख तब तक इतनी बढ़ चुकी थी। मैनें पिज्जा और कोल्ड ड्रिंक सोफे के सामने पड़े मेज पर रखे और खुद सोफे पर जाकर बैठ गया। मां को पता था के उन्हें खिलाना तो मुझे ही पड़ेगा, इसलिए वो सिंगल वाले सोफे से उठकर मेरे पास बड़े वाले सोफे पर आकर बैठ गई और देखने लगी। मैनें बॉक्स खोला और उस पर चिल्ली फ्लेक्स और ओरेगेनो डालकर खाने के लिए एक पीस उठाया ही था के मां ने अपना मुंह खोल लिया, मुझे मस्ती सूझे रही थी , मैंने फटाक से उसका बाइट लिया और मां को देखकर हंसने लगा।

मां बोली : अच्छा बच्चू, मां से मस्ती। कोई बात नहीं ठीक हो जाने दे मेरे हाथ फिर बताती हूं तुझे।

मैं हंसते हंसते उसका दूसरा बाइट मां के मुंह की तरफ लेकर गया और उन्हें खिलाया , फिर एक एक घुट करके हमने कोल्ड ड्रिंक भी खत्म कर दी और पिज्जा भी। फिर मां पीछे सोफे पर कमर लगा कर बोली : वाह बेटा, मजा आ गया आज तो पिज्जा खा कर वो भी तेरे हाथों से। थोड़ी देर बाद मां अपने कमरे में चली गई ये कहके के मैं अब थोड़ी देर आराम करने जा रहीं हूं, कुछ काम होगा तो तुझे बुला लूंगी। मैनें भी हां में सर हिलाया

फिर शाम तक हमने आराम किया और मां ने फिर मुझे अपने कमरे से आवाज लगाई : सोनू बेटा, इधर तो आ जरा, मेरी मदद कर दे।

मैं: आया मां।

मां : बेटा मुझे सुसु आई है

मैं: चलो मां

मां : अच्छा सुन, सुबह की तरह मस्ती मत करना अब, ठीक है ना?

मैं: हां मां, नहीं करूंगा।

फिर मां बाथरूम में घुसी और मैनें सुबह की तरह ही उनकी पहले पजामी उतारी और फिर उनकी पैंटी और उनकी वो पेशाब की आवाज मेरे कानों में पड़ने लगी। पेशाब करने के बाद वही उनकी पैंटी ऊपर की फिर पजामी। फिर इधर उधर की बाते हुई, मैं रात में बाहर से खाना लाया, खाना खाकर मैंने उन्हें दवा दी और ट्यूब उनके जख्मों पर लगाने के लिए निकाली तो मां बोली : रुक बेटा , मुझे पहले चेंज करना है, फिर ये लगा देना।

मैं: ठीक है मां।

मां : वो सामने अलमारी तो खोल मेरी

मैनें अलमारी खोलकर पूछा : हां , बताओ क्या डालोगी

मां : वो नाइटी निकाल ले बेटा , वो ढीली है ना तो उसमे सही नींद आती है मुझे

मैं: ठीक है मां।

मां : पहना तो दे बेटा मुझे, मैं खुद केसे पहनूंगी।

मैं: पर मैं केसे मां?

मां : अरे शर्माता क्यूं है, क्या बचपन में मैं तुझे खुद कपड़े नहीं पहनाती थी क्या,, तो आज तू मुझे पहना दे, बस सिंपल।

मैं: पर मां।

मां : अच्छा ठीक है, मैं दूसरी तरफ घूम जाऊंगी , तु फिर पहना देना, अब ठीक

मैनें हां में सर हिलाया और मां घूम कर मेरे सामने खड़ी हो गई। पहले मैंने उनकी कमीज उतारी और फिर उनकी पजामी नीचे तो सरक गई पर जैसे ही उनके पैरों से निकालने लगा तो वो वहां अटक गई और मां अब सिर्फ ब्रा और पेंटी में , अपनी पजामी को पैरों में फसाकर मेरे सामने खड़ी थी, आज पहली दफा था के मेरे लोड़े में हलचल हुई ये सब देख कर। मां घूमी और बोली : अरे बेटा, सॉरी वो मैं बताना ही भूल गई, ये पजामी ना नीचे से टाइट होती है और किसी पॉलीथीन वगेरा की मदद से आसानी से निकल जाती है,और ये बिना उसके निकाली ना तो अटक गई।

मैं: अब फिर केसे करें मां?

मां : रुक, जा किचन से एक पॉलीथीन लेकर आ।

मैं किचन में गया और पॉलीथीन लेकर आया और पूछा : अब?

मां बैड पर बैठ गई और बोली : पहले पजामी को ऊपर कर फिर पैरों पर पॉलीथीन डालकर धीरे धीरे पजामी को सरका नीचे।

मैंने ठीक ऐसा ही किया और पजामी तो बाहर आ गई और साथ ही मेरा लोड़ा भी ये सब देख कर बाहर आने को उतावला हो गया। फिर मां को मैंने हड़बड़ी में नाइटी डाली ही थी के वो बोली : अरे बुद्धू कहीं के, ब्रा उतारना तो रह ही गया

मैं: क्या?

मां : अरे तुझे नहीं पता क्या, औरतें बिना ब्रा के सोती है, मेरा बेटा इतना बुद्धू है के उसे हर बात बतानी पड़ती है

 

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Sahil
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मां के हाथ के छाले
Part: 4

मैं: ब्रा उतार के क्यूं मां?
मां : अरे पूरा वो दोनो कैद रहते हैं उनमें और रात को आराम भी तो देना होता है ना उन्हें, इसलिए नहीं डालते
मैं: किसे मां?, क्या कैद रहते हैं , किन्हें आराम देना होता है?
मां : अरे समझा कर ना बेटा इतना तो
मैं: अरे बताओ भी मां
मां अपने बूब्स की ओर इशारा करते हुए : मेरे ये
मैं: ओ अच्छा अच्छा
मां : हां, बुद्धू कहीं के
फिर मां मेरी तरफ घूम गई और बोली : अब ये नाइटी पीछे से ऊपर उठा और ब्रा का हुक खोल
मैंने जैसे ही मां की नाइटी उठाई , उनका बुरा पीछे से नंगा बदन फिर से देखकर मेरा लोड़ा झटके मारने लगा, फिर एकदम मां बोली : हां, अब हुक खोल दे ये
मैंने आजतक कभी किसी ब्रा का हुक नहीं खोला था, ये मेरा पहली बार था, थोड़ा इधर उधर देख कर जैसे तैसे करके मैनें उनका हुक खोला के मां हल्का सा पीछे हुई और उनकी गांड़ पहली बार मेरे लोड़े से हल्की सी लगी जिसे महसूस करके मैं चोक गया, फिर एकदम से मां आगे हुई और बोली : हां, खुल गया है, अब ये आगे से ब्रा पकड़ के नीचे खींच धीरे धीरे
मैनें वैसा ही किया और लाल रंग की गद्देदार ब्रा अब मेरे हाथों में थी , मेरा मन तो किया के एक बार इसकी खुश्बू ली जाए, पर मैं ऐसा कर ना पाया। फिर मस्ती करते हुए मैं बोला : मां, ये पैंटी भी उतार कर सोती हैं क्या औरतें?
इसपर मां हंसने लगी और बोली : वो तो उनकी मर्जी होती है।
मैनें तुरंत पूछा : और आप मां, आप डाल कर सोते हो या उतार कर?
मां : वैसे तो मैं उतार कर ही सोती हूं पर अब लगता है 3-4 दिन ऐसे डाल कर ही सोना पड़ेगा।
मैं: क्यूं मां?
मां : अरे मैनें तुझे दिन में बताया था ना के वो बाल हों तो डालनी पड़ती है तो इसलिए नहीं तो खुजली होती रहती है, और अब मेरे हाथ पर छाले हैं जिस कारण मैं खुजला भी नहीं सकती अगर उतार कर भी सोऊं तो.
मैं: मां, अब दुपहर में ही तो आपने कहा था के ये मेरे हाथ अब थोड़े दिनों के लिए आपके हुए, और अगर आपको उतार का अच्छी नींद आती है तो वैसे ही सो जाओ, मैं खुजला दूंगा अगर जरूरत पड़ी तो।
मां हंसने लगी और बोली : चुप बदमाश कहीं के, नहीं मैं डालकर ही सोने की कोशिश कर लूंगी, तेरे हाथों को ज्यादा तकलीफ नहीं देना चाहती मैं
मैं: इसमें तकलीफ कैसी मां
मां : नहीं नहीं , मैं सो जाऊंगी ऐसे ही
मैं: ठीक है जैसी आपकी मर्जी
मां : अच्छा सुन, आज रात तु मेरे साथ ही मेरे कमरे में सोजा ना, अगर रात में मुझे पेशाब लगी या कुछ और जरुरत पड़ी तो कहां तेरे कमरे पे आवाजे लगाती फिरूंगी
मैं ये सुनकर खुश हो गया मन ही मन और बोली : हां जरूर मां
फिर मैं अपने कमरे में गया और एक लोवर और टी शर्ट डालकर मां के कमरे में आया और मां बेड के एक साइड लेती हुई थी और कुछ सोच रही थी, मैं भी बैड के दूसरी तरफ आकार लेता और पूछा : क्या सोच रही हो मां?
मां : कुछ नहीं बेटा बस यूंही
मैं: बताओ ना
मां : बस तेरे बारे में सोच रही थी के, आज तूने मेरा कितना ख्याल रखा।
मैं: अरे ये तो मेरा फर्ज था मां
इसपर मां मेरे थोड़ा नजदीक आई और मेरे माथे पर एक किस किया और बोली : थैंक्यू बेटा सब के लिए
मैं: अरे आप भी ना मां, कुछ भी काम हो तो बेजीझक बोल देना, शरमाना नहीं। आपकी सेवा करना तो मेरा फर्ज है।
मां : ठीक है बेटा बता दूंगी।
फिर हम लाइट ऑफ करके सोने लगे, मेरी आखों में तो नींद थी ही नहीं, लगभग आधे घंटे बाद इधर उधर करवटें बदलते बदलते मां की आवाज आई : सोनू, बेटा सो गया है क्या?
मैं: नहीं मां, क्या हुआ?
मां : बेटा मैं ऐसे सो नहीं पा रही
मैं: क्या हुआ मां कुछ प्रोब्लम है क्या?
मां : वो तु सही कह रहा था के मुझे बगैर पैंटी के ही सोना चाहिए था, आदत ऐसी ही बनी हुई है ना, इसलिए शायद नींद नहीं आ रही, क्या तु मेरी पैंटी उतार देगा, प्लीज
मैं ये सुनकर मुस्कुराया और बोला : ठीक है मां, अभी उतार देता हूं
मैनें कमरे की लाइट ऑन की, फिर मां ने सीधा लेटे हुए अपनी टांग थोड़ा सा ऊपर उठाई और बोली : बेटा ले उतार तो सही धीरे से खींच के
मैनें जैसे ही उनकी टांगों के सामने बैठ के दोनों हाथों से पैंटी को पकड़ा के मां की टांगे नीचे आ गई,उनका शरीर एक मिल्फ की तरह ही था , वो मोटी मोटी गांड़ और भारी टांगे,शायद यही कारण था के वो हवा में अपनी टांगों को रख ना पाई और बोली : सॉरी बेटा , वो टांगे थोडी भारी है ना , मुझसे हवा में इन्हे कुछ सेकंड्स भी रोका ही नहीं गया, सॉरी
मैं: अरे कोई बात नहीं मां,
मैनें मोके का फायदा उठा के फिर बोला : अच्छा एक काम करो या तो आप बैड पर खड़े हो जाओ मैं फिर उतार दूंगा या फिर मैं ये टांगे पहले उठा कर अपने कंधो पर रखता हु फिर दोनों हाथों से पैंटी सरका लूंगा, बताओ आप
मां हल्का सा मुस्कुराई और बोली : बेटा अब बैड से उठने का मन तो नहीं है तु वो दूसरा तरीका ही कर ले
मैं भी एक हल्की सी मुस्कान देकर बोला : ठीक है मां
ये बोलकर मैनें उनकी मेरे घुटनों पर गिरी टांगे हल्के हल्के से उठा के अपने कंधों पर रखी और फिर प्यार से उनकी नाइटी को दोनों साइड से ऊपर सरकाया और दोनों हाथों से पैंटी को पकड़ कर नीचे करने लगा के पैंटी उनकी भारी मोटी गांड़ में फसी हुई थी
मैं बोला : मां, थोड़ा सा ऊपर उठाओ ना
मां अनजान बनते हुए : क्या बेटा?
मैं: अरे ये आपके
मां : क्या?
मैं अचानक बोल पड़ा : आपकी गांड़ मां
ये सुनकर मां हंसने लगी और बोली : चुप बदमाश, कहां से सीखा है ये सब शब्द तु, बहुत बिगड़ गया है
मैं भी हंसने लगा और फिर बोला : अरे उठाओ भी अब हल्का सा
मां : अच्छा बच्चू, अब मां का हल्का सा वजन उठाने की भी ताकत नहीं है क्या तुझमें?
मैं: ऐसा नहीं है मां
मां : फिर बोल क्यूं रहा है, खुद ही उठा कर सरका ले ना पैंटी
मैनें ये सुनते ही बिना कुछ सोचे अपने को थोड़ा सा उनके और पास सरकाया और अपने हाथ उनकी गांड़ के नीचे डालकर ऊपर की ओर उठाया के मां सिसक उठी : आह, धीरे कर पागल, कमर मोड़ के तोड़ ही देगा क्या आज मेरी
मैं (हल्का सा हंसते हुए) : अरे सॉरी सॉरी मां
मैनें फिर उनकी पेंटी सरकाई और जैसे ही पैंटी ऊपर की उनके जहां उनके पैर मेरे कंधो पर पड़े थे, उसकी एक भीनी सी खुश्बू मुझे आई, जिसमे मां के पेशाब की खुश्बू भी शामिल थी, क्या नजारा था वो मानों मैं उन्हे चोदने की पोजिशन में ला रहा होऊं।
तभी मां बोली : हो गया सोनू बेटा, थैंक्यू।
अगर मुझे मां की उस वक्त कोई आवाज ना आती तो शायद उसी दिन मैं होश खो बैठ ता और उन्हें चोद बैठता । फिर मैनें खुद को वहां से हटाया और पेंटी पकड़ कर बोला : इसे कहां रखूं मां
मां बोली : ये बाहर गंदे कपड़े पड़े हैं उनमें रख दे
मैं उठ कर बाहर गया और पैंटी को सुनने लगा, उसे सूंघते ही मैं मदहोश हो गया और मेरा लोड़ा एकदम टाइट होकर लोवर में से झटके मारने लगा। मैनें एकदम पैंटी अपने लोड़े से लगाई और हल्का सा रगड़ कर , अपनी मां होने का खयाल कर उसे कपड़ों में रख कर अंदर कमरे में चला गया।

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Sahil
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ठीक इसी तरह मां लेती थी अपनी रैड कलर की पैंटी डालकर ❤️

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Satish Kumar
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Amazing...

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Sahil
Joined: 3 months ago

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@skcbn1982 thankyou brother ❤️

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Satish Kumar
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Amazing...

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